गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश को समर्पित सबसे खास पर्वों में से एक है. भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और उनकी पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं. मुंबई में गणेश चतुर्थी का उत्सव बेहद भव्य और उत्साह के साथ मनाया जाता है. लालबागचा राजा मुंबई का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय पंडाल है, जहां दर्शन के लिए लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है. लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना 12 सितंबर 1934 को हुई थी. इस साल मंडल अपने 93वें गणेशोत्सव का आयोजन कर रहा है. मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा की पहली झलक आज, 11 सितंबर शाम 7 बजे लालबाग, परेल में भक्तों के लिए दिखाई जाएगी.
लालबागचा राजा का पहला लुक आज सामने आएगा
मंडल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गणेशोत्सव 14 सितंबर गणेश चतुर्थी से 25 सितंबर अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाएगा. अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के साथ इस भव्य उत्सव का समापन होगा. हर साल की तरह इस बार भी भक्तों को लालबागचा राजा की पहली झलक का बेसब्री से इंतजार है. जैसे-जैसे मुंबई का गणेशोत्सव नजदीक आता है, वैसे-वैसे इस ऐतिहासिक और लोकप्रिय गणपति पंडाल को लेकर उत्साह और श्रद्धा बढ़ने लगती है.
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लालबागचा राजा के दर्शन का समय?
लालबागचा राजा के दर्शन पूरे गणेशोत्सव के दौरान लगभग 24 घंटे यानी दिन-रात जारी रहते हैं. पिछले कुछ सालों के शेड्यूल को देखते हुए बात की जाए तो आम श्रद्धालुओं के लिए जनरल दर्शन सुबह करीब 5 बजे शुरू हो जाते हैं. वहीं, मुख दर्शन और चरण स्पर्श के लिए लाइनें सुबह 6 बजे खुलती हैं और देर रात तक चलती रहती हैं.
पहले दर्शन का समय- आज शाम 7:00 बजे
स्थान- लालबाग मार्केट, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर रोड, परेल, मुंबई
उत्सव की अवधि- गणेशोत्सव 14 सितंबर 2026 (गणेश चतुर्थी) से शुरू होकर 25 सितंबर 2026 (अनंत चतुर्दशी/विसर्जन) तक चलेगा
लालबागचा राजा की कहानी
20वीं सदी की शुरुआत में लालबाग, परेल और आसपास का इलाका मुंबई के प्रसिद्ध गिरणगांव का हिस्सा था. यहां बड़ी संख्या में कपड़ा मिलों के मजदूर, मछुआरे, छोटे व्यापारी और दुकानदार रहते थे. उस समय बाजार और चॉलें लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं. लालबागचा राजा की शुरुआत की कहानी पेरू चॉल के एक बाजार से जुड़ी है. साल 1932 में यह बाजार बंद हो गया, जिससे स्थानीय मछुआरों और दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया. उनके पास अपना सामान बेचने के लिए कोई स्थायी जगह नहीं बची. तब उन्होंने भगवान गणेश से प्रार्थना की और एक मनौती मांगी कि उन्हें एक स्थायी बाजार मिल जाए.
इसके बाद स्थानीय लोगों और कई समाजसेवियों ने मिलकर प्रयास शुरू किए. इनमें काउंसिलर कुंवरजी जेठाभाई शाह, डॉ. वी. बी. कोरगांवकर, नाखावा कोकम मामा, भाऊसाहेब शिंदे और डॉ. यू. ए. राव जैसे लोग शामिल थे. उनके प्रयासों से जमीन की मालकिन राजाबाई तैयबअली ने बाजार बनाने के लिए एक भूखंड उपलब्ध कराने पर सहमति दे दी. इसी मनौती के पूरा होने की खुशी में गणेशोत्सव की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर लालबागचा राजा के रूप में देश के सबसे प्रसिद्ध और श्रद्धेय गणेशोत्सवों में से एक बन गया. आज लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचते हैं.
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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