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अरुणाचल में 12 गांवों के लिए देवदूत बने हाथी; बाढ़ पीड़ितों तक दवा, राशन और ईंधन पहुंचाने का सहारा

अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में बाढ़ से कटे 12 से अधिक गांवों तक राहत सामग्री, दवाइयां और ईंधन पहुंचाने के लिए हाथियों की मदद ली जा रही है. यह पहल संकट के समय मानवता और प्रकृति के सहयोग की अनोखी मिसाल बन गई है.

अरुणाचल में 12 गांवों के लिए देवदूत बने हाथी; बाढ़ पीड़ितों तक दवा, राशन और ईंधन पहुंचाने का सहारा
अरुणाचल की बाढ़ में देवदूत बने हाथी: 12 कटे हुए गांवों तक पीठ पर ढोकर पहुंचा रहे राशन, दवा और उम्मीद

Arunachal Flood: अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में आई विनाशकारी बाढ़ ने जहां सड़कें, पुल और संचार व्यवस्था तबाह कर दी, वहीं संकट की इस घड़ी में हाथी सैकड़ों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आए हैं. नारी-कोयू विधानसभा क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव अब भी मुख्य मार्गों से कटे हुए हैं. ऐसे में प्रशासन और ग्रामीणों ने राहत सामग्री, दवाइयां, खाद्यान्न और ईंधन पहुंचाने के लिए हाथियों का सहारा लिया है. कठिन पहाड़ी रास्तों, उफनती नदियों और पथरीले मार्गों के बावजूद ये विशालकाय जीव लगातार जरूरी सामान ढोकर उन गांवों तक पहुंचा रहे हैं, जहां इंसानी पहुंच बेहद मुश्किल हो गई है.

बाढ़ ने तोड़ दिए संपर्क के सभी रास्ते

हाल ही में आई फ्लैश फ्लड ने अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले के नारी-कोयू क्षेत्र में भारी तबाही मचाई. बाढ़ के कारण कई सड़कें और पुल बह गए, जिससे पूरे इलाके की संपर्क व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई. सबसे ज्यादा असर कोयू सर्कल के गांवों पर पड़ा, जहां आज भी 12 से अधिक गांव मुख्य सड़क नेटवर्क से कटे हुए हैं. इन गांवों तक न तो वाहन पहुंच पा रहे हैं और न ही सामान्य तरीके से जरूरी सामान भेजा जा सकता है.

Arunachal Flood: हाथियों से राहत पहुंच रही

Arunachal Flood: हाथियों से राहत पहुंच रही

जब कोई रास्ता नहीं बचा, तब हाथी बने सहारा

ऐसे हालात में प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से एक अनोखा समाधान निकाला. राहत सामग्री, ईंधन, दवाइयों और अन्य जरूरी वस्तुओं को पहुंचाने के लिए हाथियों की मदद ली जा रही है. हाथी अपनी पीठ पर भारी सामान लादकर उन दुर्गम रास्तों से गुजर रहे हैं, जहां इंसानों और वाहनों के लिए पहुंचना बेहद कठिन है.

आसान नहीं है यह सफर

इन हाथियों के लिए भी यह काम आसान नहीं है. उन्हें ऊंची-नीची पहाड़ियों, तेज बहाव वाली नदियों और पत्थरों से भरे संकरे रास्तों को पार करना पड़ता है. कई किलोमीटर लंबे सफर के दौरान उन्हें लगातार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. इसके बावजूद ये हाथी बिना रुके राहत कार्य में जुटे हुए हैं.

गांवों तक पहुंच रही राहत

हाथियों के जरिए प्रभावित गांवों तक खाद्यान्न, दवाइयां, ईंधन और अन्य जरूरी वस्तुएं पहुंचाई जा रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाथियों की मदद नहीं ली जाती तो कई गांवों में राहत सामग्री पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता. इस व्यवस्था ने सैकड़ों बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत का काम किया है.

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