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सिर्फ प्रदूषण नहीं! Perfume से लेकर Room Freshener तक, घर की ये चीजें बढ़ा सकती हैं खांसी और सांस की बीमारी

क्या आपके घर में भी रोज परफ्यूम, रूम फ्रेशनर और मच्छर कॉइल का इस्तेमाल होता है? हो जाएं सावधान, ये बढ़ा सकते हैं खांसी और दम घुटने का खतरा.

सिर्फ प्रदूषण नहीं! Perfume से लेकर Room Freshener तक, घर की ये चीजें बढ़ा सकती हैं खांसी और सांस की बीमारी
सांस की तकलीफ और घरघराहट के लिए क्या घरेलू उपचार हैं?
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आजकल जब भी खांसी, जुकाम या सांस फूलने की बात होती है, तो हम तुरंत बाहर के प्रदूषण को कोसने लगते हैं. दिल्ली-एनसीआर का स्मॉग हो या सड़कों की धूल-मिट्टी, सारा ठीकरा बाहर की हवा पर ही फोड़ा जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस घर को आप सबसे सुरक्षित समझते हैं, वहीं की हवा आपकी सेहत बिगाड़ रही हो सकती है?

जी हां, हमारे घर के अंदर भी एक तरह का छुपा हुआ प्रदूषण होता है. सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि जिस खुशबू को हम घर चमकाने और महकाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, वही हमारे फेफड़ों की दुश्मन बन जाती है. आइए बिना किसी घुमावदार भाषा के सीधी बात करते हैं कि घर की कौन-कौन सी चीजें आपको बीमार बना रही हैं.

परफ्यूम और बॉडी स्प्रे:

हम सबको बाहर जाते वक्त या घर में भी थोड़ा सेंट या बॉडी स्प्रे छिड़कना पसंद होता है, लेकिन इन परफ्यूम में कई तरह के केमिकल्स और सॉल्वेंट्स मिलाए जाते हैं जिन्हें वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स कहा जाता है.

  • फेफड़ों में जलन: जब आप स्प्रे करते हैं, तो इसके बारीक कण हवा में तैरने लगते हैं. सांस खींचते ही ये सीधे हमारी सांस की नली में चले जाते हैं जिससे गले में खराश और खांसी शुरू हो जाती है.
  • अस्थमा के मरीजों के लिए खतरा: अगर आपके घर में किसी को दमा या एलर्जी की शिकायत है, तो तेज परफ्यूम की गंध तुरंत अटैक ट्रिगर कर सकती है.
  • सर दर्द और चक्कर: ज्यादा महक वाले स्प्रे बंद कमरे में इस्तेमाल करने से सिर भारी होना और उल्टी जैसा लगना बहुत आम बात है.

रूम फ्रेशनर और सुगंधित मोमबत्तियां

कमरे की बदबू भगाने के लिए हम अक्सर रूम फ्रेशनर छिड़क देते हैं या खुशबूदार मोमबत्तियां जला लेते हैं. हमें लगता है कि हवा साफ हो गई, लेकिन सच ये है कि ये फ्रेशनर हवा को साफ नहीं करते, बल्कि बदबू को अपनी तेज केमिकल वाली खुशबू से दबा देते हैं.

  • थैलेट्स का जाल: ज्यादातर लिक्विड या एरोसोल फ्रेशनर में सिंथेटिक फ्रैग्रेंस होती है. ये केमिकल हमारी नाक की म्यूकस झिल्ली को नुकसान पहुंचाते हैं.
  • मोमबत्तियों का धुआं: खुशबूदार मोमबत्तियां जलते वक्त पैराफिन वैक्स का बारीक धुआं छोड़ती हैं जो सिगरेट के धुएं की तरह ही फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है.
  • सॉल्यूशन: रूम फ्रेशनर की जगह खिड़कियां खोलकर ताजी हवा आने दें या नींबू और संतरे के छिलकों का नेचुरल इस्तेमाल करें.

मच्छर भगाने वाली कॉइल और लिक्विड रेपेलेंट:

गर्मी और बारिश के मौसम में मच्छर भगाने के लिए हर घर में ऑल-आउट, गुडनाइट लिक्विड या कॉइल जलती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक मच्छर भगाने वाली कॉइल का धुआं लगभग 100 सिगरेट के धुएं के बराबर नुकसान पहुंचा सकता है?

  • रात भर जहरीली हवा: रात को खिड़की-दरवाजे बंद करके जब हम लिक्विड या कॉइल जलाकर सोते हैं, तो कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड और जहरीले कण जमा हो जाते हैं.
  • सुबह उठकर खांसी होना: कई लोगों को सुबह उठते ही सूखी खांसी आती है या गला सूखा-सूखा लगता है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये मॉस्किटो रेपेलेंट ही होते हैं.

अगरबत्ती और धूपबत्ती का धुआं:

हमारे भारतीय घरों में पूजा-पाठ के दौरान अगरबत्ती या धूप जलाना रोज की दिनचर्या का हिस्सा है. धार्मिक आस्था अपनी जगह है, लेकिन सेहत के लिहाज से इसका धुआं फेफड़ों के लिए बहुत नुकसानदायक साबित होता है.

  • अगरबत्ती का धुआं और फेफड़े: अगरबत्ती में बांस, लकड़ी का बुरादा और आर्टिफिशियल खुशबू होती है. जलने पर इनसे जो कार्बन कण निकलते हैं, वे फेफड़ों की थैलियों में जाकर जम जाते हैं.
  • बच्चों और बुजुर्गों पर असर: छोटे बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए इस धुएं से उन्हें सांस लेने में भारीपन और छेंक आने की समस्या तुरंत हो जाती है.

सफाई वाले फिनाइल और एसिड वाला क्लीनर:

  • घर को कीटाणुमुक्त करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्लोर क्लीनर, हारपिक या ब्लीच भी हवा को जहरीला बनाते हैं,
  • जब हम बंद बाथरूम में हारपिक या ब्लीच से सफाई करते हैं, तो उसकी तेज गंध से आंख में पानी आने लगता है और दम घुटने जैसा महसूस होता है.
  • इन क्लीनर्स से निकलने वाली वाष्प सांस के जरिए शरीर में जाकर गले में लंबे समय तक रहने वाली खांसी पैदा कर सकती है.

इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय:

आपको अपने घर की खुशबू या सफाई पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है. बस थोड़ा सा तरीका बदलने की जरूरत है,

  • क्रॉस वेंटिलेशन बनाए रखें
  • नेचुरल चीजें अपनाएं
  • इंडोर प्लांट्स लगाएं
  • एरोसोल स्प्रे से दूरी बनाएं

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