विज्ञापन

Liquid Gold: सोने के नैनोपार्टिकल्स बनेंगे कैंसर का नया हथियार, जापानी रिसर्चर्स ने की नई खोज

Liquid-Like Gold Nanoparticles Could Transform Cancer Treatment: जापानी वैज्ञानिकों ने ऐसे सोने के नैनोपार्टिकल्स विकसित किए हैं जो तरल की तरह व्यवहार करते हैं और तापमान व दबाव के अनुसार अपना आकार बदलते हैं. भविष्य में ये तकनीक कैंसर के टारगेटेड इलाज, स्मार्ट ड्रग डिलीवरी और नए तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस बनाने में बहुत उपयोगी हो सकती है.

Liquid Gold: सोने के नैनोपार्टिकल्स बनेंगे कैंसर का नया हथियार, जापानी रिसर्चर्स ने की नई खोज
Liquid-Like Gold Nanoparticles Could Transform Cancer Treatment
AI

Liquid-Like Gold Nanoparticles Could Transform Cancer Treatment: जापानी वैज्ञानिकों ने सोने के ऐसे नैनोपार्टिकल्स (Nanoparticles) खोज निकाले हैं जो लिक्विड गोल्ड यानी तरल पदार्थ की तरह और बहुत ही डाइनेमिक तरीके से व्यवहार कर सकते हैं. कुछ खास परिस्थितियों में वे लगभग जीवित पदार्थ जैसे लगते हैं. यह बात 'जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी' में छपी एक रिपोर्ट में बताई गई है. जापानी वैज्ञानिकों की यह खोज भविष्य में मेडिकल साइंस, कैंसर के इलाज, ड्रग डिलीवरी और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की दुनिया को पूरी तरह से बदल सकते हैं.

तोहोकू यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने पाया कि हवा और पानी के इंटरफेस पर रखे गए सोने के नैनोपार्टिकल्स तापमान और दबाव के मुताबिक अपनी संरचना बदल सकते हैं. स्थिर रहने के बजाय, ये कण खुद को फिर से व्यवस्थित कर सकते हैं, और अलग-अलग पैटर्न बना सकते हैं, जैसे कि अलग-थलग समूह (clusters), कतारें (chains), और जाल जैसी स्ट्रक्चर्स (Structures).

Latest and Breaking News on NDTV 

कैसे रिस्पांस करते हैं नैनोपार्टिकल्स?

इस स्टडी से पता चलता है कि इन नैनोपार्टिकल्स पर खास तौर पर डिजाइन किए गए ऑर्गेनिक मोलिक्यूल्स (Organic Molecules) की परत चढ़ी होती है, जिनमें टेम्प्रेचर रिस्पोंसिव मेटिरियल (Temperature Responsive Material) भी शामिल हैं. ये परतें कणों को बाहरी परिस्थितियां बदलने पर अपनी व्यवस्था बदलने में मदद करती हैं.

डॉ. रीना सातो और प्रोफेसर कियोशी कानी की देखरेख में तोहोकू यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने सोने के इन नैनोपार्टिकल्स को हवा और पानी के बीच सतह यानी इंटरफेस पर रखा. इन पार्टिकल्स को खास बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने इन पर दो तरह के ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स की परत चढ़ाई. इस कोटिंग का असर यह हुआ कि ये नैनोपार्टिकल्स तापमान और प्रेशर के हिसाब से रिएक्ट करने लगे.

यह भी पढ़ें- Weight Loss Pizza Recipe: बिना मैदा और भारी बेस के बनाएं ऐसा हेल्दी पिज्जा, स्वाद भी मिलेगा और डाइट भी नहीं होगी खराब

स्ट्रक्चर बदलते हैं ये नैनोपार्टिकल्स

लगभग 40°C तापमान पर, ये नैनोपार्टिकल्स अलग-अलग "द्वीप जैसी" आकृतियों से बदलकर आपस में जुड़े हुए जाल (networks) में बदलने लगते हैं. जब इन पर दबाव डाला जाता है, तो ये फिर से अपनी पुरानी स्थिति में लौट सकते हैं. रिसर्चर्स के अनुसार यह रिसर्च दिखाती है कि कैसे मॉलिक्यूलर पर किए गए छोटे से बदलाव से नैनोपार्टिकल्स के पूरे ढांचे को बदला जा सकता है.

कैंसर के इलाज में कैसे होगा मददगार?

रिसर्च में ये बात सामना आई कि ये बदलाव 40 डिग्री सेल्सियस के आस-पास हो रहा है, जो इंसानी शरीर के टेंपरेचर के बहुत पास है. यानी भविष्य में ऐसी दवाइयां बनाई जा सकेंगी जो शरीर के अंदर जाकर सिर्फ बीमारी वाले हिस्से जैसे ट्यूमर या कैंसर सेल्स के टेंपरेचर को भांपकर वहीं पर एक्टिव होंगी और दवा रिलीज कर पाएंगी. इससे शरीर के बाकी अंगों को नुकसान नहीं पहुंचेगा. इसके अलावा ड्रग डिलिवरी सिस्टम, लचीले इलेक्ट्रॉनिक्स और माइक्रोफ्लुइडिक डिवाइसेस में इनका संभावित उपयोग हो सकता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com