श्रीकृष्ण की छवि की बात हो तो सिर पर मोर मुकुट, हाथों में बांसुरी और गले में वैजयंती माला जरूर नजर आती है. भगवान के स्वरूप का यह श्रृंगार देखने में जितना सुंदर लगता है, इसके पीछे उतना ही गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक अर्थ बताया जाता है. ऐसी मान्यता है कि वैजयंती माला केवल आभूषण नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और विजय का प्रतीक है. आइए, आचार्य मदन मोहन से जानते हैं कि कान्हा को यह माला क्यों प्रिय मानी जाती है.
प्रकृति और भक्ति के संतुलन का प्रतीक
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि श्रीकृष्ण के गले में दिखाई देने वाली वैजयंती माला प्रकृति और सच्ची भक्ति के बीच संतुलन का प्रतीक मानी जाती है. 'वैजयंती' का अर्थ विजय दिलाने वाली से जोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यताओं में इसे धारण करने से जीवन में सफलता और मन को शांति मिलने की बात कही गई है.
माला में माता लक्ष्मी का वास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण के हृदय में राधा रानी का वास माना जाता है. इसी वजह से वैजयंती माला को माता लक्ष्मी से भी जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि इस पवित्र माला में लक्ष्मी तत्व का वास होताा है और यह सुख-समृद्धि का प्रतीक है.
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राधा और ब्रज से जुड़ी है माला
आचार्य ने बताया कि वैजयंती के पौधे ब्रज क्षेत्र से भी जुड़े माने जाते हैं. इनके बीजों से तैयार माला कृष्ण को ब्रज और राधा रानी की याद दिलाने वाली मानी जाती है. यही वजह है कि इसे कान्हा के श्रृंगार का खास हिस्सा मानाा जाता है.
नकारात्मकता दूर करने की मान्यता
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि वैजयंती माला धारण करने से मन शांत रहने और आत्मविश्वास बढ़ने की धार्मिक मान्यता है. इसे नकारात्मक ऊर्जा से बचाव और सकारात्मकता बढ़ाने वाला भी माना जाता है.
सफलता और आकर्षण से भी जोड़ी जाती है माला
उन्होंने बताया कि वैजयंती माला पहनने वाले व्यक्ति के व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ता है. साथ ही मान-सम्मान, सुख और समृद्धि प्राप्त होने की बात भी कही जाती है. हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं है औरर वैज्ञानिक दावे नहीं है.
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