पिता की मौत, मां दिहाड़ी मजदूर, भाई लकवे का शिकार... फिर भी गुदड़ी के लाल ने वो कमाल दिखाया, जो कल्पना से परे है. कहानी भारत की अंडर-17 महिला फुटबॉल खिलाड़ी दिव्यानी लिंडा की है. दिव्यानी लिंडा रांची की रहने वाली है. बीते दिनों दिव्यानी ने मीडिया से बातचीत में अपने घर की चिंता जताई थी. रांची शहर से लगभग 28 किलोमीटर दूर ओरमांझी थाना क्षेत्र के चंद्रा गांव में उनका घर इस कदर जर्जर है कि कभी भी गिर सकता था. अधकच्ची दीवारें और एस्बेस्टस की छत वाली दिव्यानी के घर की दीवारों पर मेडल और ट्रॉफी की कतार नजर आती है. गुरुवार को केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने भारत की U-17 महिला फुटबॉल खिलाड़ी दिव्यानी लिंडा के परिवार से मुलाक़ात की और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया.
दिव्यानी हमारा गौरव, विकसित भारत की ब्रांड एंबेसडरः संजय सेठ
इस दौरान संजय सेठ ने कहा, "दिव्यानी हमारा गौरव है... उसकी छोटी सी झोपड़ी में दुनिया भर से जीते हुए 50 से ज़्यादा ट्रॉफ़ियाँ और मेडल रखे हैं... वह 'विकसित भारत' की ब्रांड एंबेसडर है... उसकी मां दिहाड़ी मज़दूर है... और उसका भाई कमर के नीचे से लकवे का शिकार है. हम AIIMS में उसके इलाज का इंतजाम करवा रहे हैं.
दिव्यानी के पिता का चार साल पहले निधन हो गया था. दिव्यानी का लक्ष्य 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 के ओलंपिक्स होने चाहिए. दिव्यानी और उसके परिवार की भलाई का ध्यान रखना हमारी सामाजिक ज़िम्मेदारी है, ताकि वह पूरी तरह अपने खेल पर ध्यान दे सके और भारत का नाम रोशन कर सके.
#WATCH | Ranchi, Jharkhand: Union Minister Sanjay Seth visits the family of Divyani Linda, an India U-17 women's football player, and assures support. He says, “She is our pride…in the small hut, there are over 50 trophies and medals from across the world…she is the brand… pic.twitter.com/3jkG6FHQE0
— ANI (@ANI) May 28, 2026
मंत्री बोले- दुर्गा पूजा से पहले बनवा देंगे दिव्यानी का घर
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि हम दिव्यानी और उसकी जैसी दूसरी लड़कियों के लिए गांव में ही खेल के मैदान बनवा रहे हैं. PM मोदी हमेशा कहते हैं कि हर खिलाड़ी को मेडल जीतने पर ध्यान देना चाहिए, और यह तभी मुमकिन है जब हम उन्हें आगे बढ़ने में मदद करें. हम दुर्गा पूजा से पहले उसके लिए एक घर बनवा देंगे और उसकी प्रैक्टिस के लिए एक खेल का मैदान भी तैयार करवाएँगे."
#WATCH | Ranchi, Jharkhand: Union Minister Sanjay Seth visits the family of Divyani Linda, an India U-17 women's football player, and assures support. Mother of Linda, Pratima Devi, says, “I am a daily wage labourer. She has taken an interest in football since childhood. She… pic.twitter.com/m5vvK60oYh
— ANI (@ANI) May 28, 2026
परेशानी बताते-बताते दिव्यानी की मां के आखों में आ गए आंसू
केंद्रीय मंत्री के घर आने पर दिव्यानी की मां, प्रतिमा देवी ने कहा, “मैं रोज़ाना मजदूरी करने वाली एक मजदूर हूं. उसे बचपन से ही फ़ुटबॉल में दिलचस्पी रही है. वह सुबह 4 बजे उठकर खेलने जाती थी, फिर वापस आकर स्कूल जाती थी. मुझे हमेशा इस बात का डर रहता था कि कहीं उसे चोट न लग जाए, लेकिन वह बिल्कुल निडर थी. वह रूस, चीन, नेपाल, भूटान और कई दूसरी जगहों पर भी जा चुकी है. मुझे बहुत अच्छा लगता है कि वह खेल रही है और अपने लिए कुछ अच्छा कर रही है... उसके पिता का 4 साल पहले देहांत हो गया था, और मेरा सबसे छोटा बच्चा लकवे का शिकार है. पैसों की कमी की वजह से, हम उसका ठीक से इलाज नहीं करवा पाए हैं.” इस दौरान दिव्यानी की मां भावुक नजर आई.
तमाम मुश्किलों को पीछे छोड़ दिव्यानी ने पाया बड़ा मुकाम
मालूम हो कि दिव्यानी का घर रांची शहर से लगभग 28 किलोमीटर दूर ओरमांझी थाना क्षेत्र के चंद्रा गांव में है. पिता 4 साल पहले गुजर गए और मां मजदूरी की काम करती हैं. सुबह 4 बजे उठकर 5 किलोमीटर पैदल चलकर दिव्यानी फुटबॉल का प्रैक्टिस करने रोजाना जाया करती थीं. खराब सड़क, जलजमाव, कीचड़ जैसी दुश्वारियों के बाद भी दिव्यानी की मेहनत कभी नहीं डगमगाई. इन्हीं संघर्षों के बीच उन्होंने खेल में एक मुकाम हासिल किया.
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