मानसून के दौरान, मकसद स्किन से सारा तेल हटाना नहीं, बल्कि मौसम के हिसाब से ढलते हुए स्किन की सुरक्षा करने वाली परत (बैरियर) को बनाए रखना है. इसलिए, सिर्फ़ बार-बार या ज़रूरत से ज़्यादा क्लींज़िंग न करें क्योंकि नमी और पूरे मानसून सीज़न के दौरान आपको स्किन चिपचिपी, तैलीय और असहज महसूस होती है. ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज़ हुसैन कहती हैं मैं हल्के तरीके से देखभाल और सही क्लींज़िंग व स्किनकेयर रूटीन अपनाने की सलाह देती हूं, जिससे आपको स्किन बैरियर की समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी.
नमी का मतलब यह नहीं है कि आपकी स्किन को ज़्यादा क्लींज़िंग की ज़रूरत है-
मानसून के मौसम में अक्सर बहुत ज़्यादा पसीना, सीबम और माइक्रोऑर्गेनिज्म स्किन की सतह पर जमा हो जाते हैं. हालांकि क्लींज़िंग ज़रूरी है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा क्लींज़िंग स्किन की सुरक्षा करने वाली परतों को नुकसान पहुंचा सकती है.
नमी का स्किन पर क्या असर पड़ता है-
- नमी के कारण स्किन ऑयली महसूस होती है.
- चेहरे को बार-बार तेज़ असर वाले क्लींज़र से धोया जाता है.
- प्राकृतिक सुरक्षात्मक तेल निकल जाते हैं.
- इसके जवाब में स्किन और ज़्यादा सीबम बनाती है.
- नतीजतन, लगातार चिपचिपाहट, डिहाइड्रेशन और जलन बनी रहती है.

बारिश में कैसे रखें स्किन का ख्याल.Photo Credit: Pexels
क्या है बैरियर की समस्या -
- आयुर्वेद का नज़रिया- स्किन संतुलन से बेहतर रहती है, न कि अति करने से
- आपकी स्किन एक जीवित अंग है जो शरीर के अंदरूनी संतुलन को दर्शाती है. मानसून को ऐसा मौसम माना जाता है जिसमें पाचन शक्ति स्वाभाविक रूप से कमज़ोर हो जाती है और कफ के गुण जैसे भारीपन, नमी और सुस्ती ज़्यादा हावी हो जाते हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि जब शरीर बाहरी तौर पर ज़्यादा नमी महसूस करता है, तो इसका समाधान तेज़ क्लींज़िंग नहीं, बल्कि हल्की और सहायक देखभाल के ज़रिए संतुलन बहाल करना है.
मौसम में इन बदलावों से ये समस्याएं हो सकती हैं-
- स्किन पर तेल का बढ़ना.
- भारीपन और बंद-बंद सा महसूस होना.
- प्राकृतिक चमक और ताज़गी का खो जाना.
- पर्यावरण की अशुद्धियों के प्रति ज़्यादा संवेदनशीलता.
ज़रूरत से ज़्यादा क्लींज़िंग करने से क्या होता है-
हेल्दी स्किन का मतलब है नमी का बैलेंस लेवल बनाए रखना, न कि ऑयली होना, साथ ही स्किन में कोई गड़बड़ी न होना और एक हेल्दी स्किन बैरियर होना जो स्किन को बाहरी खतरों से बचाता है.
- स्किन के सुरक्षात्मक माइक्रोबायोम का बैलेंस बिगड़ना.
- नमी वाले मौसम के बावजूद खिंचाव महसूस होना.
- प्रतिक्रिया के तौर पर और ज़्यादा तेल का बनना.
- इससे स्किन में जलन या परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है.
ये सभी संकेत बताते हैं कि स्किन की नैचुरल अवस्था को सहारा देने के बजाय उसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है.
स्किन बैरियर को बनाएं रखने के लिए क्या करें-
ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज़ हुसैन कहती हैं कि बार-बार तेल हटाने की पूरी कोशिश करने के बजाय, मैं हमेशा स्किन की नैचुरल और हेल्दी अवस्था को बनाए रखने की सलाह देती हूं.
स्किन को साफ करने के क्या है सही तरीका-
याद रखें कि क्लींजिंग का मकसद गंदगी हटाना है न कि तेल का नामो-निशान मिटा देना. एक बैलेंस्ड क्लींजिंग रूटीन स्किन की सुरक्षा परत को बनाए रखने में मदद करता है और साथ ही पसीने और प्रदूषण को भी कंट्रोल में रखता है.
मौसम के हिसाब से हाइड्रेशन करें-
ह्यूमिड मौसम में भी स्किन को हाइड्रेशन की ज़रूरत होती है. ऐसी क्रीम, सीरम या मॉइस्चराइज़र चुनें जो आयुर्वेद पर बेस्ड हों और आपकी स्किन के प्रकार के अनुकूल हों. इनका फ़ॉर्मूला हल्का होना चाहिए और इनमें नैचुरल चीज़ें होनी चाहिए.
स्किन को अंदर से कैसे हेल्दी रखें-
आयुर्वेद स्किन की सेहत के लिए पाचन को सबसे ज़रूरी मानता है. मॉनसून के दौरान, कमज़ोर पाचन शक्ति स्किन को मिलने वाले पोषण की क्वालिटी पर असर डाल सकती है.
- गरम और ताज़ा बना हुआ खाना खाएं.
- शरीर में पानी की कमी न होने दें.
- बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड और ऑयली खाने से बचें.
- पाचन को बैलेंस रखने के लिए खाना खाने का समय तय रखें.
स्किन को आराम कैसे दें-
शहनाज़ हुसैन कहती हैं कि मॉनसून में स्किन से जुड़ी हर समस्या के लिए किसी नए एक्टिव इंग्रीडिएंट की ज़रूरत नहीं होती. मैं हमेशा सलाह देती हूं कि आपका स्किनकेयर रूटीन आसान होना चाहिए, जिसमें कम प्रोडक्ट्स और कम मेकअप का इस्तेमाल हो.
आसान स्किनकेयर रूटीन.
- कम मेकअप.
- दिन में दो बार हल्के हाथों से साफ़-सफ़ाई.
- लगातार हाइड्रेशन.
- सोने से पहले मेकअप हटाना.
- पूरी नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट.
मॉनसून स्किनकेयर के नज़रिए में बदलाव-
तेल के हर निशान से लड़ने के बजाय, ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि स्किन की खुद की सुरक्षा करने, रिपेयर करने और खुद को नया बनाने की क्षमता को कैसे सहारा दिया जाए.
एक्सपर्ट शॉर्ट बायो :
शहनाज हुसैन भारत की सबसे प्रतिष्ठित ब्यूटी और वेलनेस उद्यमियों में से एक हैं, जिन्होंने 5,000 वर्ष पुरानी भारतीय आयुर्वेदिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है. वह आयुर्वेदिक ब्यूटी केयर आंदोलन की पायनियर मानी जाती हैं और पिछले पांच दशकों से भारतीय हर्बल सौंदर्य चिकित्सा को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने में अग्रणी रही हैं.
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