छोटे बच्चों की अच्छी सेहत के लिए माता-पिता अक्सर उन्हें हर तरह का न्यूट्रिशियस फूड खिलाने की कोशिश करते हैं. लेकिन कई बार अनजाने में ऐसी चीजें भी दे देते हैं. जो उनकी उम्र के हिसाब से सेफ नहीं होतीं. खासकर 2 साल से कम उम्र के बच्चों का डाइजेस्टिव सिस्टम और किडनी पूरी तरह डेवलप नहीं होते, इसलिए उनके खाने को लेकर एक्स्ट्रा प्रिकॉशन जरूरी होते हैं. चलिए जानते हैं ऐसी कुछ चीजों के बारे में जिन्हें 2 साल से छोटे बच्चों को देने से बचना चाहिए. इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में भी एक्सपर्ट ने ऐसी ही जानकारी शेयर की है.
नमक (Salt)
एक्सपर्ट के मुताबिक, छोटे बच्चों के भोजन में ज्यादा नमक नहीं मिलाना चाहिए. इस उम्र में उनकी किडनी पूरी तरह डेवलप नहीं होती और ज्यादा सोडियम को सही तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाती. यही वजह है कि डॉक्टर भी बच्चों को घर का हल्का और कम नमक वाला खाना देने की सलाह देते हैं.
चीनी (Sugar)
2 साल से छोटे बच्चों को एक्स्ट्रा चीनी देने से बचना चाहिए. ज्यादा मीठा खाने से दांतों में सड़न का खतरा बढ़ सकता है. साथ ही बच्चे फल, सब्जियां और दूसरे जरूरी खानों की बजाय मीठी चीजों की आदत डाल सकते हैं.
गाय का दूध (Cow's Milk)
एक साल से कम उम्र के बच्चों को गाय का दूध नहीं देना चाहिए. एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे आयरन की कमी और कुछ मामलों में पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. वहीं 1 से 2 साल की उम्र के बच्चों को भी सीमित मात्रा में ही गाय का दूध देना चाहिए. पूरे दिन में लगभग 500 मिलीलीटर से ज्यादा दूध देने से बचने की सलाह दी जाती है.
शहद (Honey)
शहद को सेहतमंद माना जाता है. लेकिन एक साल से छोटे बच्चों के लिए ये सेफ नहीं है. इसमें मौजूद कुछ बैक्टीरिया न्यू बॉर्न में बोटुलिज्म जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं. इसलिए बच्चे के एक साल का होने तक शहद देने से बचें.
साबुत मेवे (Whole Nuts)
बादाम, काजू, मूंगफली या दूसरे साबुत मेवे छोटे बच्चों के गले में फंस सकते हैं. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को साबुत मेवे न दें. अगर देना हो तो उन्हें पीसकर या पाउडर बनाकर ही खिलाएं.
प्रोसेस्ड और जंक फूड (Processed Foods)
चिप्स, बिस्कुट, पैकेट वाले स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे प्रोसेस्ड फूड में नमक, चीनी और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा ज्यादा होती है. ये बच्चों की ग्रोथ और हेल्थ पर बुरा असर डाल सकते हैं. इसलिए जितना संभव हो, बच्चों को ताजा और घर का बना भोजन ही दें.
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