त्योहारों का मौसम आते ही घरों में तरह-तरह के पकवान, मिठाइयां और स्वादिष्ट डिशेज बनने लगते हैं. फ्राइड स्नैक्स, मसालेदार करी, मिठाइयां और देर रात तक चलने वाली दावतें त्योहार सीजन का एक अहम हिस्सा होती हैं. हालांकि, कभी-कभार पसंदीदा खाने का आनंद लेना नॉर्मल है, लेकिन जरूरत से ज्यादा खाना यानी बिंज-ईटिंग कई लोगों में एसिड रिफ्लक्स जैसी पाचन संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकती है. इस तरह की परेशानी उन लोगों में भी हो सकती है, जिन्हें आमतौर पर पट से जुड़ी कोई बीमारी नहीं होती. सीके बिड़ला हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. अनुकल्प प्रकाश का कहना है कि त्योहारों में ज्यादा खाना खाने से पेट पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ता है, जिससे एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है. यहां विस्तार से जानते हैं एसिड रिफ्लक्स क्या है और इससे जुड़ी अन्य जानकारी-
एसिड रिफ्लक्स क्या है?
डॉ. प्रकाश बताते हैं कि एसिड रिफ्लक्स तब होता है, जब पेट में मौजूद खाना और पाचक एसिड वापस इसोफेगस यानि फूड पाइप की ओर आने लगते हैं. सामान्य स्थितियों में खाना नली और पेट के बीच मौजूद लोअर इसोफेगल स्फिंक्टर नामक वाल्व भोजन को ऊपर आने से रोकता है. लेकिन जब ये वाल्व सही तरीके से बंद नहीं होता या ढीला पड़ जाता है, तो पेट का एसिड ऊपर आने लगता है. इसके कारण सीने में जलन, मुंह में खट्टापन, डकारें आना और खाने के बाद बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
ज्यादा खाने से क्यों बढ़ता है खतरा?
डॉ. अनुकल्प का कहना है कि त्योहारों के दौरान एसिड रिफ्लक्स बढ़ने का सबसे बड़ा कारण काफी ज्यादा खाना खा लेना होता है. जब कोई व्यक्ति एक बार में बहुत ज्यादा खाता है, तो पेट को खाना समायोजित करने के लिए फैलना पड़ता है. इससे पेट के अंदर प्रेशर बढ़ जाता है और एसिड के फूड नली की ओर लौटने की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा जल्दी-जल्दी खाना, बार-बार प्लेट भरना या बिना पर्याप्त अंतराल के कई तरह के डिशेज खाना भी समस्या को और गंभीर बना सकता है.
कुछ चीजें एसिड रिफ्लक्स को करती है ट्रिगर
डॉक्टर कहते हैं कि त्योहारों में बनने वाले कुछ डिशेज एसिड रिफ्लक्स का रिस्क बढ़ा सकते हैं. डीप फ्राइड स्नैक्स, ज्यादा तेल वाली ग्रेवी, हैवी डेजर्ट और काफी ज्यादा मसालेदार खाना खाने की वजह से भी परेशानी बढ़ जाती है. हाई फैट वले फूड्स पेट को खाली होने में ज्यादा समय लगवाते हैं, जिससे भोजन लंबे समय तक पेट में रहता है और रिफ्लक्स की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा चॉकलेट, पेपरमिंट, कैफीन युक्त ड्रिंक और खट्टे फलों से बने ड्रिंक्स भी कुछ लोगों में लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं. हालांकि, हर व्यक्ति की सेंसिटिविटी अलग होती है और सभी लोगों पर एक जैसा असर नहीं पड़ता.
देर रात खाना भी है बड़ा कारण
डॉ. अनुकल्प कहते हैं कि त्योहारों और पब्लिक प्रोग्राम के चलते कई लोग देर रात भोजन करते हैं और खाने के तुरंत बाद सो जाते हैं. ये आदत एसिड रिफ्लक्स को बढ़ावा देती है, क्योंकि लेटने की स्थिति में पेट की सामग्री का भोजन नली की ओर वापस जाना आसान हो जाता है. ऐसे में रात में नींद खराब हो सकती है, सीने में जलन महसूस हो सकती है और गले में असहजता पैदा हो सकती है.
खाना खाने के तुरंत बाद न लेटें
डॉक्टर प्रकाश कहते हैं कि रात के खाने और सोने के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का अंतर रखें. खाना खाने के बाद हल्की वॉक करना पाचन के लिए फायदेमंद हो सकती है. हालांकि, हैवी खाना खाने के तुरंत बाद हैवी एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए.
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