FIFA 2026 Review: मौजूदा वर्ल्ड कप 96 साल के इतिहास में पहली बार दुनिया के तीन देशों में खेला गया जहां पहली बार 48 टीमों के बीच सबसे ज़्यादा 104 मैच तय किए गए. 32 से 48 हुई टीमों संख्या बढ़ने से वर्ल्ड कप की क्वालिटी को लेकर सवाल उठाए जाते रहे. मगर मौजूदा वर्ल्ड कप में टीमों में फ़ासला कभी बहुत बड़ा नहीं दिखा. सिर्फ़ 5 लाख की आबादी वाले पश्चिमी अफ़्रीकी देश केप वेर्दे और 10 द्वीपों और डेढ़ लाख की आबादी वाले कुरासाओ ने सबको अपना लोहा मनवाने पर मजबूर कर दिया. जापान ने पांच बार के चैंपियन ब्राज़ील के ख़िलाफ़ पहला गोल दागकर एशियाई ताक़त का अंदाज़ा भी करवाया तो टूर्नामेंट के साथ विवादों भी चोली-दामन का साथ रहा.
छोटे नाम, बड़ा काम
जर्मनी ने कुरासाओ को ग्रुप मैच में 7-1 से हरा दिया और लगा कि टूर्नामेंट का रंग फीका ना पड़ जाए. मगर पहली बार वर्ल्ड कप खेल रहे छोटे से केरीबियाई देश कुरासाओ ने बाद में वापसी करते हुए इक्वाडोर को 0-0 की बराबरी पर रोककर अपना दम दिखा दिया. खुद चार बार की चैंपियन जर्मनी की टीम पराग्वे से राउंड ऑफ़ 32 में हारकर बाहर हो गई.

60,000% ज़्यादा हो गए फ़ैन्स!
5 लाख की आबादी वाले पश्चिमी अफ़्रीकी देश केप वेर्दे के लिए भी ये पहला वर्ल्ड कप रहा. मगर 40 साल के गोलकीपर वोज़िन्हा के सहारे ये टीम ग्रुप में पूर्व वर्ल्ड चैंपियन स्पेन, उरुग्वे और सऊदी अरब किसी से ग्रुप मैचों में नहीं हारी. केप वेर्दे आख़िरकार 3 बार के चैंपियन अर्जेन्टीना से राउंड ऑफ़ 32 में 2-3 से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हुई. केप वेर्दे की जीत का जश्न दुनिया भर के फ़ैन्स ने मनाया. वर्ल्ड कप से पहले उनके 40 साल के गोलकीपर वोज़िन्हा के इंस्टाग्राम पर 50 हज़ार फॉलोअर्स थे पहले ही कारनामा के बाद (पूर्व वर्ल्ड चैंपियन स्पेन से मैच ड्रॉ करवाने के बाद) 10 मिलियन और अब 60,000% की बढ़ोतरी कर करीब 30 मिलियन यानी 3 करोड़ हो गए हैं.
हालैंड और नॉर्वे की VIKING ROW
नॉर्वे ने चौथी बार क्या कमाल की वर्ल्ड कप में एंट्री मारी! वो भी 28 साल बाद. मगर इस बार ये टीम मैन-सिटी के सुपरस्टार स्ट्राइकर हालैंड और उनके फ़ैन्स की VIKING ROW पर सवार होकर आई. हालैंड ने गोलमशीन बनकर 6 मैचों में 7 गोल किये. हालैंड की टीम ने 5 बार के चैंपियन ब्राज़ील को प्री-क्वार्टरफ़ाइनल में हराकर उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया.
हालैंड का गोल करने के बाद योग करने के लिए मैदान पर बैठ जाना, उनके चलने का अंदाज़, फ़ैन्स से मिलने, भारतीय खाने को पसंदीदा बताना (बटर चिकन को हालैंड ने बताया पसंदीदा खाना) हिन्दुस्तानी फ़ुटबॉल फ़ैन्स का भी दिल जीत लिया.
एशिया का पावरहाउस जापान
पूर्व भारतीय फ़ुटबॉल खिलाड़ी और महिला टीम के कोच रहे अनादि बरुआ कहते हैं, “मुझे जापान का खेल सबसे ज़्यादा पसंद आया. वो बहुत निडर होकर खेले. अगले वर्ल्ड कप में वो और आगे जाएंगे.” जापान ने 1998 से शुरु कर लगातार 8वीं बार वर्ल्ड कप में एंट्री कर ली. इस बार जापान की टीम ने अपना दम भी दिखाया. ग्रुप में हॉलैंड और स्वीडन जैसी टीम के साथ मुक़ाबला बराबरी पर रखा और ट्यूनीशिया के ख़िलाफ़ जीत हासिल कर राउंड ऑफ़ 32 तक पहुंच गई.
ब्राज़ील के ख़िलाफ़ जापान ने पहला गोल भी दागा मगर आख़िरकार 1-2 से हार कर ये टीम टूर्नामेंट से बाहर हुई.
युद्ध के बीच ईरान की टीम अमेरिका में खेली
युद्ध की वजह से वर्ल्ड कप के लिए तैयारी की कमी, वीसा में मुश्किल, वर्ल्ड कप से पहले ट्रेनिंग में असुविधा और कई दफ़ा विरोध करते फ़ैन्स के शोर के बीच ईरान ने दमदार प्रदर्शन किया. ईरान वर्ल्ड कप में एक भी मैच नहीं हारा- बेल्जियम, ईजिप्ट या न्यूज़ीलैंड किसी से नहीं. इस टीम का सफ़र ग्रुप स्टेज पर ही ख़त्म हो गया मगर ये टीम ख़ासकर ईरानी टीम के करोड़ों फ़ैन्स का दिल जीतने में कामयाब रही.
गोलमशीन एमबाप्पे
टीम में आपसी कलह के बावजूद कोच डिडिए डुशांप और किलियान एमबाप्पे की टीम फ़्रांस को ख़िताब का सबसे मज़बूत दावेदार माना जा रहा था. ये टीम सिर्फ़ 2 अहम मैच में विपक्षी टीम स्पेन और इंग्लैंड से उन्नीस पड़ी और ख़िताबी रेस और पोडियम से फ़िसल गई.
मेसी मैजिक और कमाल के यामाल!
वर्ल्ड कप से पहले 39 साल के लियोनेल मेसी और 41 साल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो के फ़ैन्स के बीच GOAT की लड़ाई थी. डिपेंडिंग चैंपियन कप्तान मेसी ने एक बार फिर अपनी टीम को फ़ाइनल तक का सफ़र करवाया और सुर्ख़ियों में छाये रहे. अपना छठा वर्ल्ड कप खेल रहे मेसी ने फ़ाइनल से पहले गोल के लिए 34 अटेम्प्ट या कोशिशें कीं और एक हैट्रिक के साथ 8 गोल और 4 असिस्ट का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया.
स्पेन की ट्रिक- ला रोख़ा का गोलपोस्ट बना स्टील की दीवार
स्पेन की टीम की फ़ाइनल या ख़िताब के लिए दावेदारी बहुत कम एक्सपर्ट्स ने की थी. लेकिन कोच लुइस डे ला फ़ुएन्टे, कप्तान रॉड्रि, वंडरकिड लैमीन यामाल, ओयारज़ाबाल, मिकेल मरीनो, पेड्रो पॉर्रो, जोआन गार्सिया, डेविड राया और उनके ‘प्रोफ़ेसर' गोलकीपर उनाई सिमोन ने स्पेन को एक दुर्भेद्य किला बना दिया.
स्पेन की टीम ने फ़ाइनल से पहले 7 मैचों में 13 गोल किये और सिर्फ़ 1 गोल अपने ख़िलाफ़ होने दिया. स्पेन की टीम कभी टिकिटाका तो कभी अपने सॉलिड डिफेंस से दुनिया भर के फ़ुटबॉल फ़ैन्स का दिल जीतती रही.
मैदान में ट्रंप का जंप!
इन सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप सुर्ख़ियां बटोरकर ही रहे. टिकट की महंगाई, सोमालिया के रेफरी उमर अब्दुलकादिर आर्टन को वैध वीजा होने के बावजूद अमेरिका में एंट्री नहीं मिलना, ईरान के खेलने को लेकर बयानबाज़ी जैसे मुद्दों की वजह से राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर ख़बरें छायीं रहीं.
वर्ल्ड कप के इतिहास में ट्रंप ने अमेरिकी खिलाड़ी फोलारिन बैलोगुन के रेड कार्ड को लेकर प्रोटेस्ट कर दिया. यही नहीं मेज़बान टीम के राष्ट्रपति ट्रंप ने फ़ीफ़ा चीफ़ जियानि इन्फ़ैन्टिनो को फ़ोन कर फ़ैसले को ‘रीव्यू' करने को कहा. ट्रंप ने मैदान के फ़ैसलों को बदलने के लिए राजनीतिक कोशिश की मिसाल रखकर वर्ल्ड कप का ज़ायका बिगाड़ दिया.
1100 करोड़ से ज़्यादा व्यूअर्स
हमेशा की तरह तमाम विवादों के बावजूद जीत फ़ुटबॉल की हुई. सवा महीने के टूर्नामेंट में 48 टीमों के बीच मैच की सेंचुरी लगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप 2026 के पहले 96 मैचों ने कुल 11.53 बिलियन व्यूअर्स (1153 करोड़) जुटाए. इसमें लीगल स्ट्रीमिंग, पायरेसी और आउट-ऑफ-होम व्यूइंग सब शामिल हैं. ये आंकड़ा बिलाशक फ़ाइनल तक एक और बड़े रिकॉर्ड की ओर बढ़ रहा है।
पैसा ये पैसा! मालामाल होंगी टीमें- क्रिकेट वर्ल्ड चैंपियन से कितना ज़्यादा?
अब स्पेन और अर्जेन्टीना वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी के साथ 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर या 480 करोड़ रुपये की इनामी रकम के लिए फ़ाइनल मैच खेलेगी. वर्ल्ड कप में हिस्सा लेनेवाली सभी टीमों को फ़ीफ़ा से ढेर सारे पैसे मिलेंगे. टूर्नामेंट में 33वें से 48वें नंबर पर आनेवाली टीम को भी 9 मिलियन डॉलर या 86 करोड़ रुपये मिलेंगे.
क्रिकेट से इसकी तुलना करें तो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन को $3.6 million (क़रीब 35 करोड़ रुपये), वनडे वर्ल्ड चैंपियन को $2.24 million (22 करोड़ रुपये) और टी-20 वर्ल्ड चैंपियन को $2.45 million (क़रीब 24 करोड़) रुपये की इनामी रकम मिलती है.
बड़ी बात ये है कि फ़ीफ़ा अगले साल होनेवाले टूर्नामेंट के लिए कतर 2022 से 50% ज़्यादा मतलब 727 मिलियन डॉलर यानी क़रीब 7000 करोड़ रुपये अपने सदस्य फ़ुटबॉल संघों में बांटेगा. यानी दुनिया के सभी देशों के लिए अपने फ़ुटबॉल का लेवल को बढ़ाने और नाम के साथ मालामाल होने के मौक़े के लिए ये एक खूबसूरत और लुभावना संदेश भी है.
फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप की प्राइज़-मनी
• चैंपियन: 50 मिलियन डॉलर
• उपविजेता: 33 मिलियन डॉलर
• तीसरे नंबर की टीम: 29 मिलियन डॉलर
• चौथे नंबर की टीम: 27 मिलियन डॉलर
• 5वें- 8वें नंबर की टीम: 19 मिलियन डॉलर
• 9वें- 16वें नंबर की टीम: 15 मिलियन डॉलर
• 17वें- 32वें नंबर की टीम: 11 मिलियन डॉलर
• 33वें-48वें नंबर की टीम: 9 मिलियन डॉलर
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