आजकल फैटी लिवर एक आम समस्या बनती जा रही है. पहले इसे सिर्फ शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब गलत खानपान, मोटापा, डायबिटीज और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं. चिंता की बात यह है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर के लक्षण नजर नहीं आते, जिसकी वजह से कई लोग समय रहते इसके बारे में जान ही नहीं पाते.
हैदराबाद में यशोदा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, लिवर स्पेशलिस्ट, एडवांस्ड एंडोस्कोपिक इंटरवेंशन एंड ट्रेनिंग के लीड, और क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. नवीन पोलावरपु का कहना है कि फैटी लिवर धीरे-धीरे चार स्टेज में आगे बढ़ता है. अगर शुरुआत में इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह गंभीर लिवर डैमेज का कारण बन सकता है.
स्टेज-1: सिंपल फैटी लिवर
डॉय नवीन कहते हैं कि स्टेप-1 फैटी लिवर का शुरुआती चरण होता है. इस दौरान लिवर के सेल्स में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है, लेकिन सूजन या गंभीर नुकसान नहीं होता. अधिकतर लोगों को इस स्टेज में कोई खास लक्षण महसूस नहीं होते. कई बार रूटीन हेल्थ चेकअप या अल्ट्रासाउंड के दौरान इसका पता चलता है.
अच्छी बात ये है कि इस चरण में वजन कम करके, स्वस्थ खानपान अपनाकर और नियमित व्यायाम के जरिए स्थिति को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.
स्टेज-2: फैटी लिवर के साथ सूजन
डॉक्टर बताते हैं कि जब लिवर में जमा फैट सूजन पैदा करने लगता है, तो स्थिति अगली स्टेज में पहुंच जाती है. इसे स्टीटोहेपेटाइटिस कहा जाता है. इस दौरान कुछ लोगों को थकान, पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन या हल्का दर्द महसूस हो सकता है. अगर इस स्टेज में भी ध्यान नहीं दिया गया तो लिवर की सेल्स को नुकसान पहुंचना शुरू हो सकता है.
स्टेज-3: लिवर फाइब्रोसिस
लगातार सूजन की वजह से लिवर में निशान बनने लगते हैं. इस स्थिति को फाइब्रोसिस कहा जाता है. हालांकि, इस चरण में लिवर अपना काम करता रहता है, लेकिन उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है.
इस स्थिति में आते-आते मरीज को थकान, कमजोरी, भूख कम लगना और पेट में असहजता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. ये वो स्टेज है, जहां मरीज को तुरंत डॉक्टर को दिखाने की जरूरत होती है. साथ ही लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी हो जाता है.
स्टेज-4: लिवर सिरोसिस
ये स्टेज फैटी लिवर की सबसे गंभीर अवस्था मानी जाती है. इस दौरान लिवर का बड़ा हिस्सा स्थाई रूप से डैमेज हो जाता है और उसकी सामान्य कार्यक्षमता काफी कम हो जाती है.
सिरोसिस होने पर पेट में सूजन, पैरों में पानी भरना, त्वचा और आंखों का पीला पड़ना, बार-बार कमजोरी महसूस होना और गंभीर मामलों में लिवर फेलियर तक का खतरा बढ़ सकता है.
कैसे करें बचाव?
डॉक्टर कहते हैं कि अगर आप फैटी लिवर से सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइ, वजन को नियंत्रित रखना, शराब से दूरी और डायबिटीज को कंट्रोल करने की कोशिश करें. इन समस्याओं को कंट्रोल में रखकर फैटी लिवर की स्थिति को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसके साथ ही नियमित रूप से जांच कराते रहें.
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