आज के दौर में दिल की बीमारी किसी भी उम्र के इंसान को अपनी चपेट में ले रही है. पहले जहां 60 साल के बुजुर्गों को दिल का दौरा पड़ने की बातें सुनी जाती थीं, वहीं आज 30-35 साल के नौजवान भी सीने में दर्द और सांस फूलने की शिकायत लेकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं. जब किसी इंसान की जांच रिपोर्ट में ये लिखा आता है कि दिल की नसों में 70 या 80 परसेंट ब्लॉकेज है, तो पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक जाती है. दिमाग में सबसे पहला डर यही बैठता है कि अब तो सीना चीरकर बाईपास सर्जरी करानी पड़ेगी, लाखों का खर्चा होगा और पता नहीं मरीज पहले जैसा ठीक हो पाएगा या नहीं.
इसी घबराहट और डर का फायदा उठाकर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे परोसे जाते हैं. कोई कहता है कि लहसुन-अदरक का काढ़ा पी लो तो नसें मक्खन की तरह साफ हो जाएंगी, तो कोई किसी चमत्कारी चूर्ण से ब्लॉकेज पिघलाने की गारंटी देता है. लेकिन क्या वाकई बिना किसी बड़ी सर्जरी के हार्ट ब्लॉकेज को ठीक किया जा सकता है. आइए इस पूरे मामले की सच्चाई को आसान भाषा में समझते हैं.
हार्ट ब्लॉकेज आखिर होता क्या है और नसें बंद क्यों होती हैं
हमारे दिल का काम पूरे शरीर में साफ खून को पंप करना है. लेकिन खुद दिल की मांसपेशियों को ठीक से काम करने के लिए भी लगातार खून और ऑक्सीजन की जरुरत होती है. दिल को खून पहुंचाने वाली इन खास नलियों को कोरोनरी आर्टरी (Coronary Artery) कहा जाता है.
जब हमारे खून में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL), ट्राइग्लिसराइड्स और वसा की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो ये धीरे-धीरे नसों की अंदरूनी दीवारों पर चिपकने लगते हैं. समय के साथ ये जमाव कड़ा हो जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में प्लाक (Plaque) कहते हैं. जैसे-जैसे प्लाक बढ़ता है, नसों के अंदर खून बहने का रास्ता संकरा होता चला जाता है. जब खून की सप्लाई कम होने लगती है, तो दिल की मांसपेशियों तक पूरी ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. इसी रुकावट को आम बोलचाल में हार्ट ब्लॉकेज कहा जाता है.
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शरीर में ब्लॉकेज होने पर कौन से संकेत दिखाई देते हैं
शुरुआती दौर में कई बार मरीज को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती, जिसे साइलेंट ब्लॉकेज भी कहते हैं. लेकिन जैसे-जैसे नसों में रुकावट बढ़ती है, बदन कुछ साफ इशारे देने लगता है.
- तेज चलने, सीढ़ियां चढ़ने या कोई भारी सामान उठाने पर सीने के बीचों-बीच भारीपन, दबाव या जलन महसूस होना.
- थोड़ा सा पैदल चलते ही सांस फूलने लगना और ऐसा लगना जैसे फेफड़ों में हवा कम पड़ रही है.
- बिना किसी भारी काम के भी हर वक्त सुस्ती और बेतहाशा थकान बने रहना.
- सीने का दर्द धीरे-धीरे बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ की तरफ फैलना.
- बेचैनी के साथ अचानक माथे पर ठंडा पसीना आना और चक्कर आना.
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बिना सर्जरी के हार्ट ब्लॉकेज के इलाज और सोशल मीडिया के दावों की सच्चाई जानने के लिए हमने बात की शारदाकेयर - हेल्थसिटी (ShardaCare - Healthcity) के कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर और हेड डॉ. विवेक टंडन (Dr Vivek Tandon, Director and Head, Cardiology) से.
डॉ. विवेक टंडन समझाते हैं कि हार्ट ब्लॉकेज एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें दिल की मांसपेशियों तक खून पहुँचाने वाली कोरोनरी धमनियां कोलेस्ट्रॉल, वसा और अन्य तत्वों के जमाव के कारण संकरी हो जाती हैं. इससे दिल तक रक्त और ऑक्सीजन का बहाव बाधित होता है. इसके चलते मरीज को सीने में दर्द, सांस फूलने या रोजमर्रा के कामों में भारी दिक्कत आ सकती है, हालांकि कुछ मामलों में कोई बाहरी लक्षण नजर नहीं आते.
डॉ. टंडन साफ करते हैं कि हर हार्ट ब्लॉकेज के मरीज को ओपन-हार्ट या बाईपास सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती. इलाज का पूरा फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि ब्लॉकेज कितने प्रतिशत है, नस के किस हिस्से में है, मरीज को क्या तकलीफ हो रही है और उसकी कुल सेहत कैसी है. शुरुआती या स्थिर मामलों में डॉक्टर दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव के जरिए स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रख सकते हैं.
कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाइयां (जैसे स्टेटिन्स), ब्लड प्रेशर और शुगर की दवाएं दिल के दौरे के जोखिम को काफी हद तक टाल देती हैं. हालांकि, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दवाएं पहले से जमे हुए पुराने और कड़े ब्लॉकेज को पूरी तरह घोलकर खत्म नहीं कर सकतीं, बल्कि वो नए ब्लॉकेज को बनने से रोकती हैं और मौजूदा प्लाक को स्थिर करती हैं ताकि नस अचानक फटे नहीं.
एंजियोप्लास्टी: बिना सीना चीरे नस खोलने का आधुनिक तरीका
अगर किसी मरीज का ब्लॉकेज बहुत ज्यादा है या दवाओं से सीने का दर्द काबू में नहीं आ रहा, तो वहां एंजियोप्लास्टी एक बहुत कारगर विकल्प बनकर सामने आती है.
- बहुत से लोग एंजियोप्लास्टी को भी ओपन-हार्ट सर्जरी समझ लेते हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. यह एक मिनिमल इनवेसिव यानी बहुत ही कम चीर-फाड़ वाली तकनीक है.
- इसमें मरीज की कलाई (हाथ) या जांघ (पैर) की एक बारीक नस के जरिए एक बेहद पतली कैथेटर ट्यूब को दिल की बंद नस तक पहुंचाया जाता है.
- इसके बाद उस संकरे हिस्से में एक छोटा सा मेडिकल बैलून फुलाया जाता है, जिससे जमा हुआ प्लाक दीवारों की तरफ दब जाता है और खून का रास्ता खुल जाता है.
- नस दोबारा सिकुड़ न जाए, इसलिए वहां एक बारीक जालीदार स्प्रिंग यानी स्टेंट (Stent) लगा दिया जाता है.
- इस प्रक्रिया में मरीज को न तो कोई बड़ा चीरा लगता है और न ही हफ्तों अस्पताल में लेटना पड़ता है. एक-दो दिन में मरीज अपने पैरों पर चलकर घर आ जाता है. हालांकि, डॉ. टंडन के मुताबिक एंजियोप्लास्टी की जरुरत भी हर मरीज को नहीं होती, इसका फैसला एंजियोग्राफी की जांच रिपोर्ट देखकर ही डॉक्टर करते हैं.
घरेलू काढ़े और चमत्कारी ड्रिंक्स का सच
आजकल इंटरनेट पर यह बात बहुत फैलाई जाती है कि अदरक, लहसुन, नींबू का रस और सेब का सिरका उबालकर पीने से दिल की सारी बंद नसें अपने आप खुल जाती हैं.
डॉ. विवेक टंडन इस बारे में सख्त चेतावनी देते हैं कि किसी भी घरेलू नुस्खे, डिटॉक्स ड्रिंक या किसी सप्लीमेंट से हार्ट की बंद नसें खुलने का कोई भी वैज्ञानिक या मेडिकल प्रमाण मौजूद नहीं है.
लहसुन या अदरक का पानी पीने से खून थोड़ा पतला जरूर हो सकता है या पाचन सुधर सकता है, लेकिन यह सोचना कि यह नसों के अंदर 80 परसेंट जमे हुए कड़े प्लाक को धोकर बहा देगा, केवल एक भ्रम है.
इस तरह के नुस्खों के चक्कर में पड़कर कभी भी डॉक्टर द्वारा लिखी गई खून पतला करने वाली या कोलेस्ट्रॉल की दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए. दवाएं अचानक बंद करने से नस में तुरंत बड़ा क्लॉट बन सकता है, जिससे सीधे मैसिव हार्ट अटैक आने का खतरा पैदा हो जाता है.
जीवनशैली में वो 5 बदलाव जो दिल को रखेंगे महफूज
अगर आपका ब्लॉकेज शुरुआती दौर में है या आप भविष्य में इस बीमारी से बचना चाहते हैं, तो अपनी रोज की आदतों में कुछ जरूरी सुधार करने होंगे.
1. थाली से चिकनाई कम करें: खाने में रिफाइंड तेल, डालडा, मक्खन और तली-भुनी चीजों का इस्तेमाल बिल्कुल कम कर दें. इसकी जगह हरी सब्जियां, ताजे मौसमी फल, साबुत अनाज, जई (ओट्स) और अलसी के बीज शामिल करें.
2. रोजाना 30 मिनट की वॉक: अगर डॉक्टर ने मना न किया हो, तो रोजाना कम से कम आधे घंटे तेज कदमों से टहलें. इससे दिल की नसें लचीली बनी रहती हैं और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है.
3. तंबाकू और सिगरेट से तौबा: धूम्रपान दिल की नसों की अंदरूनी दीवारों को सीधे जख्मी करता है, जिससे वहां बहुत तेजी से क्लॉट जमने लगता है. बीड़ी, सिगरेट या गुटखा तुरंत छोड़ देना चाहिए.
4. ब्लड प्रेशर और शुगर पर सख्त पहरा: डायबिटीज और हाई बीपी दिल के सबसे बड़े दुश्मन हैं. अपनी दवाओं को बिना नागा खाएं और समय-समय पर इनकी जांच कराते रहें.
5. तनाव कम करें और नींद पूरी लें: लगातार चिंता में रहने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं, जो नसों को सिकोड़ते हैं. रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें और मन को शांत रखने के लिए ध्यान या योग का सहारा लें.
आपातकालीन स्थिति में बिल्कुल देर न करें
हार्ट की बीमारी में सबसे कीमती चीज समय होता है. अगर किसी व्यक्ति को अचानक सीने के बीच में असहनीय दर्द, भारी दबाव, सांस लेने में तेज तकलीफ, ठंडा पसीना या यह दर्द बाएं हाथ और जबड़े तक जाता हुआ महसूस हो, तो इसे गैस का दर्द समझकर घर पर घरेलू उपाय आजमाने की भूल कतई न करें. यह हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है. ऐसी हालत में बिना एक मिनट गंवाए मरीज को नजदीकी ऐसे अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाएं जहां कार्डियोलॉजी और आईसीयू की सुविधा मौजूद हो. समय पर सही डॉक्टर की सलाह और उचित इलाज ही किसी इंसान की जिंदगी को सुरक्षित रख सकता है.
एक्सपर्ट के बारे में : डॉ. विवेक टंडन शार्दाकेयर हेल्थसिटी में डायरेक्टर एवं हेड, कार्डियोलॉजी हैं. उन्हें हृदय रोगों की रोकथाम, निदान और उपचार के साथ हार्ट फेल्योर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में व्यापक अनुभव है.
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