सोमवती अमावस्या इस बार 15 जून को मनाई जाएगी. सोमवती अमावस्या का दिन कालसर्प दोष और पितृ दोष से मुक्ति के लिए अत्यंत उत्तम और शुभ माना जाता है. पंडितों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की पूजा और विशेष उपाय करने से कालसर्प दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. श्री शिव शक्ति मंदिर, यमुना विहार दिल्ली, पंडित कौशल पाण्डेय से जानिए सोमवती अमावस्या पर कालसर्प दोष का निवारण कैसे करें.
पंडित कौशल पाण्डेय के मुताबिक, जन्मकुंडली में 12 प्रकार के कालसर्प योग हैं, जो विख्यात सर्पों के नाम पर आधारित हैं. कई बार यह योग जातक को बहुत ऊंचाई पर भी ले जाते है. इसलिए ऐसा कहना गलत होगा कि यह सब के लिए अशुभ है. किसी योग्य विद्वान से जन्मकुंडली दिखा कर अपने जीवन में आने वाले अशुभ प्रभाव को समय रहते कम किया जा सकता है.
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12 प्रचलित योग
- अनंतकालसर्प योग
- कुलिककालसर्प योग
- वासुकिकालसर्प योग
- शंखपालकालसर्प योग
- पदमकालसर्प योग
- महापदमकालसर्प योग
- तक्षककालसर्प योग
- कारकोटककालसर्प योग
- शंखचूड़कालसर्प योग
- घातककालसर्प योग
- विषधरकालसर्प योग
- शेषनागकालसर्प योग
आज के दिन पित्र दोष, कालसर्प दोष की शांति के लिए बहुत ही शुभ दिन है, कालसर्प वैसे देखा जाए तो सर्प योनी के बारे में अनेक वर्णन मिलते हैं. हमारे धर्म शास्त्रों में गीता में स्वयं भगवान् श्री कृष्ण ने कहा है कि पृथ्वी पर मनुष्य का जन्म केवल विषय वासना के कारण जीव की उत्त्पत्ति होती है. जीवरुपी मनुष्य जैसा कर्म करता है उसी के अनुरूप फल मिलता है.
वासना के कारण ही काम-क्रोध, मद-लोभ और अहंकार का जन्म होता है इन विकारों को भोगने के कारण ही जीव को सर्प योनी प्राप्त होती है. कर्मों के फलस्वरूप आने वाली पीढ़ियों पर पड़ने वाले अशुभ प्रभाव को कालसर्प दोष कहा जाता है. कुंडली में जब सारे ग्रह राहू और केतु के बीच में आ जाते है तब कालसर्प योग बनता है, ज्योतिष में इस योग को अशुभ मन गया है, लेकिन कभी-कभी यह योग शुभ फल भी देता है, ज्योतिष में राहू को काल तथा केतु को सर्प माना गया है. राहू को सर्प का मुख तथा केतु को सर्प का पूंछ कहा गया है. वैदिक ज्योतिष में राहू और केतु को छाया ग्रह संज्ञा दी गई है.
राहू का जन्म भरणी नक्षत्र में तथा केतु का जन्म अश्लेषा में हुआ है, जिसके देवता काल एवं सूर्य है. राहू को शनि का रूप और केतु को मंगल ग्रह का रूप कहा गया है, राहु मिथुन राशि में उच्च तथा धनु राशि में नीच होता है, राहु के नक्षत्र आर्द्रा स्वाति और शतभिषा है.
काल सर्प योग में जन्मे जातक में क्या लक्ष्ण हैं?
- सपने में नदी, तालाब, कुए और समुद्र का पानी दिखाई देता है.
- सपने में वह खुद को पानी में गिरते एवं उससे बाहर निकलने का प्रयास करते करते हुए दिखना है.
- रात को उल्टा होकर सोने पर ही चेन की नींद आती है.
- सपने में उसे मकान अथवा पैरो से फल आदि गिरते दिखाई देता है.
- पानी से ओर ज्यादा ऊंचाई से डर लगता है.
- मन में कोई अज्ञात भय बना रहता है.
- वह खुद को अन्य लोगों से झगड़ते हुए देखता है.
- उन्हें बुरे सपने आते है, जिसमें अक्सर सांप दिखाई देता है.
कालसर्प का निवारण कैसे करें?
देव ऋषि व्यास के अनुसार, इस तिथि में मौन रहकर स्नान-ध्यान करने से सहस्त्र गौ दान के समान पुन्य फल प्राप्त होता है. शास्त्रो में जो उपाय बताए गए हैं उनके अनुसार जातक किसी भी मंत्र का जप करना चाहे, तो निम्न मंत्रों में से किसी भी मंत्र का जप-पाठ आदि कर सकता है.
ॐ नम शिवाय मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए और शिवलिंग के उपर गंगा जल, कला तिल चढ़ाएं.
महामृत्युंजय मत्र- ॐ हौं ॐ जूं˙ सः ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ त्र्यंवकंयजामहे सुगंधि पुष्टि वर्धनम् उर्वारुकमिव वन्धनाम् मृर्त्योमुक्षीय मामृतात्॥ ॐ स्वः ॐ भुवः ॐ भूः सः ॐ जूं ॐ हौं ॐ ॥
राहु मंत्र- ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः और केतु मंत्र- ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
नव नाग स्तुति- अनंतं वासुकिं शेषंपद्म नाभं च कम्बलं। शंख पालं धृत राष्ट्रं तक्षकं कालियंतथा॥ एतानि नव नामानि नागानां चमहात्मनां। सायं काले पठेन्नित्यं प्रातः कालेविशेषतः॥ तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयीभवेत्॥
सोमवती अमावस्या या नाग पंचमी के दिन रूद्राभिषेक कराना चाहिए. नाग के जोड़े चांदी या सोने में बनवाकर उन्हें बहते पानी में प्रवाहित कर दें. सोमवती अमावस्या को दूध की खीर बना, पितरों को अर्पित करने से भी इस दोष में कमी होती है या फिर प्रत्येक अमावस्या को एक ब्राह्मण को भोजन कराने व दक्षिणा वस्त्र भेंट करने से पितृ दोष कम होता है. शनिवार के दिन पीपल की जड़ में गंगा जल, कला तिल चढ़ाएं. पीपल और बरगद के वृ्क्ष की पूजा करने से पितृ दोष की शान्ति होती है. नागपंचमी के दिन व्रत रखकर नाग देव की पूजा करनी चाहिए.
कालसर्प गायत्री मंत्र
कालसर्प गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए. ॐ काल शर्पेभ्यो नमः… इस मंत्र को बोल कर कच्चे दूध को गंगाजल में मिलाकर उसमें काला तिल डाले और बरगद के पेड़ में दूध की धारा बनाकर ११ बार परिक्रमा करें या शिवलिंग पर ॐ नमः शिवाय बोलकर चढ़ाएं तो सर्प दोष से मुक्ति मिलेगी.
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