- बंडा तातरवारा गांव में 2022 से शराब का अवैध कारोबार चल रहा था.
- नेटवर्क कई लोग मिलकर चला रहे थे, जिसमें किसी ने जमीन दी तो किसी ने शराब बनाई.
- तो कोई सप्लाई की जिम्मेदारी संभाल रहा था. केमिकल यूपी से मंगाया जाता तो बोतलें हरियाणा से मंगाई जाती थीं.
Sagar Liquor Tragedy Case: सागर जिले के बंडा क्षेत्र में सामने आए चर्चित जहरीली शराब कांड ने अवैध शराब के कारोबार के पूरे नेटवर्क पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब तक 34 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि 18 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. शराब बनाने में माहिर बताए जा रहे आरोपी रवि लखेरा (Ravi Lakhera) को पुलिस ने शॉर्ट एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया, जबकि मनीष लोधी (Manish Lodhi) अब भी फरार बताया जा रहा है.
मामले से जुड़े घटनाक्रम और अब तक सामने आई पुलिस जांच की जानकारी जुटाई तो अवैध शराब के इस नेटवर्क की परतें खुलती नजर आईं. जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, बंडा के तातरवारा गांव में वर्ष 2022 से अवैध शराब का कारोबार संचालित हो रहा था. समय के साथ यह कारोबार बढ़ता गया और कथित तौर पर कई लोगों की भूमिका इस नेटवर्क में जुड़ती चली गई.

मनीष लोधी, जो अभी फरार चल रहा है.
रवि लखेरा और मनीष लोधी की दोस्ती से बढ़ा कारोबार
पुलिस जांच के मुताबिक, रवि लखेरा शराब बनाने में माहिर था, जबकि मनीष लोधी पहले से अवैध शराब बेचने के कारोबार से जुड़ा हुआ था. बाद में मनीष ने शराब का लाइसेंस भी लिया और लाइसेंसी ठेकेदार बन गया.
इसी दौरान रवि लखेरा और मनीष लोधी की दोस्ती हुई. जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, रवि ने मनीष को अवैध शराब तैयार करने का तरीका और कारोबार को बड़े स्तर पर चलाने का आइडिया दिया, लेकिन अवैध शराब बनाने के लिए सुरक्षित जगह की जरूरत थी. इसके बाद मनीष ने रवि की मुलाकात चंदू राजा राजपूत से कराई.
चंदू ने दी जमीन, रवि ने बनाई शराब, मनीष ने संभाला नेटवर्क
पुलिस जांच में पता चला कि चंदू राजा को अवैध शराब बनाने का प्रस्ताव दिया गया. कथित तौर पर तीनों के बीच जिम्मेदारियां तय हुईं. इसमें जमीन की व्यवस्था चंदू राजा ने की और शराब तैयार करने का काम रवि लखेरा को मिला. फिर शराब को गांव-गांव तक पहुंचाने और बिक्री का नेटवर्क संभालने की जिम्मेदारी मनीष लोधी को मिली थी, जिसमें उसके साथी भी शामिल रहे हैं.
इसके बाद तातरवारा में चंदू से जुड़ी जमीन पर अवैध शराब तैयार करने का काम शुरू हुआ. जांच में यह भी सामने आया है कि शराब तैयार करने के लिए जरूरी सामान और केमिकल उत्तर प्रदेश से, जबकि शराब की खाली बोतलें हरियाणा से मंगाए जाने की बात सामने आई है. इन दावों की जांच पुलिस और संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है.
गांव-गांव बनाई गईं बिक्री की टीमें
इस नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा शराब को गांव-गांव तक पहुंचाने और बेचने का बताया जा रहा है. पुलिस को पूछताछ में पता चला कि अलग-अलग गांवों में चार से पांच युवकों की टीमें बनाई गई थीं. इन टीमों के जरिए कथित तौर पर अवैध शराब की बिक्री कराई जाती थी.
इन टीमों को चंदू राजा राजपूत हैंडल कर रहा था. चंदू का क्षेत्र में प्रभाव होने के कारण कथित नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलने की बात भी जांच में सामने आई है.
सरकारी शराब दुकान के जरिए खपाने का आरोप
जांच में एक और गंभीर कड़ी सामने आई है. आरोप है कि अवैध शराब को सिर्फ गांवों में ही नहीं बेचा जाता था, बल्कि उसे सरकारी शराब की दुकानों के नेटवर्क में भी खपाने की कोशिश की जाती थी.
पुलिस जांच के अनुसार, मनीष लोधी की लाइसेंसी शराब ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा से डील थी. आरोप है कि चंदू के खेत में तैयार की गई अवैध शराब पर फर्जी लेबल लगाकर उसे सरकारी शराब दुकान के जरिए बेचने की व्यवस्था की जाती थी. इसके बदले सिद्धार्थ कुशवाहा को कथित तौर पर अलग कमीशन मिलने की बात जांच में सामने आई है.
हालांकि, इस पूरे मामले में किस आरोपी की भूमिका कितनी थी, इसका अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और अदालत की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा. फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ, फरार आरोपियों की तलाश और अवैध शराब के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.
प्वाइंट्स में समझें कौन क्या करता था?
- चंदू राजा राजपूत: जमीन और स्थानीय नेटवर्क उपलब्ध कराने तथा बिक्री टीमों को नियंत्रित करने का आरोप.
- रवि लखेरा: अवैध शराब तैयार करने में मुख्य भूमिका और तकनीकी जानकारी देने का आरोप.
- मनीष लोधी: शराब की सप्लाई, बिक्री नेटवर्क और लाइसेंसी कारोबार के जरिए अवैध शराब को खपाने की व्यवस्था में भूमिका का आरोप.
- सिद्धार्थ कुशवाहा: लाइसेंसी शराब दुकान के माध्यम से फर्जी लेबल लगी अवैध शराब की बिक्री में कथित भूमिका और कमीशन लेने का आरोप.
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