तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता कल्याण बनर्जी के सुर भी बदलते नजर आ रहे हैं. उन्होंने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर करारा हमला बोला है. कल्याण ने एक वीडियो में कहा, यह मेरे लिए बहुत अपमानजनक है. उनके घमंडी रवैये ने पूरी पार्टी को बर्बाद कर दिया है, उन्हें यह समझना चाहिए. उनके गलत व्यवहार ने सब कुछ खत्म कर दिया है. उन्हें हर दिन लगता है कि वे राजा हैं. बुरे समय में भी. जब मैं पार्टी के लिए और ममता बनर्जी के साथ खड़ा हूं तो अभिषेक बनर्जी के इस घमंडी रवैये के कारण मेरे लिए काम करना नामुमकिन हो गया है. कल्याण बनर्जी ने कहा, मैं ममता बनर्जी के साथ हूँ, लेकिन उन्हें यह तय करना होगा कि अगर वे अभिषेक के बिना पार्टी नहीं चला सकतीं, तो फिर मैं उनके साथ नहीं हूं.
कल्याण बनर्जी ने कहा, आप ऐसा कैसे कर सकते हैं. मुझे सलाह नहीं ली गई. सारे मामले एक व्यक्ति द्वारा हैंडल किए जाने चाहिए. मैं कोर्ट के सामने पेश नहीं होउंगा. क्या कोई सीनियर वकील के साथ ऐसा सलूक करता है. जूनियर वकील क्या सोचेंगे. किशोर दत्ता और सब्यसाची जूनियर हैं. उनको ये समझना होगा कि उनके घमंड ने पूरी पार्टी को बर्बाद कर दिया है.
उनके गलत रवैये ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है. मुश्किल भरे वक्त में भी मैंने उनका साथ दिया है. लेकिन मेरे लिए अब काम करना मुश्किल हो गया है. सिर्फ अभिषेक बनर्जी के अभिमान के कारण ऐसा हुआ है. आप दीदी तय करें कि क्या करना चाहिए. क्या आप इसे भरोसे की कमी का मामला देखते हैं. क्या आप तृणमूल कांग्रेस में रहेंगे, इस सवाल पर कल्याण बनर्जी ने कहा, मैं ममता बनर्जी के साथ हूं. लेकिन अब उन्हें तय करना होगा कि वो मुझे साथ रखेंगी या अभिषेक बनर्जी को.
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कल्याण बनर्जी का यह वीडियो ऐसे वक्त आया है, जब तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी चौतरफा बगावत का सामना कर रही हैं. टीएमसी के 58 विधायकों ने अलग गुट बनाकर विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया है. टीएमसी के करीब 19 लोकसभा सांसदों ने अलग गुट बनाने की कवायद शुरू कर दी है. राज्यसभा के तीन सांसदों ने भी इस्तीफा दे दिया है. टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव के बाद प्रकाश चिक बराइक ने भी त्यागपत्र दे दिया है. पार्टी से बगावत करने वाले कई नेताओं ने अभिषेक बनर्जी के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं. हालांकि ज्यादातर बागी नेता ममता बनर्जी पर निशाना साधने से बचते रहे हैं.
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टीएमसी ने पिछले 15 सालों तक बंगाल में राज किया, लेकिन हालिया बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार हुई है. 200 से ज्यादा सीटें जीतने वाली तृणमूल सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई. खुद ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हार का सामना करना पड़ा. बीजेपी ने 208 सीटें जीतकर पहली बार बंगाल में सरकार बनाई है. शुभेंदु अधिकारी जो कभी ममता बनर्जी के सिपहसालार थे, अब उन्होंने कमान संभाली हैं. टीएमसी के बागी नेता भी शुभेंदु अधिकारी के संपर्क में हैं. शुभेंदु ने उनके साथ बैठकें भी की हैं.
कभी ममता के बेहद करीबी रहीं काकोली घोष, सुष्मिता देव, शताब्दी रॉय जैसी नेता दूसरे पाले में खड़े दिख रहे हैं. ममता के सामने अब पार्टी का वजूद बचाने का संकट है. पार्टी को डर यह भी है कि कहीं बागी खेमा ही असली तृणमूल कांग्रेस न बन जाए. महाराष्ट्र में शिवसेना में दोफाड़ के बाद उद्धव ठाकरे को भी एकनाथ शिंदे के हाथों ऐसा ही झटका लगा था.
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