डेंगू को आमतौर पर तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी और सिरदर्द से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन डेंगू के दौरान होने वाला बहुत तेज, लगातार या असामान्य सिरदर्द हर बार सामान्य वायरल लक्षण नहीं होता. कुछ गंभीर मामलों में डेंगू का संक्रमण मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है. ऐसी स्थिति में समय पर पहचान और इलाज बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.
डेंगू में सिरदर्द क्यों होता है?
डॉ. प्रवीण गुप्ता, सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट और चेयरमैन, MAIINS, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के अनुसार, डेंगू में सिरदर्द कई कारणों से हो सकता है, जिनमें बुखार, शरीर में पानी की कमी, प्लेटलेट्स में गिरावट और संक्रमण के कारण शरीर में होने वाले बदलाव शामिल हैं. हालांकि, यदि सिरदर्द की तीव्रता अचानक बढ़ जाए या उसके साथ न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई देने लगें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
डेंगू में कौन सा सिरदर्द खतरे का संकेत हो सकता है?
डॉक्टर ने बताया, “डेंगू के दौरान सिरदर्द आम लक्षण है, लेकिन हर तेज सिरदर्द को केवल बुखार का हिस्सा मानना सही नहीं है. यदि सिरदर्द असहनीय हो, लगातार बढ़ रहा हो या इसके साथ उल्टी, भ्रम, अत्यधिक नींद, व्यवहार में बदलाव, बोलने में परेशानी, दौरे, हाथ-पैर में कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह ब्रेन या नर्वस सिस्टम से जुड़ी जटिलता का संकेत हो सकता है. ऐसे मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए.”
डेंगू में दिखने वाले न्यूरोलॉजिकल रेड फ्लैग लक्षण
डॉक्टर के मुताबिक, डेंगू से जुड़ी न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं दुर्लभ हैं, लेकिन गंभीर हो सकती हैं. कुछ मरीजों में एन्सेफेलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन), एन्सेफेलोपैथी, दौरे या चेतना के स्तर में बदलाव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. वहीं, गंभीर डेंगू में रक्तस्राव का खतरा बढ़ने पर सिरदर्द के साथ अन्य चेतावनी संकेत भी दिखाई दे सकते हैं.
किन लक्षणों को रेड फ्लैग मानें?
डेंगू के मरीज में सिरदर्द के साथ निम्न लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय जांच जरूरी है:
- अचानक बहुत तेज या असहनीय सिरदर्द
- लगातार उल्टी और सिरदर्द का बढ़ना
- भ्रम या आसपास की स्थिति समझने में परेशानी
- असामान्य नींद या मरीज को जगाने में कठिनाई
- बेहोशी या चेतना में कमी
- दौरे पड़ना
- बोलने या देखने में अचानक परेशानी
- हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन
- गर्दन में अकड़न
- व्यवहार में अचानक बदलाव
डेंगू में ब्रेन और नर्वस सिस्टम पर कैसे पड़ सकता है असर?
न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर ने कहा, “सिर्फ प्लेटलेट काउंट देखकर मरीज की गंभीरता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. मरीज की चेतना, न्यूरोलॉजिकल स्थिति, ब्लड प्रेशर, हाइड्रेशन और अन्य जांचों को भी देखना जरूरी है. डेंगू के दौरान तेज सिरदर्द के साथ कोई न्यूरोलॉजिकल बदलाव हो तो घर पर दर्द की दवा लेकर इंतजार करने के बजाय डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए.”
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कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू के दौरान पर्याप्त तरल पदार्थ लेना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना और नियमित निगरानी रखना जरूरी है. बुखार या दर्द के लिए कोई भी दवा खुद से लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि डेंगू में कुछ दर्द निवारक दवाएं रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं.
डेंगू के मरीज क्या सावधानियां रखें?
डेंगू के अधिकांश मरीज बिना किसी न्यूरोलॉजिकल जटिलता के ठीक हो जाते हैं. लेकिन तेज सिरदर्द के पैटर्न में अचानक बदलाव और उसके साथ चेतना, व्यवहार, बोलने, देखने या चलने-फिरने से जुड़े लक्षणों का आना चेतावनी का संकेत हो सकता है. ऐसे मामलों में शुरुआती जांच और समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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