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ब्रह्मांड में मिला रहस्यमयी ग्रह, एलियंस जैसे रेडियो सिग्नल भेज रहा, धरती से 18 गुना बड़ा प्लैनेट क्या इंसानों का नया ठिकाना बनेगा?

पृथ्वी से 63 प्रकाश वर्ष दूर अंतरिक्ष की गहराइयों से लगातार कुछ रहस्यमयी रेडियो संकेत आ रहे हैं. वैज्ञानिकों ने जब इस आवाज का पीछा किया, तो जो सच सामने आया उसने ब्रह्मांड के सबसे बड़े राज से पर्दा उठा दिया है.

ब्रह्मांड में मिला रहस्यमयी ग्रह, एलियंस जैसे रेडियो सिग्नल भेज रहा, धरती से 18 गुना बड़ा प्लैनेट क्या इंसानों का नया ठिकाना बनेगा?
पृथ्वी से करीब 63 प्रकाश वर्ष दूर विशालकाय ग्रह है.

क्या हमारे सौर मंडल के बाहर भी जीवन है. क्या ब्रह्मांड के किसी सुदूर कोने से कोई हमसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा है. वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष की गहराइयों से कुछ ऐसे ही रहस्यमयी रेडियो संकेत मिले हैं, जिसने खगोलविदों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. पृथ्वी से करीब 63 प्रकाश वर्ष दूर, जहां एक विशालकाय ग्रह से लगातार अजीबोगरीब आवाजें आ रही हैं.

जिस ग्रह से यह रहस्यमयी 'आवाज' आ रही है, उसे वैज्ञानिकों ने नाम दिया है 'बीटा पिक्टोरिस बी' (Beta Pictoris b). साल 2008 में खोजा गया यह अनोखा ग्रह हमारे सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति से भी करीब 11 गुना भारी है. यह ग्रह अपने सूरज का एक चक्कर लगाने में लगभग 23.6 साल का वक्त लेता है. अब आप सोच रहे होंगे कि इतनी दूर मौजूद इस ग्रह की हलचल को वैज्ञानिकों ने पकड़ा कैसे?

दरअसल, वैज्ञानिक लंबे समय से इस तारे के सिस्टम से आने वाली रेडियो तरंगों पर नजर रख रहे थे. लेकिन पेंच यह फंसा था कि ये आवाजें तारे की अपनी हैं या उसके इर्द-गिर्द चक्कर काटने वाले किसी ग्रह की. इस गुत्थी को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों ने दक्षिण अफ्रीका के बेहद शक्तिशाली 'मीरकैट' (MeerKAT) टेलिस्कोप एरे का रुख किया. इस दूरबीन की पैनी नजर ने साफ कर दिया कि यह आवाज किसी तारे की नहीं, बल्कि सीधे 'बीटा पिक्टोरिस बी' ग्रह से ही आ रही है. 

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तो क्या वहां एलियंस मौजूद हैं...

अब आपके मन में भी यह सवाल कौंध रहा होगा कि क्या यह किसी दूसरी दुनिया के प्राणियों यानी एलियंस का इशारा है. अगर आप ऐसा सोच रहे हैं, तो जरा ठहरिए. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोई 'जादू' या परग्रहियों का संदेश नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बेहद खूबसूरत कुदरती घटना है.

असल में, इस ग्रह पर हमारी पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर दिखने वाली रंग-बिरंगी रोशनी यानी 'अरोरा' (Auroras) जैसी ही घटना हो रही है, लेकिन बेहद विशाल पैमाने पर. इस ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) इतना ताकतवर है कि यह अंतरिक्ष के चार्ज्ड कणों को अपनी तरफ खींच लेता है. यह ग्रह अपनी धुरी पर बेहद तेजी से घूमता है- मात्र आठ से नौ घंटे में इसका एक दिन पूरा हो जाता है. इसी तेज रफ्तार के कारण वहां जबरदस्त बिजली की तरंगें पैदा होती हैं, जो रेडियो सिग्नल्स के रूप में अंतरिक्ष में फैल रही हैं.

भले ही यह एलियंस का संदेश न हो, लेकिन ब्रह्मांड को समझने की दिशा में यह एक बहुत बड़ी कामयाबी है. वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारे सौर मंडल के बाहर किसी ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र की ताकत को सीधे मापा है. इस खोज ने अंतरिक्ष विज्ञान के लिए बंद पड़े कई नए दरवाजे खोल दिए हैं.

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