आक के पौधों का इस्तेमाल कई सालों से आयुर्वेदिक औषधी के रूप में किया जाता है. आज भी कई लोग इसकी पत्तियों का इस्तेमाल स्वास्थ्य संबंधी विकारों को दूर करने के लिए करते हैं. इंस्टाग्राम पर van_vidya नाम के एक यूजर ने आक के पत्तों से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां शेयर कीं. उनका कहना है कि इसके पत्तों और दूध (सफेद लेटेक्स) के इस्तेमाल से जोड़ों के दर्द, मस्सों, पिंपल्स, शुगर, फंगल इंफेक्शन और यहां तक कि ट्रैवल के दौरान फील होने वाली उल्टी जैसी परेशानी को भी कम करने में प्रभावी हो सकता है. यहां जानते हैं अलग-अलग परेशानियों में कैसे आक किन-किन परेशानियों में फायदेमंद है और साइंस क्या कहता है?
जोड़ों के दर्द में आक का पत्ता
अगर आपको जोड़ों में दर्द की शिकायत रहती है, तो आक के पत्तों पर हल्दी लगाकर तवे पर थोड़ा सा तेल डालकर इसे हल्का गर्म करें. इसके बाद इसे दर्द वाले जोड़ पर बांध लें. ऐसा कहा जाता है कि इससे सूजन और दर्द में राहत मिल सकती है.
मस्सों को हटाने के लिए कैसे इस्तेमाल करें?
चेहरे से लेकर स्किन के किसी भी हिस्से में मस्सा का शिकायत है, तो इसके दूध की एक छोटी बूंद मस्से पर लदाएं. नियमित रूप से इस दूध को लगाने से मस्सा धीरे-धीरे सूखकर गिर सकता है. इसके पीछे कारण ये माना जाता है कि इसके दूध में मौजूद कुछ तीव्र केमिकल स्किन की ऊपरी परत को प्रभावित करते हैं.
पिंपल्स से भी छुटकारा
कुछ लोग आक के पत्तों या उसके दूध का इस्तेमाल पिंपल्स और फंगल इंफेक्शन में भी करते हैं. पिंपल्स की परेशानी को दूर करने के लिए आक के दूध में थोड़ा सा हल्दी मिलाकर इसे प्रभावित हिस्से पर लगाएं. इससे पिंपल्स की परेशानी दूर हो सकती है.
ट्रैवल के दौरान उल्टी की समस्या
ट्रैवल करते समय अगर आपको उल्टी या मतली जैसा फील होता है, तो आक के पत्तों का इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है. इसके लिए पत्तों को तलवों पर बांध लें और फिर शॉक्स या फिर जूते पहन लें. ऐसा करने से आपको उल्टी जैसा फील नहीं होगा.
डायबिटीज में भी है फायदेमंद
इंस्टा यूजर ने बताया कि आक के पत्तों को अगर आप लगातार कुछ दिनों तक तलवों में बांधते हैं, तो इससे शुगर को भी कंट्रोल किया जा सकता है. हालांकि, इस बात का ध्यान रखें किअभी तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, जो इसे डायबिटीज के इलाज या कंट्रोल करने में प्रभावी मानता है.
आक के पत्तों के बारे में साइंस क्या कहता है?
साइंस के मुताबिक, आक के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो दर्द और सूजन को कम करने में प्रभावी हो सकते हैं. इसका बाहरी रूप से इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है. हालांकि, इंटरनल यूज न करने की सलाह दी जाती है. दरअसल, इसका दूध (लेटेक्स) जहरीला हो सकता है और आंखों या शरीर के अंदर जाने पर नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए सावधानी जरूरी है.
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