- आगर-मालवा जिले में 24 अगस्त सोमवार को बाबा बैजनाथ की शाही सवारी निकलेगी.
- एक हजार साला पुराना बाबा बैजनाथ मंदिर पूजा और आस्था की कहानी भर नहीं है.
- 1880 में बाबा के चमत्कार का अंग्रेजी हुकूमत के कर्नल मार्टिन ने जीवंत अहसास किया था.
मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में 24 अगस्त सोमवार को बाबा बैजनाथ की शाही सवारी निकलेगी. इस शाही सवारी में बाबा के एक लाख से ज्यादा भक्त शामिल होंगे. इसके लिए शहर में खास इंतजाम किए गए हैं. शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर इंदौर-कोटा अंतरराज्यीय मार्ग पर हरियाली से ढकी पहाड़ियों के बीच बाबा बैजनाथ महादेव का 1000 साल पुराना मंदिर हैं. घंटियों की आवाज, धूप-अगरबत्ती की खुशबू, बाणगंगा की कल-कल और पहाड़ियों से आती ठंडी हवा मंदिर पहुंचने वाले भक्तों को छूकर गुजरती है तो ऐसा लगता है जैसे समय कुछ पल के लिए ठहर गया हो.
शिलालेख देते हैं मंदिर की प्राचीनता की गवाही
बाबा बैजनाथ का मंदिर पूजा और आस्था की कहानी भर नहीं है, यहां का हर पत्थर इतिहास को समेटे हुए है. मंदिर का हजार साल पुराना इतिहास, इसकी स्थापना को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक मान्यताएं और मंदिर परिसर में मौजूद शिलालेख इसकी प्राचीनता की गवाही देते हैं. मंदिर के सामने सती के ओटले पर मौजूद शिलालेख में संवत 1116 का उल्लेख मिलता है. जिससे साफ है कि इस क्षेत्र में हजार साल से भी पहले आबादी और धार्मिक गतिविधियां चल रही थीं.

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बाबा बैजनाथ के जीवंत अनुभव अहसास
कर्नल मार्टिन की पत्नी ने बाबा से की प्रार्थना
सन 1880 की बात है, अब के उत्तर प्रदेश स्थित आगर में अंग्रेजी छावनी थी, जहां कर्नल मार्टिन तैनात थे. इसी बीच उन्हें युद्ध के लिए काबुल (अफगानिस्तान) जाना पड़ा. पहले दिन बीते, फिर महीने लेकिन, कर्नल मार्टिन की कोई खबर नहीं आई. पति की कोई खबर नहीं आने से उनकी पत्नी लेडी मार्टिन चिंतित होने लगीं. कहा जाता है कि इस दौरान उनसे किसी ने कहा कि वे बाबा बैजनाथ के दर्शन करें. पति के परेशान लेडी मार्टिन बाबा बैजनाथ के दरबार में पहुंचीं और बाबा से प्रार्थना की. उन्होंने मन्नत मांगने हुए कहा- 'अगर मेरे पति कर्नल मार्टिन सकुशल घर वापस लौट आए तो मंदिर का शिखर बनवाऊंगी.

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कर्नल मार्टिन का पत्र- 'कोई युद्ध में मेरी मदद कर रहा था'
लेडी मार्टिन के बाबा बैजनाथ के दर्शन करने के कुछ दिन बाद ही कर्नल मार्टिन का पत्र आ गया. जिसमें उन्होंने एक रहस्यमयी अनुभव का जिक्र किया था. बताया जाता है कि उस पत्र में कर्नल मार्टिन ने लिखा था- 'युद्ध के बीच कोई अज्ञात व्यक्ति उनकी मदद कर रहा था, जिसके बाल बड़े-बड़े थे, हाथ में त्रिशूल था और वह बैल पर सवार था'. इस पत्र के आने के बाद लेडी मार्टिन को अहसास हुआ कि यह सब बाबा बैजनाथ की कृपा है. इसके बाद कर्नल मार्टिन सकुशल घर लौटे और उनकी पत्नी की मन्नत पूरी हुई.
मन्नत पूरी होने पूरी होने पर लेडी मार्टिन ने कराया निर्माण

Photo Credit: agar malwa baba baijnath temple history colonel martin in hindi
आग्नेय पाषाण से निर्मित शिवलिंग
बाबा बैजनाथ मंदिर के गर्भगृह के मध्य में आग्नेय पाषाण से निर्मित शिवलिंग स्थापित है. सामने विशाल सभा मंडप है, जिसके 14 द्वार चारों तरफ से खुले हैं. यहां नंदी की प्राचीन प्रतिमा है. साथ ही शिखर के बीच में ब्रह्मा-विष्णु-महेश की प्रतिमाएं और सबसे ऊपर स्वर्ण कलश स्थापित है जो मंदिर की भव्यता को और बढ़ाता है.
बाबा बैजनाथ मंदिर के आसपास पूरा धार्मिक संसार
जब केस लड़ने खुद अदालत पहुंचे बाबा बैजनाथ
बाबा बैजनाथ के चमत्कार की कहानी सिर्फ कर्नल मार्टिन तक सीमित नहीं है. इसमें नित्यानंद जी के शिष्य जय नारायण बापजी का भी नाम है जो आज भी भक्तों को सुनाई जाती है. कहा जाता है कि पेशे से वकील जय नारायण जी बाबा बैजनाथ के बड़े भक्त थे. उन्हें केस लड़ने के लिए अदालत जाना था, लेकिन वे बाबा की साधना में लीन हो गए, उन्हें समय का कोई आभास ही नहीं था. इस दौरान बाबा बैजनाथ खुद अदालत पहुंचे और उनके पक्षकार की पैरवी की. कोर्ट में पक्षकार की जीत हुई, बाद में सबको पता चला कि जय नारायण जी तो कोर्ट गए ही नहीं, वे साधना कर रहे थे.
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