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रोज 2 मिनट की यह आदत स्ट्रोक के खतरे से जुड़ी हो सकती है, डॉक्टर ने बताया कारण

क्या नियमित फ्लॉसिंग से स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है? जानिए ओरल हेल्थ, मसूड़ों की बीमारी और स्ट्रोक के बीच संभावित संबंध पर विशेषज्ञ की राय.

Medically Reviewed By: Dr Arvind Dambalkar
रोज 2 मिनट की यह आदत स्ट्रोक के खतरे से जुड़ी हो सकती है, डॉक्टर ने बताया कारण
फ्लॉसिंग करने वाले लोगों में स्ट्रोक का खतरा कम? रिसर्च और डॉक्टर की राय जानें
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दांतों की सफाई को अक्सर केवल मुस्कान और मसूड़ों की सेहत से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ओरल हेल्थ का संबंध शरीर के समग्र स्वास्थ्य से भी हो सकता है. दांतों के बीच जमा प्लाक, बैक्टीरिया और भोजन के कण मसूड़ों में सूजन और पेरियोडोंटल बीमारी का कारण बन सकते हैं. ऐसे में नियमित फ्लॉसिंग न केवल दांतों के बीच सफाई बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि ओरल हाइजीन का हृदय और मस्तिष्क की सेहत से क्या संबंध हो सकता है.

कुछ अध्ययनों में नियमित फ्लॉसिंग और इस्केमिक स्ट्रोक के कम जोखिम के बीच संभावित संबंध देखा गया है. हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि फ्लॉस करने से स्ट्रोक को निश्चित रूप से रोका जा सकता है. इस संबंध को बेहतर तरीके से समझने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है.

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मसूड़ों की सेहत और स्ट्रोक के बीच क्या संबंध है?

डॉ. अरविंद दांबलकर के अनुसार, ओरल हेल्थ और हृदय संबंधी बीमारियों के बीच संभावित संबंध को समझना महत्वपूर्ण है. मसूड़ों की बीमारी में लगातार सूजन बनी रह सकती है. कुछ मामलों में इससे जुड़ा बैक्टीरियल संक्रमण और शरीर की सूजन संबंधी प्रतिक्रिया रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है. हालांकि, मसूड़ों की बीमारी और स्ट्रोक के बीच संबंध होने का मतलब यह नहीं है कि एक स्थिति सीधे दूसरी का कारण बनती है.

स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से तक रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क में रक्तस्राव होने लगता है. इस्केमिक स्ट्रोक में रक्त का थक्का या रक्त वाहिका में रुकावट मस्तिष्क तक रक्त और ऑक्सीजन पहुंचने से रोक सकती है. हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और कुछ हृदय संबंधी स्थितियां इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं.

फ्लॉसिंग को दिनचर्या में कैसे शामिल करें?

टूथब्रश दांतों की बाहरी, भीतरी और चबाने वाली सतहों को साफ करने में मदद करता है, लेकिन दांतों के बीच की तंग जगहों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है. फ्लॉस इन जगहों से प्लाक और फंसे हुए भोजन के कणों को हटाने में मदद करता है. इससे मसूड़ों की सूजन और मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं का जोखिम कम करने में सहायता मिल सकती है.

फ्लॉस का इस्तेमाल धीरे-धीरे और सावधानी से करना चाहिए, ताकि मसूड़ों को चोट न पहुंचे. इसे दांतों के बीच हल्के से ले जाकर प्रत्येक दांत की सतह के साथ साफ करना चाहिए. रोजाना फ्लॉसिंग के साथ दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करना और नियमित रूप से दंत चिकित्सक से जांच कराना भी जरूरी है.

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स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?

ओरल हाइजीन को बेहतर रखना स्वस्थ जीवनशैली का एक हिस्सा है, लेकिन स्ट्रोक से बचाव के लिए केवल फ्लॉसिंग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना और धूम्रपान से बचना अधिक व्यापक रोकथाम रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं.

चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी, देखने में दिक्कत या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए. स्ट्रोक के मामले में समय पर इलाज मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

इसलिए नियमित फ्लॉसिंग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना ओरल हेल्थ के लिए उपयोगी है. हालांकि, इसे स्ट्रोक से बचाव का प्रमाणित स्वतंत्र उपाय मानने के बजाय समग्र स्वास्थ्य की देखभाल का एक हिस्सा समझना चाहिए.

एक्‍सपर्ट के बारे में : डॉ. अरविंद दांबलकर सर्वोदय हॉस्पिटल, सेक्टर-8, फरीदाबाद में सीनियर कंसल्टेंट एवं हेड, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी हैं. उन्हें हृदय रोगों के निदान और उपचार, एंजियोप्लास्टी, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट फेल्योर और स्ट्रोक से जुड़े कार्डियोवैस्कुलर जोखिम कारकों के प्रबंधन में व्यापक अनुभव है.

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