हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाता है. यह दिन भगवान विश्वकर्मा को समर्पित होता है. जिन्हें हिंदू धर्म में देवताओं के शिल्पकार, वास्तुकार और दिव्य निर्माणकर्ता के रूप में पूजा जाता है. इस दिन खास तौर पर कारखानों, दुकानों और कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों, वाहनों और दूसरे उपकरणों की पूजा की जाती है. आचार्य मदन मोहन के अनुसार, इसके पीछे धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है.
इस दिन मशीनों और औजारों की क्यों होती है पूजा
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने सोने की लंका, श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी, इंद्रपुरी और पुष्पक विमान जैसे दिव्य निर्माण किए थे. इसलिए मशीनों, औजारों और उपकरणों को भगवान विश्वकर्मा से जोड़कर देखा जाता है. विश्वकर्मा पूजा पर इनकी पूजा करने की परंपरा इसी मान्यता से जुड़ी है. माना जाता है कि इससे काम में आाने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बना रहता ाहै.
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विश्वकर्मा पूजा पर क्या करें?
सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें. इसके बाद दुकान, कारखाने या कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करें. मशीनों, औजारों और वाहनों को साफ करके भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करें. हल्दी, कुमकुम, चंदन और फूल अर्पित करें. घी का दीपक जलााकर आरती करें और फल-मिठाई का भोग लगाएं.
पूजा के दिन न करें ये काम
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि इस दिन मशीनों और औजारों का इस्तेमाल न करने की धार्मिक मान्यता है. इसके अलावा मांस-मदिरा जैसे तामसिक पदार्थों से दूर रहनाा चाहिए. किसी से विवाद करने या मन में नकारात्मक विचाार रखने से भी बचना चाहिए.
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