गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश को समर्पित सबसे खास पर्वों में से एक है. इस दिन भक्त पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ अपने घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं. भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और उनकी पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं. इस साल गणेश चतुर्थी की शुरुआत 14 सितंबर से हो रही है. गणेश जी की पूजा में दूर्वा यानी दूब घास चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है. गणपति की पूजा में मोदक के साथ दूर्वा का विशेष महत्व माना जाता है. चलिए आपको बताते हैं गणेश जी को 21 दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है और दूर्वा चढ़ाने का सही तरीका क्या है?
गणेश जी को 21 दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती हैं?
भगवान गणेश को 21 दूर्वा यानी दूब घास चढ़ाने के पीछे पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व जुड़ा हुआ है. धार्मिक परंपरा में दूर्वा को शीतल, पवित्र और आसानी से उपलब्ध घास माना गया है. गणपत्यथर्वशीर्ष में कहा गया है कि जो व्यक्ति दूर्वा के अंकुरों से गणपति की उपासना करता है, उसे कुबेर के समान ऐश्वर्य प्राप्त होता है.
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पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में अनलासुर नामक एक अत्याचारी दैत्य था, जो ऋषि-मुनियों और साधारण मनुष्यों को जिंदा निगल जाता था. दैत्य से त्रस्त होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और प्रमुख ऋषि-मुनि महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे. सभी ने शिवजी से प्रार्थना की कि वे अनलासुर के आतंक का नाश करें. शिवजी ने सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की प्रार्थना सुनकर कहा कि अनलासुर का अंत केवल श्रीगणेश ही कर सकते हैं. देवताओं की प्रार्थना पर भगवान गणेश ने अनलासुर को निगल लिया. इससे गणेश जी के पेट में अत्यधिक जलन होने लगी. कई उपाय करने के बाद भी जब उनकी जलन शांत नहीं हुई, तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें बनाकर भगवान गणेश को खाने के लिए दीं. दूर्वा ग्रहण करने से श्री गणेश के पेट की तेज जलन शांत हो गई. तभी से गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई और यह उन्हें अत्यंत प्रिय हो गई.
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दूर्वा चढ़ाने का सही तरीका
- शुद्धता- दूर्वा साफ, ताजी और हरी होनी चाहिए. चढ़ाने से पहले उसे साफ जल या गंगाजल से धो लें.
- त्रिपर्णी रूप- ऐसी दूर्वा चुनें जिसमें आगे तीन या पांच पत्तियां (कोपलें) हों.
- गांठ बनाना- 21 दूर्वा को एक साथ धागे से बांधकर एक गांठ या विशिष्ट गुच्छा तैयार किया जाता है.
- समर्पण- यह 21 गांठें गणेश जी के चरणों में नहीं, बल्कि उनके मस्तक पर अर्पित की जाती हैं.
- मंत्र दूर्वा चढ़ाते समय “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है.
- पूजा में दूर्वा के साथ फूल, अक्षत, सिंदूर और मोदक आदि अर्पित करें.
- इसके बाद गणेश जी की आरती करके मनोकामना और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.
यह भी पढ़ें:- गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें बप्पा की स्थापना और पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और विधि
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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