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सुबह उठते ही शरीर का एक हिस्सा काम करना बंद कर दे तो? जानें क्या है Wake-Up Stroke 

Wake-Up Stroke : क्या सुबह उठने के बाद आपके शरीर का एक हिस्सा काम नहीं कर रहा है? अगर हां, तो ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें. ये लक्षण Wake-Up Stroke के हो सकते हैं. यहां जानते हैं इस विषय को अच्छे से-

सुबह उठते ही शरीर का एक हिस्सा काम करना बंद कर दे तो? जानें क्या है Wake-Up Stroke 
Wake-Up Stroke : वेक-अप स्ट्रोक क्या है?

World Stroke day 2026: रात को व्यक्ति बिल्कुल सामान्य स्थिति में सोता है, लेकिन सुबह उठते ही महसूस करता है कि उसका एक हाथ नहीं उठ रहा, चेहरा टेढ़ा हो गया है या बोलने में परेशानी हो रही है. ऐसी स्थिति किसी के लिए भी डराने वाली हो सकती है. जब किसी व्यक्ति को नींद से जागने के बाद स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देते हैं, तो इसे मेडिकल भाषा में वेक-अप स्ट्रोक (Wake-Up Stroke) कहा जाता है.

जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी डॉ. वैभव माथुर का कहना है कि आमतौर पर स्ट्रोक के इलाज में ये जानना बहुत ही जरूरी होता है कि लक्षण कब शुरू हुए थे. लेकिन वेक-अप स्ट्रोक में यही सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है, क्योंकि व्यक्ति सो रहा होता है और स्ट्रोक की शुरुआत का सटीक समय पता नहीं चल पाता.

क्या सोते समय भी स्ट्रोक आ सकता है?

डॉक्टर कहते हैं कि जी हां, जी हां. स्ट्रोक किसी भी समय हो सकता है. ये दिमाग की किसी ब्लड वेसेल्स में रुकावट या ब्लीडिंग के कारण हो सकता है. अगर ये घटना नींद के दौरान होती है, तो व्यक्ति को इसके लक्षण जागने के बाद ही महसूस होते हैं. ऐसे में डॉक्टर यह जानने की कोशिश करते हैं कि मरीज आखिरी बार कब बिल्कुल सामान्य स्थिति में था. इसे मेडिकल भाषा में 'Last Known Well' कहा जाता है.

क्या सुबह पता चलने पर इलाज का समय निकल जाता है?

डॉ. माथुर कहते हैं कि ऐसा जरूरी नहीं है. इस्केमिक स्ट्रोक यानी खून का थक्का जमने से होने वाले स्ट्रोक के कुछ मरीजों में थक्का घोलने वाली दवा (Thrombolysis) दी जा सकती है. सामान्य परिस्थितियों में पात्र मरीजों के लिए इसका मानक उपचार समय 4.5 घंटे तक होता है.

हालांकि, आधुनिक MRI और CT आधारित विशेष इमेजिंग की मदद से कुछ ऐसे मरीजों की भी पहचान संभव है, जिनमें स्ट्रोक शुरू होने का सटीक समय मालूम नहीं है. इन जांचों से डॉक्टर यह आकलन कर सकते हैं कि दिमाग का कितना हिस्सा प्रभावित हो चुका है और कितना हिस्सा अभी बचाया जा सकता है.

अगर मरीज इलाज की सामान्य समय-सीमा निकल जाने के बाद भी हॉस्पिटल पहुंचता है, तो कुछ चुनिंदा मामलों में स्कैन रिपोर्ट के आधार पर थक्का घोलने वाली दवा दी जा सकती है. इसके अलावा बड़े ब्लड वेसेल्स में ब्लॉकेज होने पर मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी के जरिए थक्का निकालने का विकल्प भी होता है. सही मरीजों में यह प्रक्रिया 24 घंटे तक असरदार साबित हो सकती है. हालांकि, ये सुविधा हर मरीज के लिए नहीं होती और अंतिम फैसला डॉक्टर मरीज की स्थिति और जांच रिपोर्ट को देखकर लेते हैं.

सुबह ऐसे लक्षण दिखें तो क्या करें?

अगर जागने के बाद अचानक शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, बोलने में परेशानी, चेहरे का टेढ़ापन या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें. डॉक्टर को यह जरूर बताएं कि मरीज सोने से पहले आखिरी बार कब सामान्य स्थिति में था. बिना डॉक्टर की सलाह के एस्पिरिन या कोई अन्य दवा न दें, क्योंकि जांच से पहले स्ट्रोक के प्रकार का पता लगाना संभव नहीं होता.

सबसे जरूरी बात ये है कि सुबह उठने पर स्ट्रोक के लक्षण दिखने का मतलब ये नहीं है कि इलाज का समय निकल चुका है. समय पर हॉस्पिटल पहुंचना मरीज के लिए उपचार की संभावनाएं बढ़ा सकता है.

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