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सर्जरी के लिए 13 साल तक AIIMS के चक्कर काटती रही बच्ची की मौत, पिता के आरोपों के बाद जांच के लिए बनी कमेटी

कोटा की 15 साल की तन्वी की AIIMS दिल्ली में मौत हो गई. वह जन्म से ही दिल की बीमारी से जूझ रही थी. पिता ने सर्जरी में देरी का आरोप लगाया है.

सर्जरी के लिए 13 साल तक AIIMS के चक्कर काटती रही बच्ची की मौत, पिता के आरोपों के बाद जांच के लिए बनी कमेटी
मृतक बच्ची को जन्म से ही दिल की बीमारी थी. (File Photo)
  • 13 साल से AIIMS के चक्कर लगा रही तन्वी की अचानक मौत हो गई.
  • पिता का आरोप है कि तारीख देकर सर्जरी टाली गई. AIIMS बोला- एनाटॉमी कॉम्प्लेक्स थी.
  • 15 साल की तन्वी 24 अगस्त को हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट के लिए भर्ती हुई थी.
नई दिल्ली:

राजस्थान के कोटा की रहने वाली 15 साल की एक लड़की तन्वी की मंगलवार सुबह AIIMS दिल्ली में मौत हो गई. उसको जन्म से ही दिल की एक गंभीर बीमारी थी. इलाज के लिए दो साल की उम्र से AIIMS आ रही थी. उसका परिवार हार्ट सर्जरी के लिए लंबे वक्त वसे इंतजार कर रहा था. तन्वी को करीब दो हफ्ते पहले AIIMS में भर्ती कराया गया था.  लड़की 13 साल से ज्यादा वक्त से AIIMS के चक्कर लगा रही थी. उसके पिता ने आरोप लगाया कि सर्जरी की तारीखें तय की गईं और बाद में बदल दी गईं, लेकिन सर्जरी कभी नहीं हुई. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉक्टरों से बातचीत के बाद तन्वी को भर्ती किया गया था और ट्रांसप्लांट की संभावना के लिए उसकी जांच की जा रही थी. डॉक्टरों ने कई दस्तावेज और जांचें मांगीं, जिनमें दिल की जांच भी शामिल थी.

दिल्ली AIIMS ने क्या कहा?

तन्वी की मौत के मामले में CTVS विभाग के प्रमुख डॉ. वी. देवगौरू ने अपनी रिपोर्ट एक पत्र के जरिए चीफ, AIIMS के सीटी सेंटर को सौंपी है. इसमें कहा गया है कि मरीज तन्वी की 10 अक्टूबर 2012 को कार्डियोलॉजी OPD में दिल की बीमारी के लिए जांच की गई. जांच में पता चला कि उसे VSD के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया (जिसमें फेफड़ों तक खून पहुंचाने वाली पल्मोनरी आर्टरीज नहीं होतीं) है. उसे सर्जरी से ठीक करने की संभावना के लिए कार्डियक सर्जरी विभाग में भेजा गया.

जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि 2013 में डॉ. सचिन ने सर्जरी की संभावना के लिए मरीज की जांच की. जांच के बाद 2018 में यह तय किया गया कि सर्जरी मुमकिन नहीं है और बच्ची का इलाज दवाओं से करने का फैसला किया गया. मरीज को इस बारे में बताया गया और उसे मेडिकल फॉलो-अप पर रखा गया.

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"पिछले साल बच्ची के माता-पिता ने डॉ. देवगौरू से दूसरी राय ली, जिन्होंने भी सिर्फ दवाओं से इलाज का सुझाव दिया. बाद में डॉ. ए. के. बिसोई ने भी दवाओं से इलाज की सलाह दी. पिछले हफ्ते बच्ची के पिता फिर आए क्योंकि बच्ची बीमार हो गई थी."

सीटी सेंटर को भेजे गए पत्र में कहा गया, "पिछले हफ्ते दिल और फेफड़े के ट्रांसप्लांट की संभावना के लिए बच्ची को 24 अगस्त 2026 को भर्ती किया गया. दिल और फेफड़े के ट्रांसप्लांट की संभावना के लिए उसकी जांच की गई. जांच-पड़ताल के हिस्से के तौर पर उसकी एंडोस्कोपी की गई."

इसमें आगे कहा गया है कि 1 सितंबर की सुबह तड़के 2:50 बजे बच्ची ने थकान और कमजोरी की शिकायत की. बच्ची का शरीर नीला पड़ गया और उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन 48% हो गया. सुबह 3:30 बजे उसे ऑक्सीजन दी जाने लगी. उसे हाइपोक्सिक स्पेल (ऑक्सीजन की कमी का दौरा) पड़ा, जिससे कार्डियक अरेस्ट हो गया. तमाम कोशिशों के बावजूद बच्ची को बचाया नहीं जा सका. सुबह 5:06 बजे हाइपोक्सिक स्पेल के कारण बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया.

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​​​​​​मामले की जांच करेगी एम्स की टीम 

मीडिया में आई खबरों और परिवार की तरफ से उठाई गई चिंताओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है कि तान्वी से जुड़े इस मामले की जांच की एम्स की एक टीम करेगी. AIIMS के निदेशक ने इसके लिए एक कमेटी बनाई है, जो पूरे मामले की जांच करेगी. कमेटी सभी घटनाओं का क्रम देखेगी और तथ्यों को सामने लाने की कोशिश करेगी. इसमें मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, दिए गए इलाज, अलग-अलग विशेषज्ञों की राय और तन्वी की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की समीक्षा की जाएगी.

AIIMS ने कहा है कि परिवार की चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है. कमेटी की रिपोर्ट और ऑटोप्सी के रिजल्ट आने के बाद ही मौत की परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा.

2013 में कई जांचें हुईं

डॉक्टरों ने बीमारी और दिल की बनावट को समझने के लिए CT Angiography, Conventional Angiography और Cardiac Catheterisation जैसी जांचें की थी. इनका मकसद यह पता लगाना था कि ऑपरेशन से बीमारी ठीक की जा सकती है या नहीं. जांच के बाद इलाज करने वाली टीम ने 2017 में निष्कर्ष निकाला कि तन्वी की दिल की बनावट और बीमारी की जटिलता की वजह से सर्जरी से सुधार संभव नहीं था. इसलिए उन्हें दवाओं/मेडिकल मैनेजमेंट और नियमित फॉलोअप की सलाह दी गई. परिवार को स्थिति और संभावित भविष्य के बारे में भी बताया गया. परिवार AIIMS के संपर्क में बना रहा और ऑपरेशन की संभावना को लेकर दूसरी जगहों से भी राय ली.

पिछले साल AIIMS के CTVS विभाग के प्रमुख से भी राय ली गई थी, जिन्होंने भी मेडिकल मैनेजमेंट की सलाह दी. इसके बाद एक अन्य सीनियर कार्डियोथोरेसिक सर्जन से राय ली गई, उन्होंने भी मेडिकल मैनेजमेंट जारी रखने की सलाह दी. तन्वी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अगस्त 2026 में दोबारा AIIMS लाया गया. उन्हें 24 अगस्त को भर्ती किया गया.

डॉक्टरों ने उनकी स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया और बीमारी की गंभीर स्थिति को देखते हुए हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना पर भी विचार किया. 1 सितंबर को करीब रात 2:50 बजे तन्वी को अचानक थकान और कमजोरी महसूस हुई. इसके बाद उन्हें गंभीर सायनोसिस हुआ और उनका ऑक्सीजन स्तर लगभग 48% तक गिर गया. करीब सुबह 3:30 बजे ऑक्सीजन सपोर्ट शुरू किया गया. इसके बाद तन्वी को हाइपॉक्सिक स्पेल आया और कार्डियक अरेस्ट आ गया. 

डॉक्टरों की टीम ने तुरंत और लगातार उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. AIIMS के मुताबिक, तन्वी को 1 सितंबर 2026 को सुबह 5:06 बजे मृत घोषित किया गया.

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