Jaggery In Tea: भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि रोजाना की आदत और भावनाओं से जुड़ी चीज है. सुबह की शुरुआत हो या शाम की थकान, चाय के बिना बात अधूरी लगती है. लेकिन, जैसे-जैसे लोग सेहत को लेकर जागरूक हुए हैं, चाय में डाली जाने वाली चीनी पर सवाल उठने लगे हैं. इसी जगह पर गुड़ एक हेल्दी विकल्प बनकर सामने आता है. बहुत से लोग मानते हैं कि अगर चाय में चीनी की जगह गुड़ डाल दिया जाए, तो वह नुकसानदेह नहीं रहती.
लेकिन, क्या यह सच है? क्या वाकई गुड़ वाली चाय सेहत के लिए बेहतर है, या यह सिर्फ एक भ्रम है? इसी सवाल पर हाल ही में NDTV के आदिकास्ट पॉडकास्ट में चर्चा हुई, जहां फूड वॉरियर उर्वशी अग्रवाल ने गुड़ और चीनी की सच्चाई को आसान भाषा में समझाया.
गुड़ और चीनी दोनों क्या हैं?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि गुड़ और चीनी दोनों ही शुगर के स्रोत हैं. चीनी को रिफाइंड माना जाता है, जबकि गुड़ को कम प्रोसेस्ड कहा जाता है. यही वजह है कि गुड़ को अक्सर नेचुरल और हेल्दी बताकर पेश किया जाता है. यह सच है कि गुड़ में आयरन, कैल्शियम और कुछ अन्य मिनरल्स के अंश हो सकते हैं. लेकिन, सवाल यह है कि क्या चाय में डाली जाने वाली मात्रा से हमें ये पोषक तत्व वाकई मिलते हैं?

चाय में गुड़ डालने से कितना पोषण मिलता है?
हकीकत यह है कि चाय में हम गुड़ बहुत ही कम मात्रा में डालते हैं. आमतौर पर आधा या एक छोटा चम्मच. इतनी कम मात्रा से मिलने वाले मिनरल्स का शरीर पर कोई खास असर नहीं पड़ता. यानी पोषण के लिहाज से गुड़ वाली चाय, चीनी वाली चाय से बहुत अलग नहीं है.
ब्लड शुगर पर असर
एक और अहम बात है ब्लड शुगर स्पाइक. कई लोग यह मान लेते हैं कि गुड़ ब्लड शुगर नहीं बढ़ाता, जबकि ऐसा नहीं है. गुड़ भी शरीर में जाकर ग्लूकोज में बदलता है और ब्लड शुगर को बढ़ाता है ठीक वैसे ही जैसे चीनी करती है. डायबिटीज़ या प्रीडायबिटीज वाले लोगों के लिए यह खास तौर पर ध्यान देने वाली बात है.
असली समस्या कहां है?
समस्या गुड़ या चीनी में नहीं, बल्कि मीठे की आदत में है. जब लोग गुड़ को पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं, तो वे इसकी मात्रा बढ़ा देते हैं. यही आदत धीरे-धीरे सेहत को नुकसान पहुंचाती है, चाहे मीठा गुड़ से आए या चीनी से.
संदेश साफ है:
अगर आप चाय पीते हैं, तो सबसे बेहतर विकल्प है कि मीठा कम करें. कभी-कभी स्वाद के लिए थोड़ा गुड़ या चीनी चल सकती है, लेकिन रोजाना ज्यादा मीठी चाय पीना सही नहीं. सेहत का असली रास्ता विकल्प बदलने में नहीं, बल्कि संतुलन और आदत सुधारने में है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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