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सोमवती अमावस्या आज, ज्योतिषाचार्य से जानिए स्नान-दान का शुभ समय और कौन-से महाउपाय दिला सकते हैं सुख-समृद्धि

धार्मिक मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष फल प्राप्त होता है. इस बार पड़ रही सोमवती अमावस्या कई शुभ संयोगों के कारण और भी खास मानी जा रही है.

सोमवती अमावस्या आज, ज्योतिषाचार्य से जानिए स्नान-दान का शुभ समय और कौन-से महाउपाय दिला सकते हैं सुख-समृद्धि
जानें सोमवती अमावस्या पर स्नान-दान और पूजा के शुभ मुहूर्त
(P.C- NDTV)

आज यानी 15 जून, सोमवार को सोमवती अमावस्या है. सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. वहीं, पितरों के लिए तर्पण और दान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है.

स्नान-दान और पूजा के शुभ मुहूर्त

आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:03 बजे से 4:43 बजे तक रहेगा. पवित्र स्नान के लिए यह सबसे उत्तम समय माना गया है. इसके बाद अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा. पूजा और मांगलिक कार्यों के लिए ये समय शुभ माना जाता है. इसके अलावा शाम 5:23 बजे से 7:08 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग रहेगा. विशेष पूजा और उपायों के लिए यह समय फलदायी माना गया है.

पितरों की कृपा पाने के उपाय

ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं, यह अमावस्या पितरों की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस दिन जौ, काले तिल और कुशा से पितृ तर्पण करना शुभ माना जाता है. साथ ही पितरों के नाम पर ब्राह्मणों को भोजन कराने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है.

आज जरूर करें ये महाउपाय

  • शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं.
  • दक्षिण दिशा में सरसों के तेल या घी का दीपक जलाने से दुर्घटना और अनहोनी की आशंकाएं दूर होने की मान्यता है.
  • आर्थिक परेशानियों से राहत पाने के लिए घर के ईशान कोण में शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाएं.
  • गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों को भोजन कराना भी शुभ माना गया है. इससे जीवन की बाधाएं कम होती हैं और सकारात्मकता बढ़ती है.

ज्योतिषाचार्य बताते हैं, सोमवती अमावस्या केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, पितरों के प्रति सम्मान और दान-पुण्य के महत्व को समझने का अवसर भी है. श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया स्नान, दान और उपाय व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं.

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