World Stroke Day 2026: ऑफिस का काम, भागदौड़ भरी जिंदगी, देर रात तक जागना और हर समय स्ट्रेस. 30 की उम्र में अधिकतर लोग इन्हें अपनी लाइफ का हिस्सा मान लेते हैं. अगर इस बीच आपका ब्लड प्रेशर बढ़ भी रहा हो और कोई लक्षण न दिख रहे हों, तो शायद आप उसे गंभीरता से नहीं लेंगे. लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर स्ट्रोक जैसे बड़े खतरे की वजह बन सकती है.
सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डायरेक्टर-कार्डियोलॉजी डॉ. अंशुल कुमार जैन कहते हैं कि आजकल हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ बढ़ती उम्र की बीमारी नहीं रह गई है. 30-35 साल के लोगों में भी यह तेजी से देखने को मिल रहा है और सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि ज्यादातर मामलों में लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं चलता. यहां समझते हैं इस विषय को अच्छे से-
अच्छा महसूस करने का मतलब सबकुछ ठीक नहीं होता
डॉ. जैन बताते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि ये शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है, लेकिन शुरुआती दौर में कोई साफ संकेत नहीं देता. आप रोज ऑफिस जा सकते हैं, जिम भी कर सकते हैं, दोस्तों के साथ घूम सकते हैं और आपको बिल्कुल सामान्य महसूस हो सकता है. लेकिन इसके बावजूद बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर अंदर ही अंदर आपकी रक्त वाहिकाओं और दिल पर दबाव बढ़ा रहा होता है. यही वजह है कि सिर्फ इस आधार पर कि 'मुझे तो कोई दिक्कत नहीं है', हाई बीपी को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है.
ब्रेन पर सबसे ज्यादा असर क्यों पड़ता है?
हमारा दिमाग लगातार ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से भरपूर खून पर निर्भर करता है. जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो दिमाग तक खून पहुंचाने वाली छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएं कमजोर होने लगती हैं. धीरे-धीरे धमनियों में ब्लॉकेज बनने का खतरा बढ़ सकता है और स्ट्रोक का रिस्क भी बढ़ जाता है. कई बार ब्लड वेसेल्स फटने की आशंका भी पैदा हो जाती है. इसी वजह से डॉक्टर हाई बीपी को स्ट्रोक के सबसे बड़े और कंट्रोल किए जा सकने वाले जोखिम कारकों में से एक मानते हैं.
30 की उम्र में हाई बीपी क्यों बढ़ रहा है?
डॉ. अंशुल जैन कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में युवाओं की लाइफस्टाइल में बड़े बदलाव आए हैं. घंटों लैपटॉप के सामने बैठना, शारीरिक गतिविधि कम होना, फास्ट फूड ज्यादा खाना और नींद पूरी न होना आम बात बन चुकी है. ये सभी कारक ब्लड प्रेशर बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा कुछ अन्य कारक हैं, जैसे-
- ज्यादा नमक का सेवन
- लगातार तनाव
- धूम्रपान
- शराब का अधिक सेवन
- मोटापा
- डायबिटीज
- किडनी संबंधी समस्याएं
- परिवार में हाई बीपी का इतिहास, इत्यादि.
स्ट्रेस को वजह मानकर न करें इग्रोन
अक्सर लोग कहते हैं कि ऑफिस का तनाव है, इसलिए बीपी बढ़ा हुआ है. डॉक्टर का इस विषय पर कहना है कि स्ट्रेस कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है, लेकिन अगर रीडिंग बार-बार ज्यादा आ रही है, तो सिर्फ तनाव को जिम्मेदार मान लेना सही नहीं है. ऐसे में जांच कराना जरूरी है, ताकि पता चल सके कि मामला सामान्य है या वास्तव में हाई ब्लड प्रेशर की शुरुआत हो चुकी है.
स्ट्रोक के खतरे को कैसे कम करें?
अच्छी बात ये है कि समय रहते सावधानी बरती जाए, तो हाई ब्लड प्रेशर को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. इसे कम करने के लिए आप कुछ बातों पर ध्यान रख सकते हैं, जैसें-
- समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराएं
- खाने में नमक कम करें
- रोज कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें
- फल और सब्जियां अधिक खाएं
- वजन को नियंत्रित रखें
- धूम्रपान से दूर रहें
- शराब सीमित मात्रा में लें
- 7-8 घंटे की नींद पूरी करें
- तनाव कम करने की कोशिश करें
अगर सिर्फ लाइफस्टाइल में बदलाव पर्याप्त न हों, तो डॉक्टर की सलाह पर दवाओं की जरूरत पड़ सकती है.
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