Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने वाला है. वैसे तो ज्यादातर मंदिरों में ग्रहण के दौरान पट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ रुक जाता है, लेकिन कुछ ऐसे मंदिर हैं, जहां ये नियम लागू नहीं होते. ग्रहण के दौरान भी इन मंदिरों के दरवाजे खुले रहते हैं और भक्त दर्शन कर सकते हैं. इसे जानकर कई लोग हैरान रह जाते हैं, लेकिन इसके पीछे एक खास कारण है.
1. उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर
उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. यह शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां के पट कभी बंद नहीं होते. कहते हैं कि महाकाल स्वरुप भगवान शिव स्वयंभू हैं और ग्रहण का उन पर कोई असर नहीं पड़ता. इस कारण चाहे ग्रहण हो या कुछ और, मंदिर का मुख्य दरवाजा हमेशा खुला रहता है और भक्त निरंतर पूजा कर सकते हैं.

2. दिल्ली का कालकाजी मंदिर
दिल्ली का कालकाजी मंदिर भी इस मामले में काफी मशहूर है. मान्यता है कि कालका देवी कालचक्र की स्वामिनी हैं और सारे ग्रह-नक्षत्र उनके नियंत्रण में हैं. यही वजह है कि ग्रहण का इस मंदिर पर कोई असर नहीं होता. भक्त ग्रहण के समय भी यहां दर्शन-पूजन करने आते हैं और मंदिर के दरवाजे खुले रहते हैं.
3. उत्तराखंड का कल्पेश्वर मंदिर
उत्तराखंड का कल्पेश्वर मंदिर भी ग्रहण के दौरान खुला रहता है. यहां भगवान शिव ने मां गंगा की धारा को नियंत्रित किया था और इस कारण इस मंदिर के द्वार भी बंद नहीं किए जाते. श्रद्धालु यहां आकर मन और तन दोनों की शांति महसूस करते हैं.
4. थिरुवरप्पु का श्री कृष्ण मंदिर
केरल के कोट्टायम में स्थित थिरुवरप्पु का श्री कृष्ण मंदिर भी काफी अनोखा है. यहां भगवान कृष्ण को पूरे दस बार भोग लगाया जाता है और मान्यता है कि भगवान को भूख बहुत लगती है. इसी कारण ग्रहण के दौरान भी मंदिर के पट बंद नहीं किए जाते, ताकि भगवान को भोग दिया जा सके.
5. गया का विष्णुपद मंदिर
गया का विष्णुपद मंदिर भी इस मामले में खास है. यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है और ग्रहण के दौरान भी मंदिर के दरवाजे खुले रहते हैं ताकि श्रद्धालु अपने पितरों की तृप्ति के लिए पिंडदान कर सकें.
6. बीकानेर का लक्ष्मीनाथ मंदिर
राजस्थान के बीकानेर में लक्ष्मीनाथ मंदिर की भी एक अनोखी कहानी है. कहा जाता है कि एक बार ग्रहण के दौरान मंदिर के पट बंद हो गए थे और भगवान को भोग नहीं दिया गया, तब मंदिर के पास की दुकान के हलवाई को सपने में भगवान ने अपनी भूख बताई. उस समय से यह परंपरा चली आ रही है कि इस मंदिर के कपाट ग्रहणकाल में कभी बंद नहीं होते.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं