डायबिटीज (Diabetes) आज के समय की एक आम समस्या में से एक है. आपको बता दें कि डायबिटीज की जांच के लिए HbA1c टेस्ट को सबसे भरोसेमंद माना जाता है. डॉक्टर इसी टेस्ट की रिपोर्ट देखकर तय करते हैं कि आपको शुगर है या नहीं, या आपकी दवाएं कितनी असरदार हैं. लेकिन हाल ही में आई एक बड़ी मेडिकल रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है. पॉपुलर मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' (Lancet) में छपे एक लेख के मुताबिक, भारत और दक्षिण एशिया के लोगों के लिए सिर्फ HbA1c टेस्ट पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में एनीमिया (खून की कमी) और खून से जुड़ी दूसरी बीमारियों की वजह से यह टेस्ट अक्सर गलत नतीजे दे सकता है.
क्यों फेल हो सकता है यह टेस्ट? (Why might this test fail)
डायबिटीज एक्सपर्ट ने इस रिसर्च में बताया है कि हमारी सेहत से जुड़े कुछ खास फैक्टर्स इस टेस्ट की रिपोर्ट को बिगाड़ सकते हैं. असल में, HbA1c टेस्ट यह मापता है कि पिछले 3 महीनों में आपके हीमोग्लोबिन पर कितनी शुगर जमा हुई है. अब समस्या यह है कि अगर किसी व्यक्ति के हीमोग्लोबिन की बनावट या उसकी उम्र (Lifespan) में कोई गड़बड़ है, तो रिपोर्ट अपने आप गलत आएगी.
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भारत में क्यों गलत आती है रिपोर्ट- (Why is the report wrong in India)
1. एनीमिया- भारत में बड़ी संख्या में लोग, खासकर महिलाएं, आयरन की कमी या एनीमिया से जूझ रही हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, अगर किसी को एनीमिया है, तो उसका HbA1c लेवल फैक्ट से अलग दिख सकता है. हैरान करने वाली बात यह है कि एनीमिया ठीक होने पर अक्सर यह लेवल अपने आप नीचे आ जाता है.
2. जेनेटिक बीमारियां- भारत में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया जैसी बीमारियां काफी आम हैं. ये बीमारियां हीमोग्लोबिन के स्ट्रक्चर को बदल देती हैं, जिससे HbA1c टेस्ट शुगर का सही अंदाजा नहीं लगा पाता.
3. G6PD की कमी- पुरुषों में G6PD (एक खास एंजाइम) की कमी होती है, उनमें शुगर की पहचान होने में 4 साल तक की देरी हो सकती है. इतनी देरी का मतलब है कि मरीज को डायबिटीज की गंभीर बीमारी होने का खतरा बढ़ सकता है.
नोट-
- सिर्फ एक रिपोर्ट देखकर घबराएं नहीं.
- अगर आपकी HbA1c रिपोर्ट ज्यादा आ रही है, तो अपने डॉक्टर से पूछें.
- डायबिटीज की सही स्थिति जानने के लिए 'फास्टिंग' (खाली पेट) और खाने के बाद वाली जांच (PP) भी जरूर करवाएं.
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