विज्ञापन

कान में जमी मैल चुटकियों में आएगी बाहर, कान साफ करने के सुरक्षित देसी उपाय, यूनानी डॉक्टर से जानिए

कान का मैल कैसे साफ करें और ईयरबड का इस्तेमाल क्यों नुकसान पहुंचा सकता है? एक्सपर्ट से जानिए कान में मैल जमने के लक्षण, जरूरी सावधानियां और डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए.

Medically Reviewed By: Dr Syed Ahmed Khan
कान में जमी मैल चुटकियों में आएगी बाहर, कान साफ करने के सुरक्षित देसी उपाय, यूनानी डॉक्टर से जानिए
कान का मैल घर पर कैसे साफ करें?
NDTV

हम सबकी एक बहुत बुरी आदत होती है. बैठे-बैठे कान में जरा सी सुरसुराहट या खुजली हुई नहीं कि हाथ अपने आप जेब की चाबी, माचिस की तीली या फिर सेफ्टी पिन ढूढ़ने लगता है. कई लोग तो ऑफिस की मेज पर रखी पेन की निब या पेपरक्लिप ही कान में घुसेड़ देते हैं. सच बताएं तो उस वक्त दो मिनट का जो सुकून मिलता है, उसके चक्कर में लोग ये भूल जाते हैं कि वो अपने कान के पर्दे के साथ कितना बड़ा रिस्क ले रहे हैं. एक छोटी सी चूक और जिंदगी भर के लिए सुनने की ताकत जा सकती है. अगर आपके कान में भी लगता है कि मैल जम गया है या आवाज कुछ दबी-दबी आ रही है, तो किसी औजार से कान खोदने के बजाय कुछ सीधे और आजमूदा देसी नुस्खे समझ लीजिए.

पहले ये समझें कान में ये मैल बनता क्यों है?

अक्सर लोग सोचते हैं कि कान का मैल कोई गंदी चीज है जिसे हर दूसरे दिन खुरचकर बाहर कर देना चाहिए. हकीकत ये है कि ये हमारे शरीर का अपना पहरेदार है.

  • कान के अंदर छोटी-छोटी थैलियां होती हैं जो हल्का चिकना मोम जैसा पदार्थ बनाती हैं.
  • कान का मैल हवा में उड़ती धूल, गर्दा या कोई छोटा-मोटा कीड़ा कान के नाजुक पर्दे तक पहुंचने से रोकता है.
  • भगवान ने हमारा शरीर ऐसा बनाया है कि जब हम दिनभर बोलते हैं, हंसते हैं या रोटी चबाते हैं, तो जबड़े के हिलने से ये सूखा मैल अपने आप खिसककर कान के मुहाने पर आ जाता है.
  • द‍िककत तब आती है जब लोग बाहर से तीली या बड डालकर उस मैल को जबरन अंदर ठूस देते हैं, जिससे वो वहां जाकर पत्थर जैसा कड़ा हो जाता है.

कैसे पता चले कि कान सच में बंद हो चुका है?

हर छोटी खुजली का मतलब ये नहीं होता कि कान कचरे से भरा पड़ा है. लेकिन अगर ये कुछ दिक्कतें लगातार महसूस हो रही हैं, तो समझ जाइए कि मैल अंदर जम चुका है. फोन कान पर लगाने पर लगे कि आवाज कम आ रही है या दूसरी तरफ से कोई गूंज सी सुनाई दे रही है.

अगर आपको ऐसा महसूस हो रहा है कि कान के अंदर भारीपन है, जैसे किसी ने गीली रुई ठूंस दी हो तो समझ जाएं कि कान में मैल जमा हो सकता है.

वहीं, कान के अंदर बार-बार खुजलाहट होना और बेचैनी रहने के अलावा कभी-कभार कान में सीटी बजने जैसी सांय-सांय की हल्की आवाज आना भी इसके लक्षणों में से एक हो सकता है.

Also Read: कान का मेल कैसे निकालें? सिर्फ 2 बूंद में सारी गंदगी आ जाएगी बाहर

घर पर जमा हुआ मैल ढीला करने के आसान तरीके

1. हल्का कुनकुना सरसों का तेल : गांव-देहात में आज भी ये तरीका सबसे ज्यादा चलता है. एक चम्मच शुद्ध सरसों का तेल लें. उसे चम्मच में ही गैस पर बिल्कुल हल्का सा गुनगुना कर लें. ध्यान रहे, तेल गर्म नहीं होना चाहिए, बस इतना कि हाथ पर लगाने से जलन न हो. बिस्तर पर एक तरफ करवट लेकर लेट जाएं और ड्रॉपर या उंगली के सहारे सिर्फ एक या दो बूंद कान में टपका लें. पांच मिनट आराम से लेटे रहें. इसके बाद दूसरी तरफ गर्दन घुमा लें और कान के नीचे एक पुराना सूती कपड़ा रख लें.

कान में जमा मैल को घर पर किसी नुकीली चीज से निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. अगर कान बंद महसूस हो रहा है या सुनाई कम दे रही है, तो ENT डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है. कान में पहले से दर्द, संक्रमण, पानी/मवाद आना या पर्दे में छेद होने की आशंका हो तो बिना डॉक्टर की सलाह कोई तेल या तरल न डालें.

2. बादाम रोगन या नारियल का तेल : अगर सरसों का तेल भारी लगता है, तो मीठा बादाम तेल या शुद्ध नारियल तेल भी बहुत बढ़िया काम करता है. अगर कान में सूखेपन की वजह से खारिश हो रही है, तो नारियल तेल की एक बूंद अंदर की चमड़ी को राहत देती है. इसे डालने से जो मैल अंदर दीवारों पर चिपक गया है, वो अपनी पकड़ छोड़ देता है.

3. गुनगुना पानी और हल्का सा नमक :  जिन लोगों को कान में तेल डालना बिल्कुल पसंद नहीं आता, वो गुनगुने पानी का सहारा ले सकते हैं. आधा कटोरी हल्का गर्म पानी लें और उसमें चुटकी भर नमक घोल लें. रुई के फाहे को उसमें डुबोकर कान के छेद पर हल्का सा निचोड़ें. दो मिनट रुककर सिर को उल्टा झुका दें. पानी अपने साथ मैल के छोटे-छोटे टुकड़ों को बहाकर बाहर ले आएगा. इसके बाद कान को सूखे गमछे से हल्के हाथ से पोंछ लें.

सफदरजंग अस्पताल के पुराने एक्सपर्ट की बात भी सुन लीजिए

कान की इन आदतों पर हमने बात की नई दिल्ली स्थित मशहूर सफदरजंग अस्पताल में यूनानी विभाग के पूर्व प्रमुख (Ex Head of Unani Department) डॉ. सैयद अहमद खान (Dr. Syed Ahmed Khan) से. उनका कहना है कि आज के दौर में सबसे बड़ी मुसीबत बन गए हैं बाजार में बिकने वाले कॉटन बड्स. लोग इन्हें कान साफ करने की दवा समझ बैठे हैं.

डॉ. सैयद अहमद खान बताते हैं कि जब आप ईयरबड कान में डालते हैं, तो उसकी रुई थोड़ा बहुत मैल तो बाहर लाती है, लेकिन आधे से ज्यादा मैल को अंदर की तरफ धकेल देती है. इससे वो मैल सीधे पर्दे के पास जाकर जम जाता है और वहां एक पपड़ी बन जाती है. उनका कहना है कि कान को किसी खास सफाई की जरूरत नहीं होती.

जब आप सुबह नहाते हैं, तो गीले तौलिए के कोने से कान के बाहर-बाहर की गंदगी पोंछ लेना ही काफी है. अगर किसी के कान में बहुत पुराना और पत्थर जैसा सख्त मैल जम गया है, जिससे सिर में दर्द या भारीपन हो रहा हो, तो किसी झोलाछाप के चक्कर में पड़ने के बजाय सीधे अस्पताल जाकर कान की धुलाई करा लेनी चाहिए, जिसमें कोई दर्द नहीं होता.

कान के साथ ये गलतियां तो बिल्कुल मत कीजिएगा

माचिस या चाबी कान में कभी न डालें: लकड़ी की तीली कान के अंदर टूट सकती है या चाबी की रगड़ से अंदर घाव बन सकता है, जिससे बाद में मवाद आने लगता है.
खौलता हुआ तेल न डालें: कई लोग तेल को इतना गर्म कर देते हैं कि डालते ही कान की पतली चमड़ी झुलस जाती है.
कान में मुंह से फूंक न मारें: गांव में अक्सर लोग कान में हवा फूंकते हैं, इससे कान के पर्दे पर अचानक तेज दबाव पड़ता है और नुकसान हो सकता है.
पर्दे में छेद हो तो कुछ न डालें: अगर कभी कान से पानी या मवाद बहा हो, तो घर का कोई भी नुस्खा न आजमाएं.

डॉक्टर के पास कब भागना चाहिए

अगर कान में अचानक से तेज टीस उठने लगे, कान से बदबूदार पीला या भूरा पानी बहने लगे, या फिर चक्कर आने जैसी नौबत आ जाए, तो समझ लीजिए कि बात सिर्फ मैल तक सीमित नहीं है. हो सकता है अंदर कोई फंगल इंफेक्शन हो गया हो या पर्दे पर सूजन आ गई हो. ऐसे में कोई भी तेल या पानी कान में डालने की गलती न करें और सीधे किसी ईएनटी स्पेशलिस्ट को दिखाएं.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Health, Ear Wax, Ear Wax Cleaning, Kan Ka Mail, Home Remdies
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com