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H1N1 से ठीक होकर फिर आ गया बुखार और खांसी? इसे मामूली समझने की भूल मत करना

H1N1 यानी स्वाइन फ्लू का बुखार उतरने के बाद कई लोग खुद को पूरी तरह स्वस्थ मान लेते हैं. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक कुछ मरीजों में दोबारा बुखार, बलगम वाली खांसी, सांस फूलना या निमोनिया जैसे गंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं. जानिए किन संकेतों को भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

H1N1 से ठीक होकर फिर आ गया बुखार और खांसी? इसे मामूली समझने की भूल मत करना
H1N1 से ठीक होने के बाद कौन से लक्षण सामान्य हैं?
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हम सब यही सोचते हैं कि एक बार बुखार उतर गया तो बस बीमारी खत्म हो गई. घर के काम हो या दफ्तर की भागदौड़, हम तुरंत पुरानी रफ्तार पकड़ने की कोशिश करते हैं. पर H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले में यह जल्दबाजी कई बार भारी पड़ जाती है. यशोदा मेडिसिटी के एसोसिएट डायरेक्टर डाक्टर विनय भट बताते हैं कि बहुत से मरीज कुछ दिन बुखार रहने के बाद ठीक महसूस करने लगते हैं, लेकिन दो-तीन दिन बाद अचानक फिर तेज बुखार या बलगम वाली खांसी शुरू हो जाती है. इसे सामान्य कमजोरी समझकर टालना भारी पड़ सकता है.

शरीर को संभलने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए

फ्लू से जंग जीतने के बाद शरीर अंदर से पूरी तरह थका हुआ होता है. ऐसे में कुछ बातें समझना बेहद जरूरी है.

  • बुखार जाने के बाद भी हल्की खांसी और थकान कुछ दिनों तक बनी रह सकती है.
  • सीढ़ियां चढ़ते वक्त या थोड़ा तेज चलने पर सांस फूलना सामान्य रिकवरी का हिस्सा हो सकता है.
  • अगर रोज थोड़ी-थोड़ी ताकत लौट रही है, तो डरने की कोई बात नहीं है, बस भरपूर आराम की जरूरत है.

हालात कब चिंताजनक बन जाते हैं

दिक्कत तब शुरू होती है जब मरीज ठीक होने के बाद फिर से बीमार पड़ने लगे.

  • अगर बुखार दोबारा लौट आए और खांसी पहले से ज्यादा तेज हो जाए.
  • सांस खींचने में तकलीफ होने लगे या सीने में भारीपन व दर्द महसूस हो.
  • बलगम का रंग बदलने लगे, जो फेफड़ों में दूसरे बैक्टीरीयल संक्रमण या निमोनिया का संकेत हो सकता है.

खुद डाक्टर बनने की गलती न करें

अक्सर लोग बुखार लौटते ही मेडिकल स्टोर से पुरानी एंटीबायोटिक खरीदकर खाने लगते हैं.

H1N1 एक वायरल बीमारी है, इसमें हर बार एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं पड़ती.बिना जांच के दवा लेने से असली समस्या दब जाती है और सही इलाज में देरी होती है. सिर्फ डाक्टर ही देखकर तय कर सकते हैं कि यह कोई नया इंफेक्शन है या सिर्फ शरीर की थकान.

स्वाइन फ्लू का बुखार उतरने के बाद भी अगर दोबारा बुखार, खांसी बढ़ना, सांस लेने में दिक्कत या बलगम का रंग बदलना जैसे लक्षण दिखें, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह निमोनिया या किसी दूसरे संक्रमण का संकेत हो सकता है.

किन लोगों को सबसे ज्यादा संभलकर रहना है?

कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए यह समय बहुत नाजुक होता है.

घर के बुजुर्ग, छोटे मासूम बच्चे और गर्भवती महिलाएं खास ध्यान रखें. जिन लोगों को पहले से दिल, दमा या फेफड़े की पुरानी बीमारीया हैं, उन्हें लक्षण लौटते ही तुरंत अस्पताल फ्लू वैक्सीन लगवाकर इस तरह के गंभीर खतरों और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत से काफी हद तक बचा जा सकता है.

जब तक शरीर पूरी तरह साथ न दे, तब तक आराम को पहली प्राथमिकता दीजिए. खूब पानी पीएं, सही खाना खाएं और अगर जरा भी लगे कि तबीयत सुधरने के बजाय बिगड़ रही है, तो बिना देर किए अपने डाक्टर से जरूर मिले. लापरवाही से बेहतर है कि समय रहते जांच करा ली जाए.

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