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Dengue Recovery: डेंगू ठीक होने के बाद भी क्यों रहती है भूलने की समस्या? न्यूरोलॉजिस्ट ने बताई वजह

डेंगू ठीक होने के बाद भी भूलने की समस्या, फोकस में कमी और Brain Fog महसूस हो सकता है. न्यूरोलॉजिस्ट से जानिए इसके कारण, चेतावनी वाले लक्षण और रिकवरी टिप्स.

Dengue Recovery: डेंगू ठीक होने के बाद भी क्यों रहती है भूलने की समस्या? न्यूरोलॉजिस्ट ने बताई वजह
डेंगू तो ठीक हो गया, लेकिन याददाश्त और फोकस नहीं लौटा? न्यूरोलॉजिस्ट से जानें वजह?
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डेंगू से ठीक होने के बाद कई मरीजों को कुछ दिनों या हफ्तों तक थकान, कमजोरी और शरीर में दर्द की शिकायत रहती है. लेकिन कुछ लोगों को बीमारी से उबरने के बाद बार-बार चीजें भूलने, काम पर ध्यान न लगा पाने, बातचीत के दौरान शब्द याद न आने या मानसिक रूप से सुस्त महसूस होने जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं.

डेंगू का बुखार उतरने और प्लेटलेट्स सामान्य होने के बाद भी कुछ लोग मानसिक थकान, फोकस की कमी और बार-बार चीजें भूलने की शिकायत करते हैं. क्या यह सामान्य रिकवरी का हिस्सा है या किसी गंभीर समस्या का संकेत?

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह सिर्फ डेंगू के बाद की कमजोरी है या इसके पीछे कोई न्यूरोलॉजिकल कारण भी हो सकता है?न्यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक, डेंगू के बाद कुछ समय तक शरीर और दिमाग दोनों को पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है.

लंबे समय तक रहने वाला बुखार, नींद की कमी, डिहाइड्रेशन, कम खाना, कमजोरी और बीमारी के दौरान शरीर पर पड़ा तनाव व्यक्ति की एकाग्रता और मानसिक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है. इसलिए हल्की भूलने की समस्या या ध्यान में कमी हमेशा किसी गंभीर ब्रेन कॉम्प्लिकेशन का संकेत नहीं होती.

डॉ. प्रवीण गुप्ता, सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट और चेयरमैन, MAIINS, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स ने बताया,

डेंगू से रिकवरी के बाद मरीज अक्सर यह शिकायत करते हैं कि उन्हें पहले की तुलना में ध्यान लगाने में ज्यादा समय लग रहा है या छोटी-छोटी बातें याद रखने में परेशानी हो रही है.

अगर याददाश्त या व्यवहार में बदलाव लगातार बढ़ रहा है, रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं या इसके साथ दूसरे न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी हैं, तो इसे केवल कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

बीमारी के बाद ‘Brain Fog' जैसा महसूस क्यों हो सकता है?

डेंगू के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लग सकता है. इस दौरान मरीज को मानसिक थकान या brain fog जैसा अनुभव हो सकता है. इसमें ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, चीजें याद करने में थोड़ी परेशानी, निर्णय लेने में धीमापन और लगातार मानसिक थकान महसूस होना शामिल हो सकता है.इसके पीछे नींद पूरी न होना, कम भोजन लेना, पर्याप्त पानी न पीना, लंबे समय तक बुखार रहने से हुई कमजोरी और तनाव जैसे कई कारण हो सकते हैं. कई मरीज बीमारी के दौरान शारीरिक गतिविधि भी काफी कम कर देते हैं, जिससे रिकवरी और धीमी महसूस हो सकती है.

क्या डेंगू के बाद भूलने की समस्या हो सकती है?

हां, डेंगू से उबरने के बाद कुछ लोगों को Brain Fog, ध्यान लगाने में कठिनाई, मानसिक थकान और हल्की भूलने की समस्या महसूस हो सकती है. यह अक्सर कमजोरी, डिहाइड्रेशन, नींद की कमी और शरीर पर पड़े तनाव से जुड़ा होता है.

कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?

अगर डेंगू से ठीक होने के बाद भूलने की समस्या धीरे-धीरे कम हो रही है और व्यक्ति सामान्य दैनिक गतिविधियां कर पा रहा है, तो पर्याप्त आराम, नींद, पौष्टिक भोजन और तरल पदार्थों पर ध्यान देना मददगार हो सकता है. लेकिन कुछ लक्षणों को सामान्य रिकवरी का हिस्सा नहीं मानना चाहिए.

न्यूरोलॉजिस्ट ने कहा,

“अगर मरीज को अचानक भ्रम होने लगे, व्यक्ति या स्थान को पहचानने में परेशानी हो, बोलने में दिक्कत आए, हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन हो, दौरे पड़ें, चलने में असंतुलन हो, बहुत ज्यादा नींद आए या चेतना के स्तर में बदलाव दिखाई दे, तो तत्काल चिकित्सकीय जांच जरूरी है. ऐसे लक्षण दुर्लभ लेकिन गंभीर न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं की ओर इशारा कर सकते हैं. ”

डेंगू के गंभीर मामलों में संक्रमण का असर नर्वस सिस्टम पर पड़ना दुर्लभ रूप से देखा जा सकता है. इसलिए लक्षणों की प्रकृति और उनकी अवधि को समझना जरूरी है. केवल प्लेटलेट काउंट सामान्य होने का मतलब यह नहीं है कि हर मरीज पूरी तरह रिकवर हो चुका है; मरीज की क्लिनिकल स्थिति और न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी महत्वपूर्ण हैं.

रिकवरी में किन बातों का रखें ध्यान?

डेंगू से उबरने के बाद शरीर को पर्याप्त आराम देना चाहिए. नींद पूरी करें, डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ लें और संतुलित आहार लें. कमजोरी कम होने पर धीरे-धीरे सामान्य शारीरिक गतिविधि शुरू की जा सकती है.

काम या पढ़ाई पर तुरंत पुराने स्तर का दबाव डालने के बजाय गतिविधियां धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर रहता है.सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डेंगू के बाद थोड़ी थकान और ध्यान में कमी कुछ समय के लिए हो सकती है, लेकिन लगातार बढ़ती याददाश्त की समस्या, भ्रम या अन्य न्यूरोलॉजिकल बदलाव को सिर्फ कमजोरी समझना सही नहीं है. ऐसे लक्षणों में न्यूरोलॉजिस्ट से समय पर सलाह लेना जरूरी है.

एक्‍सपर्ट के बारे में : डॉ. प्रवीण गुप्ता, MAIINS, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स में सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट और चेयरमैन हैं.

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