कुछ बाहर का खाने का मन है? चलो कुछ ऑर्डर कर लेते हैं. क्या आप भी अक्सर ऐसा करते हैं? अगर हां, तो यह स्टोरी आपके लिए है. बदलती लाइफस्टाइल, जंक फूड और प्रोसेस्ड खाने की बढ़ती आदतों के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है. कई लोग इसे सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि इसके बारे में कई गलत धारणाएं भी लोगों के बीच मौजूद हैं.
इसी सवाल को ध्यान में रखते हुए AIIMS, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से ट्रेंड गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर कर फैटी लिवर से जुड़े तीन बड़े मिथ्स के बारे में बताया है. उनके मुताबिक, सही जानकारी और समय रहते जीवनशैली में बदलाव करके इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. आइए जानते हैं फैटी लिवर से जुड़े उन मिथ्स के बारे में, जिन पर लोग अक्सर विश्वास कर लेते हैं.
यहां देखिए वीडियो...
मिथ 1: फैटी लिवर सिर्फ ज्यादा फैट खाने से होता है
अक्सर लोगों को लगता है कि घी, तेल या अन्य वसायुक्त चीजें खाने से ही लिवर में फैट जमा होता है, लेकिन डॉ. सौरभ सेठी के अनुसार, यह पूरी तरह सच नहीं है. फैटी लिवर का सबसे बड़ा कारण केवल फैट नहीं, बल्कि हाई-फ्रक्टोज फूड्स और कुछ प्रोसेस्ड चीजें हैं.
पैकेज्ड सॉफ्ट ड्रिंक्स, मीठे पेय पदार्थ, प्रोसेस्ड स्नैक्स और जंक फूड में मौजूद फ्रक्टोज लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकता है. इसके अलावा खराब गुणवत्ता वाले सीड ऑयल्स भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं.
आगे डॉक्टर ने ये भी बताया कि सभी तरह के फैट नुकसानदायक नहीं होते. एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल, एवोकाडो और नट्स में पाए जाने वाले हेल्दी फैट्स शरीर के साथ-साथ लिवर के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं.
मिथ 2: फैटी लिवर कोई गंभीर बीमारी नहीं है
कई लोगों का मानना है कि फैटी लिवर बहुत आम बीमारी है, इसलिए इससे ज्यादा नुकसान नहीं होता, लेकिन यह सोच गलत है. डॉ. सेठी के मुताबिक, अगर फैटी लिवर को समय रहते कंट्रोल न किया जाए तो यह धीरे-धीरे गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है. यह आगे चलकर नॉन-अल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकता है.
इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते. यही वजह है कि कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चल पाता कि उनका लिवर प्रभावित हो चुका है. इसलिए नियमित ब्लड टेस्ट और डॉक्टर से समय-समय पर जांच कराना बेहद जरूरी माना जाता है.
मिथ 3: सिर्फ डाइट बदलने से फैटी लिवर में सुधार नहीं हो सकता
कुछ लोगों को लगता है कि एक बार फैटी लिवर हो जाए तो इसे ठीक करना मुश्किल होता है और केवल खानपान में बदलाव करने से कोई फायदा नहीं मिलता, लेकिन डॉ. सौरभ सेठी इसे भी एक मिथक मानते हैं. उनके अनुसार, फैटी लिवर ऐसी स्थिति है जिसमें सही जीवनशैली अपनाकर काफी सुधार किया जा सकता है और कई मामलों में इसे पूरी तरह रिवर्स भी किया जा सकता है. इसके लिए महंगे डिटॉक्स टी, सप्लीमेंट्स या किसी विशेष प्रोडक्ट की जरूरत नहीं होती.
अगर व्यक्ति अपने शरीर के वजन का 5 से 10 प्रतिशत तक कम कर ले, हाई-फ्रक्टोज और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम कर दें और नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करे, तो लिवर को हेल्दी रखा जा सकता है.
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