नई दिल्ली: भारत में मलेरिया, डेंगू और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि इन तीनों बीमारियों के लिए वैक्सीन पर अध्ययन, मूल्यांकन और ट्रायल जारी हैं. कुछ वैक्सीन विकास के उन्नत चरण में पहुंच चुकी हैं, जबकि कुछ का मूल्यांकन शुरू हो चुका है.
मलेरिया वैक्सीन पर क्या है अपडेट?
डॉ. बहल के अनुसार, मलेरिया वैक्सीन को लाइसेंस मिल चुका है और फिलहाल इसका मूल्यांकन किया जा रहा है. हालांकि आम लोगों के लिए इसके उपलब्ध होने में अभी समय लगेगा.
उन्होंने कहा कि मलेरिया वैक्सीन के व्यापक इस्तेमाल में आने में करीब 2 साल या उससे अधिक समय लग सकता है, क्योंकि इसके प्रभाव और सुरक्षा का आकलन अभी जारी है.
डेंगू वैक्सीन पहुंची फेज-3 ट्रायल तक
डेंगू वैक्सीन के विकास को लेकर अच्छी प्रगति देखने को मिली है. ICMR प्रमुख के मुताबिक, डेंगू वैक्सीन इस समय फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल में है, जो वैक्सीन विकास का एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है.
उम्मीद जताई जा रही है कि अगले साल के अंत तक फेज-3 ट्रायल के अंतिम नतीजे सामने आ सकते हैं. यदि परिणाम सकारात्मक रहते हैं, तो डेंगू से बचाव के लिए एक प्रभावी वैक्सीन का रास्ता खुल सकता है.
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टीबी के लिए दो वैक्सीन पर चल रहा काम
भारत में टीबी (Tuberculosis) के खिलाफ दो अलग-अलग वैक्सीन उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जा रहा है.
1. भारत बायोटेक की MTBVAC
पहली वैक्सीन भारत बायोटेक की MTBVAC है. डॉ. बहल ने बताया कि इसका मूल्यांकन शुरू हो चुका है और इसके नतीजों पर नजर रखी जा रही है.
दूसरी वैक्सीन की तकनीक बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को मिली है. इस वैक्सीन के मूल्यांकन के लिए सीरम इंस्टीट्यूट और ICMR मिलकर काम कर रहे हैं.
क्या है उद्देश्य?
ICMR का लक्ष्य है कि ट्रायल और मूल्यांकन सफल रहने पर इन वैक्सीन को भारत में उपलब्ध कराया जाए, ताकि मलेरिया, डेंगू और टीबी जैसी बीमारियों से होने वाले बोझ को कम किया जा सके.
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