फ्लू या H1N1 होने पर शुरू के तीन चार दिन काफी भारी गुजरते हैं. तेज बुखार, बदन दर्द, गले में चुभन और कमजोरी से शरीर टूट सा जाता है. ज्यादातर मामलों में 3 से 7 दिन के अंदर मरीज की तबियत सुधरने लगती है और लोग राहत की सांस लेते हैं. लेकिन अगर 3-4 दिन बाद अचानक से फिर तेज बुखार आ जाये, खांसी बढ़ जाये या सांस फूलने लगे, तो इसे मामूली कमजोरी समझने की भूल बिलकुल न करें.
यह सेकेंडरी इंफेक्शन यानी फेफड़ों में बैक्टीरियल निमोनिया होने का सीधा इशारा हो सकता है.
फ्लू के बाद क्यों बिगड़ने लगती है हालत?
जब वायरस हमारे फेफड़ों को कमजोर कर देता है, तो बैक्टीरिया को हमला करने का मौका मिल जाता है. इसे मेडिकल भाषा में सेकेंडरी बैक्टीरियल इंफेक्शन कहते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी मानता है कि फ्लू के बाद होने वाला बैक्टीरियल निमोनिया एक बड़ी जटिलता है.
किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिये:
- बुखार उतरने के बाद अचानक से दोबारा तेज चढ़ना
- खांसी का बहुत ज्यादा बढ़ जाना और बलगम आना
- थोड़ा सा चलने पर भी सांस फूलना
- सीने में भारीपन, चुभन या लगातार दर्द रहना
- शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी और ऑक्सीजन का स्तर गिरना
इन लोगों को रहता है सबसे ज्यादा खतरा
- कुछ लोगों को फ्लू के बाद बेहद सावधान रहने की जरूरत होती है:
- घर के बुजुर्ग और छोटे बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- शुगर, दमा (अस्थमा) या दिल की पुरानी बीमारी से जूझ रहे मरीज
- जिनकी इम्युनिटी किसी वजह से कमजोर है
बिना जांच खुद से एंटीबायोटिक खाने की गलती न करें
कई बार लोग बुखार लौटते ही घर में रखी एंटीबायोटिक गोलियां खाने लगते हैं, जो बहुत गलत तरीका है. एंटीबायोटिक दवाइयां वायरल फ्लू को ठीक नही करतीं. इसका इस्तेमाल सिर्फ तभी होना चाहिये जब डॉक्टर जांच, छाती का एक्स-रे या खून की रिपोर्ट देखकर बैक्टीरियल इन्फेक्शन की पुष्टी करें.
कब तुरंत अस्पताल भागना जरूरी है?
अगर मरीज में ये खतरे के संकेत दिखें तो एक मिनट की भी देरी न करें:
- सांस खींचने में जोर लगना
- सीने में तेज दबाव या दर्द
- मरीज का बहकी-बहकी बातें करना या कन्फ्यूजन
- पेशाब की मात्रा बहुत कम हो जाना
- तेज कंपकंपी के साथ फिर से तेज बुखार आना
फ्लू में केवल पहले दो तीन दिन का बुखार उतर जाना ही पूरी रिकवरी नही होता. बुखार उतरने के बाद के 4-5 दिन भी मरीज की सांस, खांसी और एक्टिविटी पर नजर रखना बहुत जरूरी है. समय रहते डॉक्टर को दिखाने से सेकेंडरी इंफेक्शन को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है.
लेखक के बारे में :
डॉ. प्रेरणा गोयल (सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन, आरजी हॉस्पिटल्स, लुधियाना)
डॉ. प्रेरणा गोयल 15 वर्षों से अधिक अनुभव वाली वरिष्ठ चिकित्सक हैं. वे डायबिटीज, हृदय रोग, थायरॉयड विकार, संक्रमण नियंत्रण और स्लीप मेडिसिन के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखती हैं. वर्तमान में वे आरजी हॉस्पिटल्स में एसोसिएट मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और इंफेक्शन कंट्रोल ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं तथा राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय चिकित्सा सम्मेलनों से सक्रिय रूप से जुड़ी रही हैं.
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