आज के समय का डिजिटल दौर कई तरह की समस्याओं को हल करने में मदद करता है. पुराने समय की बात करें तो जहां पर किसी भी चीज को खरीदने के लिए दुकानों के खुलने का इंतजार करना पड़ता है. देर रात हुई कोई समस्या के लिए भी दिन का इंतजार होता था. खासकर बात करें दवाइयों की तो ये या तो आपको मेडिकल स्टोर में मिलती थीं या फिर सुबह का इंताजर या फिर अस्पतालों में जाकर लंबी-लंबी लाइनों में इंतजार, लेकिन आज के समय में ऐसा नहीं है. इस डिजिटल इंडिया में आप हर चीज को घर बैठे ऑनलाइन मंगा सकते हैं.
ऐसे में भारत में ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म अब क्रॉनिक (दीर्घकालिक) बीमारियों को रोकने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे हैं. इसकी सबसे अच्छी बात ये है कि इसके लिए आपके दवा के पर्चे को संभाल कर रखने की जरूरत नहीं हैं. खासकर उन बीमारियों में जिसमें मरीजों को लंबे समय तक नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करना पड़ता है. ऐसे लोगों के लिए इस तरह के प्लेटफॉर्म जो उनके लिए ना सिर्फ दवाइयों की पहुंच आसान बनाते हैं बल्कि उनके काम को आसान भी कर देते हैं. बदलती जीवनशैली, बढ़ती बीमारियों और डिजिटल सेवाओं की पहुँच ने इस बदलाव को और तेज किया है.
इन बीमारियों में दवाओं का सेवन करना होता है हमेशा
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल से जुड़ी बीमारियाँ और थायरॉयड जैसी स्थितियों में मरीजों को महीनों या कई बार सालों तक दवाइयों का सेवन करना पड़ता है. इस दौरान इलाज को कंटिन्यू बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. कुछ बीमारियों में अगर एक भी दिन दवा नहीं ली तो पूरा कोर्स खराब हो जाता है और उसके पहले प्वाइंट से ही शुरू करना होता है. लेकिन कई बार दवाई ना मिलना और बार-बार मेडिकल स्टोर जाने की जरूरत मरीजों के लिए चुनौती बन जाती है, खासकर छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले लोगों के लिए.
क्या है खास
ऐसे में ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म कुछ हद तक इन समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं. इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए मरीज अपनी पुरानी प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दोबारा दवाइयाँ मंगा सकते हैं. इससे इलाज के दौरान दवाइयों की निरंतरता बनाए रखना आसान हो जाता है और मरीजों को बार-बार बाहर जाकर मेडिकल स्टोर्स पर लाइन लगाने की जरूरत नहीं होती है.
कैसे बनाता है काम को आसान
कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म मरीजों को दवाइयों के बारे में ज्यादा जानकारी भी उपलब्ध कराते हैं. दरअसल, कई बार ऐसा होता है कि डॉक्टर ने आपको पर्चे पर जो दवा लिखी होती है वो नहीं मिलती है. या फिर वो बहुत महंगी होती है. ऐसे में इन प्लेटफॉर्मस की मदद से आप अलग-अलग ब्रांड्स की दवाइयों में सेम सॉल्ट और उनके असर के बारे में भी जानकारी देते हैं. इससे मरीजों को अपने ऑप्शन समझने में मदद मिलती है और आप अपनी जरूरत के हिसाब से दवाएं मंगा सकते हैं. ये उन मरीजों के लिए ज्यादा यूजफुल है जो लंबे समय तक एक ही तरह की दवाइयाँ लेते हैं. ऐसे में आप अपनी पॉकेट को ध्यान में रखते हुए दवाइयां मंगा सकते हैं.
कौन से प्लेटफॉर्म है फायदेमंद
अब सवाल है कि आप कैसे पता लगाएंगे कि आप जहां से दवाएं ऑर्डर कर रहे हैं वो बिल्कुल सही आ रही हैं. Truemeds जैसे प्लेटफॉर्म इसी तरह के मॉडल पर काम करते हैं, जहाँ क्रॉनिक बीमारियों के मरीजों को ध्यान में रखते हुए सेवाएँ दी जाती हैं. यहाँ दवाइयों का ऑर्डर कन्फर्म होने से पहले प्रिस्क्रिप्शन की जांच की जाती है और आवश्यकता होने पर फार्मासिस्ट या डॉक्टर मरीज से कॉन्टेक्ट भी करते हैं. इस प्रोसेस के दौरान मरीजों को उपलब्ध ऑप्शन्स के बारे में समझाया जाता है, जिससे वो बेहतर तरीके से निर्णय ले सकें.
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ऑनलाइन फार्मेसी का एक और पहलू इसकी पहुँच से जुड़ा है. डिजिटल माध्यमों के कारण ये सेवाएँ बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों तक भी पहुँच बना रही हैं. इससे उन मरीजों को भी सुविधा मिलती है, जिन्हें पहले दवाइयों के लिए सीमित विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ता था. कुल मिलाकर, ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म भारत में क्रॉनिक बीमारियों के प्रबंधन का एक पूरक माध्यम बनते जा रहे हैं. दवाइयों की उपलब्धता, जानकारी की पहुँच और डिजिटल सुविधाओं के कारण मरीजों के लिए लंबे समय तक इलाज जारी रखना पहले की तुलना में कुछ आसान हुआ है. आने वाले समय में, जैसे-जैसे डिजिटल सेवाओं का उपयोग बढ़ेगा, इस क्षेत्र में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
ऑनलाइन दवाएं खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
लेकिन अगर आप भी ऑनलाइन दवाइयां मंगाते हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए. ऑनलाइन दवाइयां मंगाते समय हमेशा भरोसेमंद वेबसाइट/ऐप का ही इस्तेमाल करें, डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन (Prescription) अपलोड करें, और एक्सपायरी डेट और पैकेजिंग भी जरूर देखें. बिना प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं को रोकने बचें, कैश ऑन डिलीवरी का ऑप्शन रखें.
- वेबसाइट की आथेंटिसिटी चेक करें
- प्रिस्क्रिप्शन जरूर रखें.
- दवा की पैकिंग, एक्सपायरी और सील जरूर चेक करें.
- दवाएं आने के बाद उनके नाम और क्वांटिटी को भी चेक करें.
- अगर दवा के रंग या पैकेजिंग में कोई अंतर है तो जरूर चेक करें.
- जहां से दवा ऑर्डर करें वहां कस्टमर केयर की सुविधा भी हो.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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