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फीफा विश्व कप 2026 में गर्मी का खतरा, खिलाड़ियों के परफॉर्मेंस पर पड़ेगा असर

क्लाइमेट सेंट्रल के एक नए विश्लेषण से पता चला है कि टूर्नामेंट के तय 104 मैचों में से 97 मैचों के दौरान तापमान 28 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा रहने की संभावना है.

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FIFA वर्ल्ड कप 2026: इन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर

FIFA वर्ल्ड कप 2026 टूर्नामेंट इतिहास में सबसे ज्यादा गर्मी वाले हालात में खेला जाने की उम्मीद जताई गई है. क्लाइमेट चेंज की वजह से लगभग हर मैच में ऐसी गर्मी का खतरा बढ़ गया है जिससे खिलाड़ियों के परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इसे लेकर नई चेतावनियां भी दी हैं. 'क्लाइमेट सेंट्रल' की एक नई स्टडी में पाया गया है कि टूर्नामेंट के तय 104 मैचों में से 97 मैचों में तापमान 28 डिग्री सेल्सियस (82.4 डिग्री फारेनहाइट) से ज़्यादा रहने की संभावना है. रिसर्चर्स ने चेतावनी दी है कि बढ़ती गर्मी से खेल धीमा हो सकता है, खेलने के तरीके बदल सकते हैं और खिलाड़ियों की सेहत पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. लगभग आधे मैचों में ऐसी गर्मी होने की कम से कम 50% संभावना है जिससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ेगा.

26 मैचों में, जलवायु परिवर्तन के कारण इस संभावना में कम से कम 10 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी पाई जा सकती है. विश्लेषण के अनुसार, सबसे ज्यादा असर 26 जून को ग्वाडलहारा में उरुग्वे और स्पेन के बीच होने वाले ग्रुप-स्टेज मैच के दौरान पड़ने की उम्मीद है. यहां प्रदर्शन पर असर डालने वाली गर्मी की संभावना बढ़कर 70% हो गई है. जो जलवायु परिवर्तन के कारण 37 प्रतिशत अंक ज्यादा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि 28 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान स्प्रिंटिंग, कुल तय की गई दूरी और रिकवरी रेट को कम कर सकता है, जिससे मैचों की गति और तीव्रता पर असर पड़ता है.

नॉर्वे के मिडफील्डर मोर्टन थोरस्बी ने कहा, "यह विश्लेषण साफ़ करता है कि बढ़ता तापमान न केवल खिलाड़ियों और प्रशंसकों के लिए स्वास्थ्य का गंभीर जोखिम है, बल्कि यह खेल की गुणवत्ता पर भी असर डालने लगा है." "जब गर्मी स्प्रिंटिंग, रिकवरी और कुल तीव्रता पर असर डालती है, तो इससे फुटबॉल खेलने का तरीका बदल जाता है." ये नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब स्वास्थ्य, जलवायु और खेल-प्रदर्शन के विशेषज्ञ FIFA पर टूर्नामेंट से पहले गर्मी से सुरक्षा के उपायों को मज़बूत करने का दबाव बढ़ा रहे हैं. यह टूर्नामेंट अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में आयोजित किया जाएगा.

प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा हस्ताक्षरित एक खुले पत्र में तर्क दिया गया है कि FIFA की गर्मी से जुड़ी मौजूदा गाइडलाइंस अपर्याप्त हैं. साथ ही, इसमें चेतावनी दी गई है कि कुछ मेज़बान शहरों में एथलेटिक प्रतियोगिताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत उच्च-जोखिम सीमा से ज्यादा तापमान हो सकता है.

पोर्ट्समाउथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइक टिप्टन ने कहा, "28 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा तापमान में खेलने से खेल बदल जाता है - इससे रणनीति, गति और कुल गुणवत्ता पर असर पड़ता है." "जैसे-जैसे तापमान और बढ़ता है, जोखिम भी बढ़ते जाते हैं." विशेषज्ञों ने तेल कंपनी अरामको के साथ FIFA के प्रायोजन संबंधों की भी आलोचना की.

उन्होंने जीवाश्म ईंधन के प्रचार को खिलाड़ियों के कल्याण के मामले में "हितों का टकराव" (conflict of interest) बताया, क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की लहरें (heatwaves) ज़्यादा बार और ज़्यादा तेज़ हो रही हैं. क्लाइमेट सेंट्रल के मौसम विज्ञानी शेल विंकली ने कहा कि गर्म होती धरती के कारण इस खेल का स्वरूप पहले ही बदल रहा है.विंकली ने कहा, "पहले जैसे वर्ल्ड कप अब दोबारा नहीं होंगे - इसलिए नहीं कि खिलाड़ी बदल गए हैं, बल्कि इसलिए कि धरती बदल गई है." 48 टीमों और 16 शहरों में फैले 2026 के टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे बड़ा वर्ल्ड कप होने की उम्मीद है - और आलोचकों के अनुसार, यह जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के प्रति सबसे ज़्यादा संवेदनशील टूर्नामेंटों में से एक होगा.

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