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सुबह या शाम, कब चेक करें Blood Pressure? घर पर BP नापने का सही समय

घर पर डिजिटल मशीन से BP चेक करना आसान है, लेकिन सही रीडिंग के लिए समय और तरीका दोनों मायने रखते हैं. जानिए BP कब चेक करना चाहिए और इसे नापते समय किन गलतियों से बचना जरूरी है.

सुबह या शाम, कब चेक करें Blood Pressure? घर पर BP नापने का सही समय
Blood Pressure Check Karne Ka Sahi Niyam: घर पर बीपी नापने का सही वक्त और तरीका क्या है? जानें पूरी बात
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  • Maintaining healthy blood pressure prevents heart disease, stroke, and kidney damage
  • Blood pressure should be checked twice daily, morning and evening, before meals or meds
  • Measure after sitting quietly for five minutes with a properly fitting arm cuff

आज के दौर में शायद ही कोई ऐसा परिवार बचा होगा जहां किसी न किसी को बीपी की शिकायत न हो. हमारे आपके घरों में अकसर देखने को मिलता है कि सीने में जरा सी भारीपन लगी या सिर चकराया, नहीं कि अलमारी से तुरंत डिजिटल मशीन निकल आती है. फिर फटाफट कफ लपेटा और बटन दबा दिया. स्क्रीन पर नंबर देखते ही घर भर में बेचैनी फैल जाती है कि अरे, बीपी इतना बढ़ गया.

मगर क्या आपने कभी सोचा है कि जिस वक्त आप बीपी नाप रहे हैं, क्या वो वक्त वाकई सही है?

हकीकत तो यह है कि आधी से ज्यादा बार मशीन गलत नहीं होती, हमारा नापने का ढंग और समय गलत होता है. हाई ब्लड प्रेशर को लोग साइलेंट किलर यूं ही नहीं कहते. अंदर ही अंदर ये नसों पर जोर डालता रहता है और जब तक बात पकड़ में आती है, तब तक दिल या गुर्दे पर असर दिखने लगता है. ऐसे में अगर घर पर बीपी की सही निगरानी हो, तो इंसान बेवजह की दवाइयों और फालतू के खौफ से बच सकता है.

24 घंटे में बार बार बदलता है नसों का दबाव

बहुत से लोग सोचते हैं कि उनका बीपी हर वक्त बिल्कुल एक सा रहना चाहिए. ऐसा सोचना एकदम गलत है. हमारे जिस्म का अपना एक सिस्टम है जिसे अंदरूनी घड़ी या सर्केडियन रीदम कहते हैं. इसी के हिसाब से हमारा प्रेशर पूरे दिन घटता बढ़ता रहता है.

जब हम सोकर उठते हैं, शरीर काम पर लगने की तैयारी करता है, तो सुबह के वक्त प्रेशर अपने आप थोड़ा चढ़ता है.
दिन के समय जब दफ्तर की चिकचिक, ट्रैफिक या घर की भागदौड़ होती है, तो दिमाग के साथ साथ नसें भी तनाव में रहती हैं, जिससे रीडिंग ऊपर दिखती है.
शाम ढलने पर या रात को जब हम बिस्तर पर पसरते हैं, तो यही दबाव धीरे धीरे खुद नीचे आ जाता है.

इसलिए अगर किसी ने एक बार मशीन लगाई और नंबर 140 पहुंच गया, तो इसका ये मतलब कतई नहीं है कि उसे फौरन अस्पताल भागना है. जब तक लगातार कई दिनों तक तय नियम से रीडिंग न ली जाए, तब तक कोई नतीजा नहीं निकाला जा सकता.

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मशीन लगाने का सबसे सही समय कौन सा है?

अगर आप चाहते हैं कि डॉक्टर आपकी रीडिंग देखकर सही फैसला ले सकें, तो आपको एक बंधा हुआ नियम पकड़ना पड़ेगा. मनमर्जी से कभी भी पट्टा बांध लेना कोई समझदारी नहीं है. सबसे मुफीद तरीका यही माना गया है कि दिन में सिर्फ दो बार जांच की जाए.

पहला: सुबह के समय

बिस्तर छोड़ने के करीब पंद्रह बीस मिनट बाद बैठें. इस दौरान न तो चाय की चुस्की लेनी है, न सिगरेट या कॉफी छूनी है और न ही सुबह की कसरत में जुटना है. अगर आप बीपी की कोई गोली खाते हैं, तो वो गोली खाने से पहले ही हाथ में मशीन बांधें. खाली पेट शांत होकर ली गई रीडिंग सबसे खरी होती है.

दूसरा: शाम या रात को

रात का खाना खाने से आधा घंटा पहले बैठ जाएं. अगर खाने से पहले मौका न मिले, तो सोने से कुछ देर पहले जब आप टीवी, मोबाइल वगैरह छोड़कर एकदम रिलैक्स हो चुके हों, तब जांचें. सीढ़ियां चढ़कर या बाहर से पैदल चलकर आते ही तुरंत मशीन कभी चालू न करें. पहले पंखे के नीचे दस मिनट सुस्ता लें.

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डॉक्टर की सलाह 

गुरुग्राम के मेदांता - द मेडिसिटी के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्डियक सर्जन डॉ. नरेश त्रेहान का कहना है कि - 

"मेरे पास ओपीडी में हफ्ते में दस मरीज ऐसे आते हैं जो घबराहट में खुद ही अपनी दवा की डोज बढ़ा लेते हैं. पूछने पर पता चलता है कि दफ्तर से लौटते ही या किसी बात पर कहासुनी होते ही उन्होंने बीपी नाप लिया था. ऐसे मौके पर तो किसी भी सेहतमंद आदमी का प्रेशर ऊपर चला जाएगा. घर पर डिजिटल कफ से नापते वक्त कम से कम पांच मिनट चुपचाप बैठना बेहद जरूरी है. रीढ़ सीधी रखें, दोनों पैर फर्श पर टिके हों और कफ दिल की ऊंचाई पर बंधा होना चाहिए. अगर घर में किसी को पहले से दिल या गुर्दे का रोग रहा है, तो उन्हें हफ्ते में तीन दिन एक डायरी बनाकर सुबह शाम की रीडिंग कलम से दर्ज करनी चाहिए."

घर पर BP नापते समय ये 5 गलतियां न करें

मशीन चाहे कितनी भी महंगी ले आएं, अगर तरीके में खोट है तो रीडिंग का कोई भरोसा नहीं. इसलिए अगली बार जब भी बैठें, इन बातों को गांठ बांध लें:

मशीन का चुनाव: कलाई या उंगली में फंसाने वाले गैजेट्स के चक्कर में न पड़ें. बांह पर चढ़ने वाला यानी आर्म कफ ही सबसे भरोसेमंद माना जाता है.
कपड़ों की परत हटाएं: कई लोग स्वेटर या मोटी कमीज के ऊपर ही कफ चढ़ा देते हैं. ये बहुत बड़ी गलती है. कपड़ा बिल्कुल पतला हो या फिर बांह एकदम नंगी होनी चाहिए ताकि सेंसर नब्ज को ठीक से पकड़ सके.
बैठने का सलीका: सोफे पर औंधे मुंह या पैर लटकाकर न बैठें. सख्त कुर्सी पर बैठें जहां पीठ को सहारा मिले. पैर क्रास करके बैठने से भी खून की चाल पर असर पड़ता है और नंबर बढ़कर आता है.
बिल्कुल खामोशी: जब मशीन फूल रही हो, उस वक्त न तो घर के किसी सदस्य से बात करें और न ही फोन का जवाब दें. यहां तक कि गहरी सांसें लेना भी रीडिंग को हिला सकता है.
रिकार्ड संभालकर रखें: हर जांच के बाद फोन के नोटपैड में या कागज पर तारीख, वक्त और नंबर दर्ज करते चलें. जब भी अपने फैमिली डॉक्टर के पास जाएं, वो पर्चा सामने रख दें. डॉक्टर को आपकी पूरी हिस्ट्री एक नजर में समझ आ जाएगी.

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जेनेटिक्स का पंगा है तो आंखें मूंदकर न बैठें

अगर आपके खानदान में यानी वालिद, वालिदा या दादा दादी को दिल का दौरा पड़ा हो या कम उम्र में बीपी की बीमारी रही हो, तो आपको ज्यादा चौकन्ना रहना पड़ेगा. ये परेशानी अक्सर खून के रिश्तों में चुपके से सफर करती है. ऐसे लोगों को तीस की उम्र पार करते ही हर महीने पंद्रह दिन में एक बार अपना चेकअप जरूर कर लेना चाहिए.

सीधी सी बात है कि बीपी कोई ऐसा हौव्वा नहीं है जिससे डरकर जिंदगी रोक दी जाए. बस थोड़ा सा खानपान सुधारें, थाली में ऊपर से कच्चा नमक बुरकना बंद करें, दिन में आधा घंटा पसीना बहाएं और सही तरीके से नाप जोख करते रहें. जब आप अपने जिस्म का ख्याल रखेंगे, तो दिल भी बिना किसी रुकावट के पूरी उम्र धड़कता रहेगा.

यह लेख गुरुग्राम के मेदांता - द मेडिसिटी के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्डियक सर्जन डॉ. नरेश त्रेहान से की गई बातचीत पर आधार‍ित है.

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