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40-50 की उम्र में भी क्‍यों बढ़ रहा हार्ट फेल्योर का खतरा, डॉक्टर ने बताए शुरुआती संकेत

हार्ट फेल्योर के मामले अब कम उम्र के लोगों में भी बढ़ रहे हैं. जानिए इसके प्रमुख कारण, शुरुआती लक्षण और दिल को स्वस्थ रखने के जरूरी उपाय.

40-50 की उम्र में भी क्‍यों बढ़ रहा हार्ट फेल्योर का खतरा, डॉक्टर ने बताए शुरुआती संकेत
65 साल से कम उम्र में क्यों बढ़ रहा है हार्ट फेल्योर का खतरा? जानिए लक्षण, कारण और बचाव
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हार्ट फेल्योर को अक्सर बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन अब 65 साल से कम उम्र के वयस्कों में भी इसके मामले चिंता का विषय बन रहे हैं. आए द‍िन युवाओं में होते हार्ट फेल्‍योर के मामले देखने को म‍िलते हैं, तो आख‍िर ऐसा क्‍या हो रहा है क‍ि ज‍िस उम्र को हम जवां द‍िल कहते हैं, उसी उम्र में युवाओं के हार्ट फेल हो रहे हैं. कितने ही ऐसे मामले देखने को म‍िल रहे हैं ज‍िनमें ज‍िम जाने वाले, हेल्‍दी द‍िखने वाले युवाओं के द‍िल बंद हो रहे हैं. इन बातों का जवाब तलाशते हैं. 

हार्ट फेल्योर क्या है और यह कैसे होता है?

हार्ट फेल्योर का मतलब यह नहीं है कि दिल ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया है, बल्कि ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय शरीर की जरूरतों के अनुसार पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता. इसके कारण सांस फूलना, असामान्य थकान, पैरों में सूजन और शारीरिक गतिविधियों के दौरान कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.

65 साल से कम उम्र के लोगों में हार्ट फेल्योर क्यों बढ़ रहा है?

इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी हृदय पर लगातार दबाव डालते हैं. 

इसके अलावा, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हार्ट अटैक के कारण हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं. कुछ मामलों में वायरल संक्रमण के बाद हृदय की मांसपेशियों में सूजन, आनुवंशिक कारण, अत्यधिक शराब का सेवन और कुछ नशीले पदार्थ भी हार्ट फेल्योर का जोखिम बढ़ा सकते हैं. अनियंत्रित तनाव और खराब नींद भी अप्रत्यक्ष रूप से हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं.

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हार्ट फेल्योर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

सबसे बड़ी चिंता यह है कि कम उम्र के लोग अक्सर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं. सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, सामान्य कामों में जल्दी थक जाना, लेटने पर सांस लेने में परेशानी या पैरों और टखनों में सूजन को केवल कमजोरी या थकान समझना खतरनाक हो सकता है. ऐसे लक्षण लगातार बने रहें या बढ़ें, तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए.

किन लोगों में हार्ट फेल्योर का खतरा सबसे अधिक होता है?

बचाव के लिए ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है. संतुलित आहार लें, नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें, नियमित व्यायाम करें, धूम्रपान से बचें और पर्याप्त नींद लें. मोटापा होने पर वजन को धीरे-धीरे स्वस्थ स्तर पर लाने का प्रयास करें. जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार जारी रखना चाहिए.

हार्ट फेल्योर से बचाव के लिए क्या करें?

हार्ट फेल्योर के बढ़ते जोखिम को देखते हुए जागरूकता और समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण है. कम उम्र को हृदय रोगों से सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता.स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और जोखिम कारकों को समय रहते नियंत्रित करने से हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है.

एक्‍सपर्ट के बारे में : डॉ. विवेक टंडन शार्दाकेयर हेल्थसिटी में डायरेक्टर एवं हेड, कार्डियोलॉजी हैं. उन्हें हृदय रोगों की रोकथाम, निदान और उपचार के साथ हार्ट फेल्योर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में व्यापक अनुभव है.

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