दिल्ली-एनसीआर और आस-पास के इलाको में जैसे ही मौसम बदलता है, मौसमी बीमारियों का असर तेजी से दिखने लगता है. आजकल H1N1 यानी इनफ्लुएंजा फ्लू के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. ओपीडी में रोज कई ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं जो कई दिनों से बुखार और खांसी से परेशान हैं. लोग इसे आम मौसमी जुकाम समझकर घर पर ही आराम करते रहते हैं या मेडिकल स्टोर से कोई भी दवा ले लेते हैं. असल बात यह है कि H1N1 में सबसे बड़ा खतरा खुद वायरस नहीं, बल्कि इलाज में की जाने वाली देरी है. सही समय पर पहचान और डाक्टर की सलाह ही इस बीमारी को गंभीर होने से रोक सकती है.
H1N1 क्या है और यह कैसे फैलता है
H1N1 एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो सीधे हमारे श्वसन तंत्र यानी सांस की नली और फेफड़ो पर हमला करती है. आम बोलचाल में लोग इसे स्वाइन फ्लू भी कहते हैं. जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो हवा में छोटे-छोटे ड्रॉपलेट्स फैल जाते हैं. अगर कोई दूसरा इंसान इन बूंदो के संपर्क में आता है या उस सतह को छूने के बाद अपने मुंह या नाक पर हाथ लगाता है, तो यह वायरस उसके शरीर में आसानी से प्रवेश कर जाता है. ज्यादातर लोगो में यह सामान्य फ्लू की तरह आता है और एक हफ्ते में ठीक भी हो जाता है, लेकिन कुछ लोगो के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है.
शुरुआती लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें
फ्लू के लक्षण बहुत अचानक से आते हैं. सुबह आप बिल्कुल ठीक महसूस कर रहे होते हैं और शाम तक आपकी हालत बिगड़ सकती है. इन लक्षणों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है:
• अचानक तेज बुखार आना या बहुत तेज ठंड लगना
• लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी होना
• गले में तेज दर्द, चुभन और खराश महसूस होना
• नाक बंद होना या लगातार पानी बहना
• पूरे बदन और मांसपेशियों में तेज दर्द रहना
• सिरदर्द और जरूरत से ज्यादा कमजोरी व थकान
• छोटे बच्चो में उल्टी, दस्त या पेट दर्द की समस्या
हर मरीज में तेज बुखार आए ऐसा जरूरी नहीं होता है. कई बार मरीज सिर्फ थकान और बदन दर्द की शिकायत करते हैं, इसलिए किसी भी बदलाव को हलके में न लें.
किन मरीजों को है सबसे ज्यादा जोखिम
स्वस्थ युवाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है, इसलिए उनका शरीर वायरस से आसानी से लड़ लेता है. लेकिन कुछ खास श्रेणी के मरीजों में फ्लू गंभीर रूप ले लेता है और निमोनिया या सांस रुकने जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. हाई-रिस्क ग्रुप में यह लोग शामिल हैं:
• 5 साल से कम उम्र के छोटे बच्चे
• 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग
• गर्भवती महिलाएं
• अस्थमा, सीओपीडी या फेफड़ों की पुरानी बीमारी से पीड़ित लोग
• डायबिटीज, दिल की बीमारी या किडनी की समस्या वाले मरीज
• कैंसर के मरीज या जिनकी इम्युनिटी किसी बीमारी या दवा के कारण कमजोर है
अगर इस वर्ग का कोई भी व्यक्ति फ्लू की चपेट में आता है, तो पहले दिन से ही विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है.
इलाज में 48 घंटे का नियम क्यों है अहम
H1N1 के इलाज में समय का बहुत बड़ा रोल है. शुरुआती 48 घंटों के अंदर अगर डाक्टर की सलाह से एंटीवायरल दवा शुरू कर दी जाए, तो वायरस का फैलाव शरीर में तेजी से रुक जाता है. इससे बीमारी फेफड़ों तक नहीं पहुंचती और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आती है.
मरीज अक्सर तीन-चार दिन तक पैरासिटामोल लेकर घर पर बैठे रहते हैं. जब सांस फूलने लगती है या बलगम में खून आने लगता है, तब अस्पताल भागते हैं. देर से इलाज शुरू होने पर रिकवरी में काफी लंबा वक्त लग जाता है.
एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल बंद करें
अक्सर देखा जाता है कि लोग बुखार होते ही खुद से कोई भी एंटीबायोटिक खाना शुरू कर देते हैं. यह तरीका पूरी तरह गलत और नुकसानदेह है. एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया पर काम करती हैं, जबकि H1N1 एक वायरस है. वायरस पर एंटीबायोटिक का कोई असर नहीं होता. बिना जरूरत इन दवाओं को खाने से शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पैदा होता है और लिवर-किडनी पर बुरा असर पड़ता है. हमेशा डाक्टर से पूछकर ही सही एंटीवायरल दवा लें.
खतरे के संकेत: तुरंत अस्पताल कब जाएं
अगर मरीज में नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो बिना एक पल गंवाए उसे नजदीकी अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाएं:
• सांस लेने में भारी तकलीफ या तेजी से सांस चलना
• सीने में लगातार दर्द या भारी दबाव महसूस होना
• होंठ या नाखूनों का रंग नीला या पीला पड़ना
• मरीज का बेहोश होना, भ्रमित होना या बात न समझ पाना
• तेज बुखार का 3-4 दिन बाद भी दवा से न उतरना
• लगातार उल्टियां होना और शरीर में पानी की भारी कमी
बचाव के आसान और असरदार तरीके
इस बीमारी से डरने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है. अपनी रोजमर्रा की आदतों में थोड़ा सा बदलाव करके आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं:
• साबुन और पानी से दिन में कई बार हाथ अच्छी तरह धोएं.
• बाहर निकलते समय और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क जरूर लगाएं.
• खांसते या छींकते समय मुंह पर रुमाल या टिशू पेपर रखें.
• अपनी आंख, नाक और मुंह को बार-बार बिना हाथ धोए न छुएं.
• बीमार व्यक्ति से कम से कम एक मीटर की दूरी बनाकर रखें.
• फ्लू सीजन शुरू होने से पहले डाक्टर से सलाह लेकर फ्लू वैक्सीन जरूर लगवाएं.
खान-पान और लाइफस्टाइल का ध्यान रखें
बीमारी के दौरान शरीर को आराम की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. मरीज को कमरे में पूरी तरह आराम करने दें. दिनभर में पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी, सूप, नींबू पानी और नारियल पानी पिएं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो. ताजा और सुपाच्य भोजन लें.
H1N1 को सही समय पर समझदारी दिखाकर पूरी तरह हराया जा सकता है. अगर आपको या घर में किसी को भी फ्लू जैसे लक्षण दिखें, तो लापरवाही छोड़कर तुरंत डाक्टर से परामर्श लें.
डॉ. सपना यादव
16+ वर्षों का अनुभव
अस्थमा, सीओपीडी और अन्य श्वसन रोगों की विशेषज्ञ
स्लीप मेडिसिन एवं इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी में विशेष रुचि
ग्रेटर नोएडा एवं दिल्ली-एनसीआर में श्वसन रोग उपचार के लिए जानी-मानी विशेषज्ञ.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं