भारत में खाने-पीने की इतनी वैरायटी है कि आप गिनते-गिनते थक जाएंगे. यहां हर मौसम की अपनी एक खास सब्जी है. आपको बता दें कि भारत के अलग-अलग कोनों में ऐसी-ऐसी अनोखी चीजें उगती हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. आज हम आपको एक ऐसी ही बेहद रहस्यमयी और अनोखी सब्जी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे शाकाहारियों का मटन (Veg Mutton) कहा जाता है. मार्केट में इसकी कीमत ₹1000 से लेकर ₹1200 प्रति किलो तक होती है. इस जादुई सब्जी का नाम है कटरुआ.
कटरुआ सब्जी की खेती नहीं की जाती-
कटरुआ की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसे खेतों में बोया नहीं जाता. यह पूरी तरह से कुदरती यानी प्राकृतिक रूप से उगती है. उत्तर प्रदेश के बलिया में दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों और झारखंड के कुछ खास इलाकों में यह सब्जी पाई जाती है. स्थानीय लोगों का मानना है कि जब मानसून के मौसम में आसमान में तेज बिजली कड़कती है, तब यह सब्जी अपने आप मिट्टी फाड़कर बाहर निकल आती है. यह प्रकृति का एक ऐसा अनोखा तोहफा है, जिसका इंतजार लोग पूरे साल करते हैं.

कटरुआ सब्जी को बनाने का अलग तरीका होता है. (Image @PreetiVegKitchen)
साल में सिर्फ एक बार मिलता है यह मौका-
अगर आप सोच रहे हैं कि यह सब्जी कभी भी मिल जाएगी, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. कटरुआ साल में सिर्फ एक बार, वो भी बरसात के मौसम में ही देखने को मिलती है. यह दो तरह की होती है सफेद कटरुआ और काला कटरुआ. देखने में यह छोटे-छोटे आलू या गोल मखाने जैसी लगती है.
क्यों कहते हैं इसे शाकाहारियों का मटन?
इस सब्जी को सिर्फ इसके स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि इसके बेमिसाल फायदों के लिए भी पसंद किया जाता है. कटरुआ में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और कई तरह के जरूरी खनिज तत्व (Minerals) पाए जाते हैं, जो लोग शाकाहारी हैं और अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए यह सब्जी किसी वरदान से कम नहीं है. सेहत के लिहाज से यह शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है और मानसून में होने वाली कई बीमारियों से बचाती है.
कैसे बनाई जाती है कटरुआ की लाजवाब सब्जी?
कटरुआ को बनाने का तरीका काफी अलग है. मिट्टी साफ करने के बाद इसे करीब 10 मिनट के लिए पानी में उबाला जाता है. ताकि इसकी मिट्टी की महक पूरी तरह निकल जाए. इसके बाद सरसों के तेल में खड़े गरम मसाले, प्याज, लहसुन और टमाटर का पेस्ट भूनकर मसाला तैयार किया जाता है. खास बात यह है कि इस सब्जी का असली स्वाद तब आता है जब इसमें मीट मसाला और गरम मसाला मिलाकर पकाया जाता है. इसे साबुत बनाने पर इसका स्वाद दोगुना हो जाता है. पकने के बाद यह बिल्कुल मखाने की गाढ़ी सब्जी जैसी दिखती है. इसे आप गरमा-गरम रोटी या चावल के साथ खा सकते हैं.
यहां देखें पूरी रेसिपी-
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