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रम नहीं है तो फिर क्या है Old Monk, 1855 से शुरू हुआ था दिलचस्प किस्सा, ब्रिटिश फौजियों के लिए सस्ती बीयर बनाता था मालिक

Old Monk सिर्फ एक रम नहीं, एक पूरी कहानी है. जानिए कैसे 1954 में शुरू हुई इसकी जर्नी और कैसे ये भारत की सबसे आइकॉनिक डार्क रम बन गई.

रम नहीं है तो फिर क्या है Old Monk, 1855 से शुरू हुआ था दिलचस्प किस्सा, ब्रिटिश फौजियों के लिए सस्ती बीयर बनाता था मालिक
Old Monk के मालिक कौन हैं?
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अगर दोस्तों के साथ महफ़िल जमानी हो या फिर ठंड की किसी सुहानी शाम को कुछ खास बनाना हो, तो एक नाम ज़ुबान पर सबसे पहले आता है ओल्ड मॉन्क. इसका खूशबू और स्वाद में एक अलग ही अपनापन छिपा है, जो कॉलेज के दिनों से लेकर बड़े होने तक के सफर की याद दिला देता है, लेकिन क्या आप जानते हैं इस आइकॉनिक ड्रिंक की हिस्ट्री क्या है?

Old Monk की शुरुआत कैसे हुई

Old Monk की कहानी अंग्रेजों के दौर से शुरू होती है. 1855 में स्कॉटिश बिजनेसमैन एडवर्ड अब्राहम डायर ने कसौली में एक ब्रूअरी खोली थी, ताकि ब्रिटिश फौजियों को सस्ती बीयर मिल सके. आज़ादी के बाद 1949 में इसे नरेंद्र नाथ मोहन ने खरीद लिया और नाम रखा मोहन मीकिन. फिर 1954 में उनके बेटे वेद रतन मोहन यूरोप गए, वहां मोंक्स के बनाए ड्रिंक से प्रभावित हुए और उसी से आइडिया लेकर Old Monk रम लॉन्च कर दी.

क्यों है यह इतनी खास?

खास स्वाद और खुशबू: ओल्ड मॉन्क का स्वाद बहुत ही स्मूथ और क्रीमी होता है. इसमें वनीला, कैरेमल, चॉकलेट और हल्के मसालों का बेहतरीन मेल मिलता है, जो पीने वाले को पहली बार में ही दीवाना बना देता है.

लंबी प्रक्रिया: इसकी खासियत यह है कि पारंपरिक तरीके से इसे ओक के बैरल में कम से कम 7 साल तक पकाया जाता है, जिससे इसका फ्लेवर और भी गहरा हो जाता है.

बिना विज्ञापन का सफर: इसके सबसे मशहूर लीडर कपिल मोहन ने कभी इसके प्रचार का सहारा नहीं लिया. उनका मानना था कि एक बार जो इसे चख ले, वह किसी और तरफ नहीं देखेगा. यही वजह है कि बिना किसी बड़े विज्ञापन के भी यह घर-घर में अपनी जगह बना चुकी है.

इसे पीने के अलग-अलग अंदाज

ओल्ड मॉन्क को लोग अपनी पसंद के हिसाब से कई तरीकों से एन्जॉय करते हैं। कुछ लोग इसे बिल्कुल नीट पीना पसंद करते हैं, तो कुछ इसमें थोड़ा पानी या कोला और नींबू का रस मिलाकर इसका मज़ा लेते हैं.

FAQs

Old Monk में अल्कोहल की मात्रा कितनी होती है?

इसके क्लासिक वेरिएंट में करीब 42.8% ABV (अल्कोहल बाय वॉल्यूम) होता है. सीधी भाषा में कहें तो इसकी हर बोतल में लगभग 42.8 प्रतिशत हिस्सा अल्कोहल का होता है, जो इसे काफी स्ट्रॉन्ग और असरदार बनाता है.

इसके दीवाने इतने क्यों हैं? लोग इसे क्यों पसंद करते हैं?

इसकी सबसे बड़ी वजह है इसकी जेब पर हल्की होना यानी किफायती कीमत. इसके अलावा, वनीला और कैरेमल जैसी महक, मुंह में घुल जाने वाला स्वाद और दशकों पुरानी पुरानी यादें इसे खास बनाती हैं. सबसे मजेदार बात तो यह है कि बिना किसी बड़े टीवी विज्ञापन के भी यह सिर्फ लोगों के आपस में बात फैलाने से ही घर-घर में मशहूर हो गई.

Old Monk पीने का सही तरीका क्या है?

इसको पीने का सबका अपना-अपना अंदाज़ है. कुछ लोग इसका असली मज़ा लेने के लिए इसे बिल्कुल नीट पीते हैं, तो कुछ लोग इसमें बर्फ के टुकड़े डालते हैं. वहीं, ठंड के दिनों में या दोस्तों की महफिल में इसे कोला, थोड़े पानी और नींबू के साथ मिलाकर पीने का चलन सबसे ज्यादा है.

Old Monk स्वाद में कैसी लगती है?

ओल्ड मॉन्क का स्वाद थोड़ा मीठा और मखमली सा होता है. एक घूंट लेते ही मुंह में वनीला, कैरेमल, चॉकलेट और हल्के-फुल्के मसालों का ऐसा मेल महसूस होता है, जो इसे बाकी ड्रिंक्स से बिल्कुल अलग और यादगार बना देता है.

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