सावन के आखिरी सोमवार को भगवान शिव की पूजा के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. इस दिन जलाभिषेक और पूजा के साथ शिवलिंग की परिक्रमा भी की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग की परिक्रमा पूरी नहीं की जाती है. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि शिवलिंग की अर्धचंद्राकार परिक्रमा करने की परंपराा है और सोमसूत्र यानी जलाधारी को पार करना उचित नहीं माना जाता है.
शिवलिंग की पूरी परिक्रमा क्यों नहीं
पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि शिवलिंग की 360 डिग्री यानी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार जलाधारी के उस हिस्से को पार नहीं किया जाता, जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है. इसलिए परिक्रमा करते समय वहीं से वाापस लौटने की परंपरा है.
सोमसूत्र या जलाधारी न लांघें
उन्होंने बताया कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल जिस रास्ते से बाहर निकलता है, उसे सोमसूत्र या जलहरी कहा जाता है. ऐसी मान्यता के अनुसार इसे लांघना वर्जित है. इसलिए भक्तों को परिक्रमा करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
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ऊर्जा के प्रवाह से जुड़ी है मान्यता
ज्योतिषाचार्य के अनुसार धार्मिक मान्यता में शिवलिंग और अभिषेक के जल को अत्यंत पवित्र माना गया है. ऐसी मान्यता है कि जलाधारी को पाार करने से ऊर्जा के प्रवाह में असंतुलन हो सकता है. इसी वजह से भक्त वहां पहुंचकर वापस लौटते हैं.
ऐसे करें शिवलिंग की परिक्रमा
पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि परिक्रमा बाईं ओर से शुरू करें और जलाधारी तक पहुंचने के बाद उसे पार किए बिना विपरीत दिशा से वापस लौटें. इस तरह पूरी प्रक्रिया को एक अर्ध परिक्रमा माना जाता है. सावन के आखिरी सोमवार को भी यही नियम बताया गया है.
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