Sarvangasana Yoga Karne Ke Fayde: क्या आप पाचन संबंधी परेशानियों जैसे कब्ज, अपच या हार्मोनल असंतुलन से जूझ रहे हैं? भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, सर्वांगासन या शोल्डर स्टैंड एक ऐसा मजबूत योगासन है, जो हार्मोन को बैलेंस करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में बेहद प्रभावी साबित हो सकता है.
सर्वांगासन करने के फायदे- (Benefits of doing Sarvangasana)
यह आसन शरीर के सभी अंगों को लाभ पहुंचाता है. सर्वांगासन के नियमित अभ्यास से थायरॉइड और पैराथायरॉइड ग्रंथियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. ये ग्रंथियां हार्मोन उत्पादन को नियंत्रित करती हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म सुधरता है और हार्मोनल बैलेंस बना रहता है. महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता में भी राहत मिलती है. साथ ही, इस आसन से पेट के अंगों जैसे पेट, आंतें, लिवर और पैंक्रियास पर हल्का दबाव पड़ता है, जो पाचन क्रिया को सक्रिय करता है. कब्ज, ब्लोटिंग और अपच जैसी आम समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है, तनाव कम करता है और सेहत को बढ़ावा देता है. नियमित अभ्यास से थकान दूर होती है, ऊर्जा बढ़ती है और वजन नियंत्रण में भी मदद मिल सकती है.
क्या सर्वांगासन करने से पाचन बेहतर होता है- (Is Sarvangasana Best For Digestion)
आयुष मंत्रालय के दिशा निर्देशों में सर्वांगासन को पाचन सुधारने और एंडोक्राइन सिस्टम को सपोर्ट करने वाला आसन बताया गया है.

सर्वांगासन करने का सही तरीका- (Best Ways To Do Sarvangasana)
योग एक्सपर्ट बताते हैं कि सर्वांगासन के अभ्यास के लिए सबसे पहले मैट पर पीठ के बल लेट जाएं. हाथों को शरीर के बगल में रखें और हथेलियां नीचे की ओर हों. सांस अंदर लेते हुए दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं. इस दौरान घुटनों को सीधा रखें व पैरों, नितंबों और पीठ को और ऊपर उठाते हुए कंधों पर शरीर का भार लाएं. ठोड़ी को छाती से लगाएं. दोनों हाथों से पीठ को सहारा दें. कोहनियां जमीन पर टिकी रहें. शरीर को सीधा खड़ा रखें, पैर ऊपर की ओर सीधे हों.
इस स्थिति में 10 से 30 सेकंड तक बिना दबाव डाले रहें. शुरुआती लोग 10 सेकंड से शुरू करें. इस दौरान गहरी और सामान्य सांस लेते रहें. धीरे-धीरे वापस की मुद्रा में आएं.
सर्वांगासन के अभ्यास से एक-दो नहीं बल्कि कई लाभ मिलते हैं हालांकि, एक्सपर्ट कुछ सावधानियां बरतने की सलाह भी देते हैं. गर्दन की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था में डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से ही अभ्यास करें. खाली पेट अभ्यास करें.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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