Bhaum Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बेहद खास महत्व है. यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है, जो विशेष रूप से शुभ माना जाता है. आज यानी 28 अप्रैल, मंगलवार को भौम प्रदोष व्रत है. यह दिन विशेष रूप से कर्ज, विवाद और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन शिव पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. वहीं, शुभ मुहूर्त में पूजा करने से व्रत का फल और अधिक बढ़ जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं भौम प्रदोष की पूजा विधि और पूजा का शुभ मुहूर्त-
प्रदोष व्रत की तिथि और समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल को शाम 6 बजकर 51 मिनट से शुरू हो रही है और 29 अप्रैल को शाम 7 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इसे दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है.
प्रदोष काल का समयप्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के समय, यानी प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है. आज प्रदोष काल शाम 06 बजकर 54 मिनट से रात 09 बजकर 04 बजे मिनट तक रहेगा.
भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें.
- पूजा स्थान को साफ करके शिवलिंग या भगवान शिव की तस्वीर स्थापित करें.
- भगवान शिव का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें.
- इसके बाद फिर चंदन लगाएं और बेलपत्र, फूल तथा धतूरा अर्पित करें.
- पूजा के समय शक्कर और घी से बने मिष्ठान का भोग लगाया जाता है.
- इसके बाद शिव के मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करें.
- प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और अंत में घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें.
- दिनभर उपवास रखते हुए मन में शिव का स्मरण करें.
- शाम के समय पुनः स्नान करें और प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें.
प्रदोष काल में मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है. 'ऊं नमः शिवाय' मंत्र का जाप सबसे सरल और प्रभावशाली माना जाता है. इसके अलावा आप महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर सकते हैं.
शिवजी रुद्र मंत्र:ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
प्रदोष स्तुति:शिवाय नमस्तुभ्यं प्रदोषं पूजितं मया। क्षमस्व अपराधं मे करुणासागर प्रभो॥
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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