- दीपिंदर गोयल की तरफ से विकसित TEMPLE डिवाइस पर डॉक्टरों ने सवाल उठाए हैं.
- TEMPLE डिवाइस ऑप्टिकल सेंसर के माध्यम से कनपटी की नसों से सिग्नल पढ़ता है.
- डॉक्टरों ने दावा किया है कि डिवाइस द्वारा मापी गई नसें दिमाग तक रक्त नहीं पहुंचातीं.
जौमेटो के को-फाउंडर दीपिंदर गोयल का TEMPLE डिवाइस फिलहाल चर्चा में है. 85000 रुपए की कीमत के इस खास डिवाइस के लिए प्री-रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है. इसकी खासियत यह है कि ये डिवाइस दिमाग में रक्त प्रवाह और शरीर के जैविक तनाव को मापता है. इसलिए इसे माथे पर चिपकाया जाता है. लेकिन डॉक्टरों ने इस डिवाइस पर सवाल उठाए हैं. 1 नवंबर से इसकी प्री बुकिंग शुरू हो चुकी है. लेकिन मशहूर हेपेटोलॉजिस्ट डॉ सायरियाक एबी फिलिप्स, जिन्हें सोशल मीडिया पर 'द लिवर डॉक' के नाम से जाना जाता है. उन्होंने इस डिवाइस को एक तरह का हेल्थ स्कैम तक बता दिया है, जिससे यह पूरा मामला चर्चा में बना हुआ है.
क्या है दीपिंदर गोयल की यह डिवाइस
दीपिंदर गोयल की तरफ से तैयार करवाया गए इस डिवाइस का नाम Temple है, जो वियरेबल डिवाइस है, जिसमें कोई बटन या डिस्प्ले नहीं है. कंपनी का दावा है कि यह यह ऑप्टिकल सेंसर से कनपटी के पास की नसों से सिग्नल पढ़ता है. जिसकी डिवाइस दो मुख्य पैरामीटर को मापती है, इसमें स्कोर नींद, एक्सरसाइज, तनाव, खाना, कैफीन और मेडिटेशन से प्रभावित होता है, इससे यूजर को रिकवरी, स्ट्रेस और ओवरऑल फिजिकल कंडीशन समझने में मदद मिलेगी.खास बात यह है कि इस डिवाइस को 'Gravity Ageing Hypothesis' से जुड़ा भी बताया गया है. इस हाइपोथिसिस में कहा गया है कि गुरुत्वाकर्षण की वजह से दिल को दिमाग तक खून पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और लंबे समय में यही प्रक्रिया एजिंग में योगदान दे सकती है. हालांकि गोयल खुद भी मान चुके हैं कि यह एक स्थापित थ्योरी नहीं, बल्कि एक ओपन साइंटिफिक सवाल है.
डॉक्टरों की आपत्ति
दीपिंदर गोयल की इस डिवाइस पर डॉक्टरों ने आपत्ति जताई है. मशहूर हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. सायरियाक एबी फिलिप्स का दावा है कि उनका कहना है कि टेंपल का सेंसर Superficial Temporal Artery के ऊपर बैठता है, यह धमनी खोपड़ी के बाहर होती है और चेहरे व स्कैल्प को खून पहुंचाती है, दिमाग को नहीं पहुंचाती है. दिमाग को खून मुख्य रूप से Internal Carotid और Vertebral Artery से मिलता है। इसलिए कनपटी के बाहर की नस से लिया गया सिग्नल, दिमाग के अंदर के रक्त प्रवाह को नहीं बता सकता. डॉ. फिलिप्स का कहना है कि डिवाइस सिर्फ चेहरे और स्कैल्प के पास ब्लड फ्लो और फ्लशिंग को पकड़ सकती है, उसका दिमाग से कोई सीधा लेना-देना नहीं .
इसके अलावा कंपनी ने दावा किया है कि एक सितंबर की स्टडी में 23 स्वस्थ लोगों पर टेंपल की रीडिंग की तुलना Transcranial Doppler से की गई है. जो दिमाग की बड़ी धमनियों में ब्लड फ्लो वेलोसिटी मापने की अल्ट्रासाउंड तकनीक है. लेकिन डॉक्टरों ने इस पर भी आपत्ति जताई है. कोरिलेशन का मतलब सीधा मेजरमेंट नहीं होता। यह स्टडी दिमाग के अंदर एब्सोल्यूट ब्लड फ्लो को साबित नहीं करती.
Also, just to be clear because I am seeing a lot of "give me clinical evidence". Temple is a fitness tracker, and wellness device. We are not a medical device. If at some point, we clinically validate any of our metrics, we will let you know.
— Deepinder Goyal (@deepigoyal) November 5, 2026
दीपिंदर गोयल ने भी दिया जवाब
डॉक्टरों के सवालों और चर्चा में आए अपने डिवाइस को लेकर अब दीपिंदर गोयल की तरफ से भी जवाब आ गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा इस डिवाइस को बनाने में करीब 30 मिलियन डॉलर यानि 265 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, जिसमें उन्होंने 20 मिलियन अपनी जेब से जाने का जिक्र किया है. उनका तर्क था कि अगर यह स्कैम होता, तो यूजर कुछ ही दिन में पकड़ लेते, कंपनी 14 दिन की नो-क्वेश्चन रिटर्न पॉलिसी दे रही है, जो भारत में एप्पल भी नहीं देता. इसके साथ उन्होंने यह भी कहा है कि यह कोई मेडिकल डिवाइस नहीं है, जो किसी रोग को ठीक करती हो, यह केवल फिटनेस और वेलनेस वियरेबल है.
डॉक्टरों के सवाल और दीपिंदर गोयल के जवाब के बीच यह अनोखी डिवाइस फिलहाल चर्चा में बनी हुई है. डॉक्टरों का मानना है कि 85 हजार रुपए खर्च करने के बाद आम लोगों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि वह कोई हेल्थ एक्सपेरिमेंट ले रहे हैं. यह कोई जीवन रक्षक उपकरण नहीं है. वहीं दीपिंदर गोयल भी यह कह चुके है कि यह कोई मेडिकल डिवाइस नहीं है. फिलहाल इस डिवाइस की प्री ऑर्डर बुकिंग शुरू हो चुकी है, यह मार्केट में आने वाला है.
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