अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि अगर उनका बच्चा तीन-चार साल की उम्र में ABCD, 123 या पोएम्स याद कर लेता है, तो वह दूसरों से आगे निकल जाएगा. लेकिन इस उम्र में बच्चों की केवल किताबों की पढ़ाई पर ध्यान देना काफी नहीं है. उन्हें इस उम्र में कई और चीजें सिखानी चाहिए. जानें ऐसी चीजों के बारे में.
1. खेल-खेल में ये सिखाएं
छोटे बच्चों का दिमाग खेल के माध्यम से सबसे तेजी से सीखता है. जब बच्चा ब्लॉक्स जोड़ता है, रंग भरता है, मिट्टी से आकृतियां बनाता है या दोस्तों के साथ खेलता है, तब वह केवल मनोरंजन नहीं कर रहा होता, बल्कि कई महत्वपूर्ण जीवन कौशल भी सीख रहा होता है. इससे उसकी रचनात्मक सोच, कल्पनाशक्ति विकसित होती है.
2. भावनात्मक विकास के लिए ये करें
इस उम्र में बच्चे धीरे-धीरे अपनी भावनाओं को पहचानना और व्यक्त करना सीखते हैं. अगर उन्हें गुस्सा, डर, खुशी या दुख जैसी भावनाओं को समझने और व्यक्त करने का अवसर मिलता है, तो भविष्य में उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है. इसलिए माता-पिता बच्चों से खूब बात करें, उनकी बातें ध्यान से सुनें और उन्हें यह महसूस कराएं कि उनकी भावनाएं महत्वपूर्ण हैं.
3. सामाजिक कौशल ऐसे सीखेंगे
स्कूल शुरू होने के साथ बच्चे दूसरे बच्चों के साथ समय बिताने लगते हैं. ऐसे में उन्हें शेयरिंग करना, अपनी बारी का इंतजार करना, सहयोग करना और दूसरों का सम्मान करना सीखना जरूरी होता है. ये छोटी-छोटी आदतें आगे चलकर टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता और अच्छे रिश्ते बनाने में मदद करती हैं.
4. जो पूछना है पूछने दें, टोके नहीं
3 से 6 साल की उम्र में बच्चे हर चीज के बारे में सवाल पूछते हैं जैसे आसमान नीला क्यों है, बारिश कैसे होती है, पेड़ क्यों बढ़ते हैं आदि. कई बार माता-पिता इन सवालों से परेशान हो जाते हैं, लेकिन यही जिज्ञासा बच्चे के बौद्धिक विकास का आधार होती है. बच्चों के सवालों का धैर्यपूर्वक जवाब दें और अगर उत्तर न पता हो तो उनके साथ मिलकर खोजने की कोशिश करें.
5. खूब खेलने दें
बच्चों का शरीर इसी उम्र में तेजी से विकसित होता है. रोजाना कुछ समय इन गतिविधियों के लिए जरूर निकालें-
- दौड़ना
- कूदना
- साइकिल चलाना
- गेंद से खेलना
- डांस करना
- योग और स्ट्रेचिंग
इससे उनकी हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं, संतुलन बेहतर होता है और मोटापा जैसी समस्याओं का खतरा भी कम रहता है.
6. स्क्रीन टाइम सीमित रखें
मोबाइल, टैबलेट और टीवी बच्चों का ध्यान जल्दी आकर्षित करते हैं, लेकिन अधिक स्क्रीन टाइम उनके मस्तिष्क, आंखों और व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल सकता है. इसलिए छोटे बच्चों को स्क्रीन के बजाय वास्तविक गतिविधियों, परिवार के साथ समय और रचनात्मक खेलों में अधिक शामिल किया जाए.
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