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AMH कम आया है? डॉक्टर ने बताया कब घबराने की जरूरत नहीं और कैसे संभव है प्रेग्नेंसी

अगर आपकी AMH रिपोर्ट कम आई है लेकिन पीरियड्स नियमित हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप मां नहीं बन सकतीं. फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार AMH सिर्फ अंडों की संख्या (Ovarian Reserve) बताता है, उनकी गुणवत्ता नहीं. जानिए Low AMH, ओव्यूलेशन, प्रेग्नेंसी चांस और फर्टिलिटी से जुड़े जरूरी सवालों के जवाब.

AMH कम आया है? डॉक्टर ने बताया कब घबराने की जरूरत नहीं और कैसे संभव है प्रेग्नेंसी
AMH कम आया है? डॉक्टर ने बताया कब घबराने की जरूरत नहीं और कैसे संभव है प्रेग्नेंसी
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अगर डॉक्टर ने आपसे कहा है कि आपका AMH कम है लेकिन आपके पीरियड्स हर महीने टाइम पर आते हैं, तो सबसे पहले तो घबराना बंद कर दीजिए. आप अकेली नहीं हैं जिसके साथ ऐसा हुआ है, और इसका ये मतलब कतई नहीं है कि आप कभी मां नहीं बन सकतीं. अक्सर लोग कम AMH की रिपोर्ट देखते ही सोच लेते हैं कि अब नैचुरल प्रेग्नेंट होना मुमकिन ही नहीं है, जबकि हकीकत इससे काफी अलग है.

AMH का मतलब सिर्फ इतना होता है कि आपकी ओवरी में अंडो की गिनती कितनी बची है. ये टेस्ट कभी ये नहीं बताता कि बचे हुए अंडों की क्वालिटी कैसी है. इस बात को समझ लेंगे तो बेवजह की टैंशन और डर अपने आप खत्म हो जाएगा.

आखिर ये AMH होता क्या है और डॉक्टर इसे क्यों चेक करते हैं?

जब भी कोई महिला फर्टिलिटी चेकअप के लिए जाती है तो डॉक्टर सबसे पहले AMH टेस्ट ही लिखते हैं. हमारे अंडाशय (ओवरी) में छोटी-छोटी थैलियां होती हैं जिन्हें फॉलिकल्स कहते हैं, इन्हीं के अंदर अंडे बनते हैं.

इन्हीं थैलियों से एंटी-मुलेरियन हार्मोन (AMH) निकलता है. खून में इसकी मात्रा देखकर डॉक्टर अंदाजा लगाते हैं कि शरीर में अंडों का रिजर्व कितना बचा है.

  • ज्यादा फॉलिकल्स होंगे तो AMH ज्यादा निकलेगा.
  • कम फॉलिकल्स होंगे तो खून में AMH का लेवल कम आएगा.
  • लेकिन याद रखिए, ये सिर्फ अंडों की संख्या बताता है, अंडों की क्वालिटी नहीं.

आमतौर पर अगर AMH 1.0 ng/mL से कम हो तो उसे कम माना जाता है. जब बाकी सब ठीक चल रहा हो और अचानक ऐसी रिपोर्ट आए तो किसी का भी घबरा जाना लाजमी है.

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पीरियड्स रेगुलर आ रहे हैं?

लोग अक्सर नंबर्स के फेर में एक बहुत सीधी बात भूल जाते हैं. अगर आपकी माहवारी हर 21 से 35 दिन के बीच बिल्कुल सही आ रही है, तो इसका सीधा मतलब है कि आपका शरीर हर महीने अंडा रिलीज कर रहा है यानी ओव्यूलेशन हो रहा है.

नेचुरल तरीके से कंसीव करने के लिए ओव्यूलेशन ही सबसे बुनियादी चीज है. समय पर पीरियड्स आने का मतलब है कि आपके दिमाग और ओवरी के बीच हॉर्मोन्स का तालमेल बढ़िया काम कर रहा है.

आपके एफएसएच और एलएच हॉर्मोन अपना काम ठीक से कर रहे हैं. शरीर में भले ही अंडों की तादाद औसत से कम हो, पर हर महीने एक अंडा तैयार होकर बाहर आ रहा है. और गर्भ ठहरने के लिए असल में सिर्फ एक ही अच्छे अंडे की जरुरत होती है.

अंडों की संख्या और मां बनने की क्षमता में बहुत फर्क है 

ये दो अलग बातें हैं जिन्हें लोग एक ही समझ बैठते हैं. अंडों का रिजर्व: इसका मतलब सिर्फ इतना है कि बैंक में कुल कितने अंडे बाकी हैं.

फर्टिलिटी पोटेंशियल: यानी कंसीव करने की असली ताकत. ये सिर्फ अंडों की गिनती पर नहीं, बल्कि अंडे की क्वालिटी, पति के स्पर्म की सेहत, फैलोपियन ट्यूब की स्थिति और गर्भाशय पर निर्भर करती है.

कम AMH होने पर भी कई महिलाएं बिना किसी दवा या इलाज के आराम से प्रेग्नेंट हो जाती हैं, खासकर अगर उनकी उम्र 35 से कम हो. एक बड़ी मेडिकल रिसर्च में भी यह साबित हुआ है कि कम AMH वाली युवा महिलाओं के नेचुरल कंसीव करने के चांस उतने ही अच्छे होते हैं जितने नॉर्मल AMH वाली महिलाओं के.

AMH कम होने की क्या वजह हो सकती है?

इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं:

  • हर इंसान के शरीर की अपनी बनावट (नेचुरल वेरिएशन)
  • उम्र का बढ़ना
  • ओवरी की पहले कोई सर्जरी हुई हो
  • कीमोथेरेपी जैसा कोई पिछला मेडिकल इलाज
  • आनुवांशिक (जेनेटिक) कारण

और कई बार तो कोई खास वजह होती ही नहीं, बस शरीर की अपनी प्रकृति ऐसी होती है. इसे कोई बीमारी नहीं कहा जा सकता.

अगर पीरियड्स सही हैं और AMH कम आया है तो डरने की नहीं, बस समझदारी से फैसला लेने की जरुरत है. हो सकता है आपके पास समय थोड़ा कम हो, इसलिए ज्यादा देर न करें. कम AMH के साथ भी लाखों महिलाओं ने पूरी तरह सेहतमंद बच्चों को जन्म दिया है. यह रिपोर्ट आपकी जिंदगी का एक छोटा सा हिस्सा है, पूरी कहानी नहीं. किसी अच्छे डॉक्टर से मिलकर बात करें और फालतू का तनाव लेना छोड़ दें.

(डॉ. अपूर्वा सतीश अमरनाथ, क्लिनिकल डायरेक्टर एवं फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी, कल्याण नगर)

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरुकता और पाठक के ज्ञान के लिए है. इसे किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की चिकित्सीय राय का विकल्प न मानें. अपनी सेहत या फर्टिलिटी से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

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