Real vs Fake Milk Test: दूध को सेहत का पर्याय माना जाता है, कैल्शियम, प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर. लेकिन, हाल ही में फूड सेफ्टी एंड स्टैडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने पुष्टि की कि गुजरात के साबरकांठा जिले में एक यूनिट पर छापा मारकर ऐसी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया, जो करीब पांच साल से सिंथेटिक दूध बना रही थी. स्थानीय क्राइम ब्रांच (LCB) की कार्रवाई में खुलासा हुआ कि यहां डिटर्जेंट पाउडर, यूरिया खाद, कॉस्टिक सोडा, रिफाइंड पाम व सोयाबीन ऑयल, व्हे पाउडर और स्किम्ड मिल्क पाउडर जैसी चीजों को मिलाकर रोजाना 1700–1800 लीटर तक नकली दूध तैयार किया जाता था. बताया गया कि मात्र 300 लीटर असली दूध में रसायन मिलाकर बड़ी मात्रा में इमिटेशन दूध और छाछ पैक कर साबरकांठा व मेहसाणा में सप्लाई की जा रही थी. मौके पर 1370 लीटर असुरक्षित दूध नष्ट किया गया.
नकली दूध कैसे बनाया गया?
अधिकारियों के मुताबिक, यूनिट में काम करने वाले कर्मचारियों ने असली दूध के रंग, गाढ़ेपन और प्रोटीन लेवल की नकल करने के लिए कई चीजों को मिलाया, टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इनमें शामिल थे:
- डिटर्जेंट पाउडर
- यूरिया उर्वरक
- कटू सोडियम
- प्रोसेस्ड ताड़ का तेल और प्रोसेस्ड सोयाबीन ऑयल
- व्हे पाउडर, स्किम्ड मिल्क पाउडर और प्रीमियम एसएमपी पाउडर
नीचे FSSAI की X पोस्ट देखें:
#Gujarat A major joint raid in Himatnagar, Gujarat, has shut down a dairy unit producing milk from Urea and Palm Oil. The raid was conducted by Food Safety Dept. Gujarat. Investigation into the supply chain is underway. #FSSAIAction #FSSAIinStates #FSSAIAction pic.twitter.com/YIIFaHn1jT
— FSSAI (@fssaiindia) February 8, 2026
दूध में मिलावट क्या है और क्यों खतरनाक?
दूध की क्वालिटी घटाने के लिए उसमें पानी, डिटर्जेंट, स्टार्च, यूरिया, फॉर्मेलिन, रंग मिलाना मिलावट कहलाता है. ऐसे रसायन पेट दर्द, उल्टी, किडनी पर असर, एलर्जी और लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ये काफी नुकसानदायक हो सकता है.
घर पर दूध की शुद्धता जांचने के 6 आसान तरीके | 6 Easy ways to Check the Purity of Milk at Home
नोट: ये घरेलू टेस्ट शुरुआती संकेत देते हैं. शंका होने पर ऑथराइज लैब जांच या लोकल फूड सेफ्टी अधिकारियों से संपर्क करें.
1. स्टार्च की जांच (Iodine Test)
- 2-3 ml दूध उबालकर ठंडा करें.
- 2-3 बूंद आयोडीन सॉल्यूशन डालें.
- नीला रंग आए तो स्टार्च की मिलावट, रंग न बदले/हल्का पीला रहे तो सामान्य.
2. डिटर्जेंट की जांच (Lather Test)
5ml दूध में बराबर पानी मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं. ज्यादा और टिकाऊ झाग बने तो डिटर्जेंट की आशंका, शुद्ध दूध में झाग बहुत कम या अस्थायी होता है.
3. यूरिया की जांच (Litmus Test)
- 5 ml दूध में बराबर मात्रा में सोयाबीन/अरहर पाउडर मिलाकर 5 मिनट छोड़ दें.
- लाल लिटमस पेपर डुबोएं.
- लाल से नीला हो जाए तो यूरिया की मिलावट; लाल ही रहे तो सामान्य.
4. फॉर्मेलिन की जांच
- 10 ml दूध में टेस्ट ट्यूब की दीवार से 2–3 बूंद सघन सल्फ्यूरिक एसिड डालें (हिलाएं नहीं).
- बैंगनी/नीली रिंग बने तो फॉर्मेलिन की आशंका; रंग न बदले तो सामान्य.

5. सिंथेटिक दूध की पहचान
- 5 ml दूध + 5 ml पानी मिलाकर हिलाएं.
- लगातार झाग बने तो सिंथेटिक/डिटर्जेंट मिलावट की संभावना; स्थिर झाग न बने तो बेहतर संकेत.
6. पानी की मिलावट (Drop Test)
- चमकदार, ढलान वाली सतह पर दूध की एक बूंद गिराएं.
- बूंद धीरे-धीरे बहे और सफेद लकीर छोड़े तो शुद्धता का संकेत, तेजी से बह जाए और लकीर न बने तो पानी की मिलावट संभव.
उपभोक्ता क्या करें?
- विश्वसनीय ब्रांड/वेंडर से ही खरीदें.
- पैकेजिंग, गंध और स्वाद पर ध्यान दें.
- संदिग्ध प्रोडक्ट्स दिखें तो लोकल फूड सेफ्टी हेल्पलाइन/अधिकारियों को सूचित करें.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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