बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस रेखा आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. अपनी खूबसूरती, दमदार एक्टिंग और खास अंदाज से उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक अलग मुकाम बनाया है. लेकिन एक समय ऐसा भी था जब रेखा फिल्म इंडस्ट्री में बिल्कुल नई थीं और हिंदी भाषा से भी पूरी तरह परिचित नहीं थीं. रेखा ने हिंदी सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत 1970 में आई फिल्म 'सावन भादों' से की थी. इस फिल्म में उनके साथ नवीन निश्चल नजर आए थे. खास बात यह है कि इसी फिल्म का एक गाना रेखा के शुरुआती फिल्मी सफर से जुड़ा बेहद खास किस्सा है.
'सावन भादों' से हिंदी सिनेमा में एंट्री
मोहान सहगल के निर्देशन में बनी 'सावन भादों' रेखा और नवीन निश्चल दोनों की हिंदी फिल्मों में डेब्यू फिल्म थी. फिल्म में रेखा ने चंदा नाम की गांव की लड़की का किरदार निभाया था, जबकि नवीन निश्चल ने विक्रम की भूमिका निभाई थी. फिल्म की कहानी में रोमांस के साथ परिवार, जमीन-जायदाद और साजिश का तड़का भी था.
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रेखा उस समय काफी यंग थीं. इससे पहले वह दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम कर चुकी थीं, लेकिन हिंदी फिल्मों का सफर उनके लिए बिल्कुल नया था. 'सावन भादों' की रिलीज के बाद उनका नाम हिंदी सिनेमा में तेजी से पहचाना जाने लगा. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन किया और रेखा के करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.
मोहम्मद रफी की आवाज में गाना
फिल्म 'सावन भादों' के गानों को संगीतकार सोनिक-ओमी ने तैयार किया था और गीतकार वर्मा मलिक थे. फिल्म के सबसे चर्चित गानों में 'कान में झुमका, चाल में ठुमका' शामिल था, जिसे महान गायक मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी थी. इस गाने में नवीन निश्चल और रेखा नजर आए थे.
इसके अलावा फिल्म में आशा भोसले और मोहम्मद रफी की आवाज में 'सुन सुन सुन ओ गुलाबी कली' भी शामिल था. फिल्म के कई गाने उस दौर में काफी पसंद किए गए थे.
पहली फिल्म से ही दिखा रेखा का अंदाज
'सावन भादों' में रेखा का किरदार चुलबुला और बेबाक था. फिल्म में उनकी नवीन निश्चल के साथ जोड़ी दर्शकों को पसंद आई. शुरुआती दौर में रेखा के लुक और हिंदी को लेकर भले ही कई तरह की बातें हुईं, लेकिन उनके आत्मविश्वास और स्क्रीन प्रेजेंस ने जल्द ही लोगों का ध्यान खींच लिया.
आज रेखा हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं. 'उमराव जान', 'मुकद्दर का सिकंदर' और 'सुहाग' जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने एक्टिंग और डांस से अलग पहचान बनाई. लेकिन उनके इस लंबे और शानदार सफर की शुरुआत 1970 की 'सावन भादों' से हुई थी, जहां एक यंग रेखा पहली बार हिंदी सिनेमा के दर्शकों के सामने आई थीं.
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